नागपुर PWD के VIP गेस्ट हाउस पर 93 लाख खर्च का आरोप, विकास ठाकरे ने की जांच की मांग
कांग्रेस विधायक विकास ठाकरे ने आरटीआई के हवाले से शीतकालीन अधिवेशन की निधि के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस विधायक विकास ठाकरे ने आरोप लगाया है कि नागपुर में पीडब्ल्यूडी के विभाग क्रमांक-1 के तहत आने वाले वीआईपी गेस्ट हाउस को अधीक्षक अभियंता के सरकारी आवास की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका कहना है कि इस पर शीतकालीन अधिवेशन के लिए मंजूर निधि से करीब 93 लाख रुपये खर्च किए गए।
ठाकरे ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने पीडब्ल्यूडी मंत्री शिवेंद्र सिंह राजे भोसले से कहा है कि संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई हो।
ठाकरे के मुताबिक उन्होंने यह जानकारी आरटीआई के तहत हासिल की और मंत्री को बताई। इससे पहले भी वे शीतकालीन अधिवेशन की निधि के कथित दुरुपयोग की शिकायत कर चुके थे। उन्होंने बताया कि उस शिकायत पर संज्ञान लेकर कुछ संबंधित अभियंताओं के तबादले किए गए थे।
विधायक ने बताया कि सिविल लाइंस, नागपुर के रविनगर में अधीक्षक अभियंता के सरकारी आवास पर हुए कामों की जानकारी उन्होंने आरटीआई से मांगी थी। जवाब में सामने आया कि रविनगर का बंगला क्रमांक 47/1 असल में वीआईपी गेस्ट हाउस है।
आरटीआई की जानकारी के अनुसार 23 नवंबर और 21 दिसंबर 2023 को तीन वर्क ऑर्डर जारी हुए। इनके तहत इस इमारत पर कुल 92 लाख 86 हजार 124 रुपये खर्च किए गए।
इन कामों में फॉल्स सीलिंग की मरम्मत, स्नान गृह का नवीनीकरण, दरवाजे और खिड़कियां बदलना, सुरक्षा दीवार की ऊंचाई बढ़ाना और छत की मरम्मत शामिल हैं। इसके अलावा पार्किंग के लिए शेड बनाना, संरचनात्मक मजबूतीकरण, प्लिंथ प्रोटेक्शन की वाटरप्रूफिंग और उद्यान में पगडंडी बनाने जैसे काम भी गिनाए गए हैं।
ठाकरे ने खास तौर पर यह बात उठाई कि इन वर्क ऑर्डर में सभी काम शीतकालीन अधिवेशन से जुड़े बताए गए हैं। उन्हें आशंका है कि विभाग के दूसरे अभियंताओं के सरकारी आवासों पर भी अधिवेशन की निधि से बड़े पैमाने पर खर्च हुआ होगा। इसलिए उन्होंने सभी कामों की जांच की मांग की है।
ठाकरे ने यह भी बताया कि दिसंबर 2026 में होने वाले विधान मंडल के अधिवेशन की तैयारियों के लिए पीडब्ल्यूडी ने करीब 100 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है। अधिवेशन की निधि से होने वाले कामों पर नजर रखने के लिए उन्होंने एक स्वतंत्र समिति बनाने की मांग की।
उनके मुताबिक इस समिति में स्थानीय विधायक, जिलाधिकारी कार्यालय का एक प्रतिनिधि, केंद्र सरकार की किसी संस्था का सिविल इंजीनियर और पीडब्ल्यूडी के अभियंता होने चाहिए। ठाकरे ने कहा कि निविदा प्रक्रिया से लेकर काम पूरा होने तक पूरी पारदर्शिता रखी जाए, और समिति यह पक्का करे कि सार्वजनिक निधि सिर्फ जरूरी कामों पर ही खर्च हो।