नागपुर: पट्टे के लिए 10 साल से भटक रहे 68 परिवार, RTI का जवाब न मिलने पर सूचना आयोग नाराज
जरीपटका इलाके की इंदिरानगर बस्ती के 68 परिवार जमीन के पट्टे के लिए संघर्ष कर रहे हैं, राज्य सूचना आयोग की नागपुर खंडपीठ ने अफसरों को तलब किया।
नागपुर जिले के जरीपटका इलाके में बसी इंदिरानगर बस्ती के 68 परिवार पिछले करीब 10 साल से अपनी जमीन का पट्टा यानी मालिकाना हक पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। इन परिवारों ने बार-बार अलग-अलग सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटे, लेकिन किसी भी विभाग से कोई ठोस जवाब नहीं मिला। पिछले 14 महीनों से यह भाग-दौड़ लगातार जारी है।
तंग आकर इन परिवारों ने सूचना के अधिकार यानी RTI के तहत जरूरी कागजात मांगे थे, लेकिन वह जानकारी भी नहीं दी गई। अब यह पूरा मामला राज्य सूचना आयोग की नागपुर खंडपीठ तक पहुंच गया है।
दरअसल मौजा इंदोरा के खसरा नंबर 25/1 में स्लम कोड 410 के तहत यह इंदिरानगर बस्ती बसी हुई है। साल 2014 में BSUP योजना के तहत यहां 366 SRA घरकुल बनाने की योजना मंजूर हुई थी। इंदिरानगर गृह निर्माण सहकारी संस्था की सचिव सोनू खोब्रागडे बताती हैं कि साल 2016 के बाद कागजों में कुछ गड़बड़ियां हो गईं, जिसकी वजह से आज तक 68 परिवारों को उनका पट्टा नहीं मिल पाया है।
सोनू खोब्रागडे ने इंदिरानगर बस्ती का प्रमाणित नक्शा लेने के लिए RTI के तहत आवेदन डाला था, लेकिन उनका आरोप है कि महानगरपालिका के अलग-अलग विभाग इस जिम्मेदारी को एक-दूसरे पर टालते रहे। उनका कहना है कि नक्शे से जुड़ी जानकारी नगर रचना विभाग के पास है, लेकिन उन्हें स्लम विभाग की तरफ भेज दिया गया, और स्लम विभाग ने भी सही और साफ जानकारी नहीं दी।
संस्था का आरोप है कि राज्य सूचना आयोग का समन आने के बावजूद संबंधित अफसर सुनवाई में हाजिर नहीं हुए। पीड़ित परिवारों का कहना है कि पिछले 10 साल से उन्हें उनके हक के पट्टे से वंचित रखा गया है, और अफसरों के मौखिक व लिखित बयानों में भी विरोधाभास पाया गया है। इसलिए लापरवाह अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
अब इस मामले में राज्य सूचना आयोग की नागपुर खंडपीठ में 28 सितंबर को सुनवाई होनी तय है। आयोग ने इस मामले से जुड़े चारों अफसरों का हाजिर होना अनिवार्य कर दिया है। सचिव सोनू खोब्रागडे और पीड़ित परिवारों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर इस सुनवाई में भी उन्हें इंसाफ नहीं मिला, तो वे कड़ा आंदोलन करेंगे।