नागपुर मेट्रो फेज-2: हिंगना स्टेशन पर पहला आई-गर्डर चढ़ाया गया
रीच-3ए के हिंगना माउंट व्यू स्टेशन पर महामेट्रो ने गर्डर चढ़ाने का काम शुरू किया, अगस्त 2027 तक पहला 4 किमी हिस्सा शुरू करने का लक्ष्य।
नागपुर मेट्रो फेज-2 के काम में एक और कदम आगे बढ़ा है। महामेट्रो ने हिंगना माउंट व्यू स्टेशन पर पहला आई-गर्डर चढ़ाने का काम शुरू कर दिया है। यह काम लोकमान्य नगर से हिंगना तक के 6.4 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर पर हो रहा है, जिसे रीच-3ए भी कहा जाता है। इस कॉरिडोर पर कुल सात एलिवेटेड स्टेशन बनेंगे। स्टेशनों का निर्माण काम मार्च 2025 में शुरू हुआ था।
महामेट्रो के अधिकारियों के मुताबिक हर स्टेशन पर आई-गर्डर लगाए जा रहे हैं। हर स्पैन में 15 गर्डर होते हैं, जिनमें नौ कॉनकोर्स लेवल पर और छह प्लेटफॉर्म लेवल पर लगाए जाते हैं। कॉनकोर्स लेवल के गर्डर का वजन 27 से 45 टन के बीच होता है, जबकि प्लेटफॉर्म लेवल के गर्डर 37 से 45 टन तक वजनी होते हैं। हर स्टेशन के लिए कुल 60 आई-गर्डर चाहिए होंगे, जिनमें 36 कॉनकोर्स लेवल पर और 24 प्लेटफॉर्म लेवल पर लगेंगे। तैयार गर्डर को भारी ट्रेलरों के जरिए तय रास्तों से गर्डर चढ़ाने की जगह तक पहुंचाया जाता है।
गर्डर चढ़ाने के लिए भारी क्रेनों का इस्तेमाल हो रहा है। हर स्पैन के बीच वाले तीन कॉनकोर्स लेवल के गर्डर को 80 टन क्षमता वाली दो क्रेनों से लगाया जाएगा। बाकी गर्डर को 500 टन क्षमता वाली एक बड़ी क्रेन से चढ़ाया जाएगा, जिससे भारी स्ट्रक्चर को एलिवेटेड स्टेशनों पर सुरक्षित तरीके से बिठाया जा सके।
महामेट्रो अधिकारियों ने बताया कि गर्डर चढ़ाने, स्लैब बनाने और दोनों लेवल के बाकी स्ट्रक्चरल काम को हर स्टेशन पर करीब 45 दिन में पूरा करने का प्लान है। प्रोजेक्ट का शेड्यूल बनाए रखने के लिए एक साथ कई स्टेशनों पर काम चल रहा है।
कॉनकोर्स लेवल पर यात्रियों के लिए कई सुविधाएं होंगी, जैसे टिकट काउंटर, लिफ्ट, एस्केलेटर, टॉयलेट और बच्चों की देखभाल की सुविधा। यह लेवल एंट्री-एग्जिट और प्लेटफॉर्म के बीच ट्रांसफर पॉइंट का काम भी करेगा। फिलहाल कॉरिडोर के सातों स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट का काम चल रहा है।
प्रोजेक्ट के शेड्यूल के मुताबिक रीच-3ए का पहला 4 किलोमीटर हिस्सा अगस्त 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।