नांदेड के किनवट आदिवासी प्रोजेक्ट दफ्तर में 16 करोड़ का घोटाला, 280 चेक निजी खातों में वटाए गए
एक हजार रुपये कमिशन का लालच देकर सरकारी चेक निजी बैंक खातों में वटाने का मामला सामने आया है
नांदेड जिले के किनवट में एकात्मिक आदिवासी विकास प्रोजेक्ट दफ्तर से जुड़ा एक बड़ा आर्थिक घोटाला सामने आया है, जिसने पूरे मराठवाड़ा में हलचल मचा दी है। आदिवासियों के विकास के लिए आए सरकारी फंड में से करीब 16 करोड़ 37 लाख रुपये के गबन का आरोप लगा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह कोई एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 280 चेक हैं जो सीधे प्राइवेट लोगों, कारोबारियों और दूसरे गैर-सरकारी खातों में ट्रांसफर किए गए।
आरोप के मुताबिक जिन लोगों के खातों का इस्तेमाल हुआ, उन्हें एक अजीब ऑफर दी गई थी - चेक लो, अपने खाते में वटाओ, और बदले में एक हजार रुपये कमिशन पाओ। इस तरह पढ़े-लिखे बेरोजगार लोगों, मजदूरों और अनजान लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर पूरे 16 करोड़ 37 लाख 66 हजार 912 रुपये पर डल्ला मारे जाने का आरोप है।
यह मामला 1 अप्रैल 2024 से 16 सितंबर 2026 के बीच के दो साल के दौरान का है। इस दौरान सरकारी फंड, चेक बुक और बैंक खातों का गैरकानूनी इस्तेमाल कर 280 चेक वटाए गए। इस मामले में सीनियर क्लर्क भगवान उद्धवराव डावरे के खिलाफ केस दर्ज किया गया है, और वह फिलहाल फरार बताया जा रहा है। पुलिस अभी उसकी तलाश में है क्योंकि उसका मोबाइल बंद है। सिर्फ सात बैंक खातों की जांच में ही 3 करोड़ 72 लाख रुपये जमा होने का पता चला है, जिसमें 75 लाख, 70 लाख और 56 लाख जैसी बड़ी रकमें भी शामिल हैं। सिर्फ एक हजार रुपये कमिशन के लालच में कई युवा और रिश्तेदार इस जाल में फंस गए।
सवाल यह उठ रहा है कि सरकारी दफ्तर में 25 से 30 हजार रुपये से ज्यादा का चेक वटाने के लिए तीन-चार सीनियर अफसरों के दस्तखत और जांच जरूरी होती है, तो फिर एक क्लर्क बिना ऊपर की मंजूरी के 280 चेक कैसे वटा सका। 2024 से 2026 के इन तीन सालों में मेघना कावली, जिनीत दोनतुला और बी. सरवनन जैसे तीन आईएएस अफसर इस दफ्तर में तैनात रहे। इसी दौरान दो बार ऑडिट भी हुआ, फिर भी इतना बड़ा घोटाला सामने क्यों नहीं आया, यह भी सवाल है। साथ ही सरकारी खाते से प्राइवेट और अनजान लोगों के नाम करोड़ों के चेक वटते वक्त बैंक अफसरों ने भी कोई पूछताछ क्यों नहीं की, इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
असिस्टेंट कलेक्टर बी. सरवनन ने जब यह मामला कलेक्टर राहुल कर्डिले के सामने रखा, तब जाकर इस पूरे मामले का पर्दाफाश हुआ। स्थानीय लोगों और आदिवासी संगठनों का कहना है कि सिर्फ एक क्लर्क पर कार्रवाई करके कहीं इस मामले को दबाया तो नहीं जा रहा।
फिलहाल इकनॉमिक ऑफेंस विंग के पुलिस इंस्पेक्टर उदय खंडेराय और किनवट पुलिस स्टेशन के पुलिस इंस्पेक्टर जगदीश मंडलवार इस केस की गहराई से जांच कर रहे हैं। आगे की जांच में आदिवासी विभाग और बैंक के और कौन-कौन से बड़े अफसर लपेटे में आते हैं, इस पर पूरे जिले की नजर टिकी है।