मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:56 IST

नागपुर में MP की बसों का अवैध धंधा, रोज 70 बसें शादी के परमिट पर, RTO-पुलिस खामोश

मध्य प्रदेश से रोज 140 बसों की आवाजाही होती है, जिनमें से 70 बसें शादी-पिकनिक वाले अस्थायी परमिट पर नागपुर आती हैं।

नागपुर में MP की बसों का अवैध धंधा, रोज 70 बसें शादी के परमिट पर, RTO-पुलिस खामोश
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नागपुर के सीताबर्डी में रेलवे स्टेशन के बगल वाले मध्य प्रदेश बस अड्डे से ट्रैवल्स बसों का अवैध कारोबार चल रहा है। कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश से रोजाना 70 बारातें नागपुर जिले में आती हैं। बात सुनने में अजीब लगती है, क्योंकि एक दिन में इतनी बारातें कहीं दिखाई नहीं देतीं, लेकिन हकीकत यही है। मध्य प्रदेश से शहर में हर दिन 140 बसों की आवाजाही होती है।

इन बसों के पास सिर्फ अस्थायी परमिट होता है, जो मध्य प्रदेश परिवहन विभाग एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए जारी करता है। नियम के मुताबिक पैसेंजर की सूची देखकर ही बस आरक्षित की जाती है। लेकिन एमपी से आने वाली ज्यादातर ट्रैवल्स बसों में यात्रियों को अवैध तरीके से लाने और ले जाने का धंधा जोरों पर है।

बिना रोक-टोक के रोजाना 70 बसें नागपुर आती हैं। एमपी परिवहन विभाग इन्हें 87 (1) (ए) के तहत परमिट देता है। यह परमिट सिर्फ शादी-ब्याह के कार्यक्रम, पिकनिक या किसी खास मौके के लिए जारी होता है। इसके तहत बस केवल एक तय जगह से दूसरी तय जगह तक ही जा सकती है, मगर यहां नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

यह धंधा एमपी परिवहन विभाग की मिलीभगत के बिना नहीं चल सकता। साथ ही स्थानीय प्रशासन की चुप्पी भी कई सवाल खड़े करती है। सिटी पुलिस के ट्रैफिक विभाग का इस तरफ ध्यान नहीं है और सीताबर्डी पुलिस का भी नहीं। प्रादेशिक परिवहन विभाग यानी RTO तो हर मामले में कंबल ओढ़कर घी पीने का काम करता है। उसे शहर की अव्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं दिखता।

बारात या किसी खास आयोजन के लिए एक तय जगह से दूसरी तय जगह जाने की इजाजत मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 87(1)(ए) के तहत परिवहन विभाग देता है। यह परमिट सिर्फ कम समय का होता है। आम तौर पर शादियों, पिकनिक, मेलों या धार्मिक आयोजनों जैसे खास मौकों पर यात्री वाहन चलाने के लिए इसका इस्तेमाल होता है, लेकिन सीमित वक्त के लिए।

मध्य प्रदेश मोटर वाहन करावान नियमों के मुताबिक धारा 87 (1)(A) के तहत जारी अस्थायी परमिट वाले यात्री वाहनों पर प्रति सीट के हिसाब से दैनिक या साप्ताहिक टैक्स और आवेदन शुल्क देना होता है। आवेदक को कार्यक्रम की पत्रिका और सभी पैसेंजरों की लिस्ट देनी होती है। वाहन के सामने के हिस्से में कार्यक्रम से जुड़ा बैनर लगाना भी जरूरी है। पर शहर में इस परमिट पर चलने वाली बसों में ऐसा कुछ दिखाई नहीं देता।

नागपुर जिले में इस अवैध कारोबार में ट्रैवल्स बस संचालकों और दलालों की साठगांठ जबरदस्त है। प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी इन बसों को देखकर नजर फेर लेते हैं। 'लक्ष्मी दर्शन' के बाद भला कार्रवाई क्यों होगी। अगर कभी आरोप लग भी जाए, तो नेटवर्क इतना तगड़ा है कि प्रशासन के हरकत में आने से पहले वह सक्रिय हो जाता है। RTO या पुलिस के वाहन पकड़ते ही बस संचालक भोपाल फोन लगा देते हैं, और वहां बैठे दलाल कुछ ही मिनटों में एक परमिट बना देते हैं।

इन बसों को परमिट भले ही मध्य प्रदेश परिवहन विभाग देता है, लेकिन महाराष्ट्र की सीमा में आते ही यातायात और यात्रियों की आवाजाही की जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की हो जाती है। फिर भी कोई इस अवैध कारोबार पर ध्यान नहीं देता, जबकि एमपी बस स्टैंड शहर के बिल्कुल बीच में है।

रेलवे स्टेशन रोड पर वैसे ही ट्रैफिक की समस्या रहती है। ऐसे में अवैध परमिट पर एमपी से आने वाली इन बसों पर नियंत्रण रखना स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है। मगर अपराधियों की गैंग ने यहां थमा-चौकडी मचा रखी है। गाड़ियों में अवैध तरीके से सवारियां भरी जा रही हैं और नियम से ज्यादा किराया वसूला जा रहा है।

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