नागपुर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी, दो रिटायर्ड कर्मचारियों से 1.7 करोड़ लूटे
साइबर ठगों ने खुद को NIA और ATS अधिकारी बताकर सेवानिवृत्त रेलवे गार्ड और नागपुर यूनिवर्सिटी के पूर्व सहायक कुलसचिव को डराकर पैसे ट्रांसफर कराए।
नागपुर में एक बार फिर 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर साइबर ठगी का मामला सामने आया है। इस बार ठगों के निशाने पर दो सेवानिवृत्त कर्मचारी थे, एक रिटायर्ड रेलवे गार्ड और नागपुर यूनिवर्सिटी के पूर्व सहायक कुलसचिव, जिनसे कुल मिलाकर 1.7 करोड़ रुपये की ठगी हो गई।
दोनों ही मामलों में ठगों ने खुद को NIA, ATS और दूसरी जांच एजेंसियों का अफसर बताया और पीड़ितों को किसी गंभीर अपराध में फंसाकर गिरफ्तार करने की धमकी दी। इस दौरान पीड़ितों को लगातार वीडियो कॉल पर रखा गया, यानी हर वक्त निगरानी में रखकर उनसे बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर कराए गए।
साइबर पुलिस ने दोनों मामलों में धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की अलग-अलग धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पहला मामला धरमपेठ का है, जहां 83 साल के एक रिटायर्ड रेलवे गार्ड को ठगों ने दिल्ली बम धमाके से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर 87.50 लाख रुपये ऐंठ लिए। 1 सितंबर को उनके पास वाट्सएप पर वीडियो कॉल आया था, कॉल करने वालों ने खुद को लखनऊ के NIA और ATS अफसर प्रेमकुमार गौतम और राहुल कुमार बताया।
ठगों ने बुजुर्ग से कहा कि उनके नाम पर बने ICICI बैंक के ATM कार्ड से 2.50 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग लेन-देन हुए हैं, जिसमें उन्हें 25 लाख रुपये कमीशन के तौर पर मिले हैं। इसके बाद गिरफ्तारी का डर दिखाकर उन्हें लगातार वाट्सएप वीडियो कॉल पर रखा गया और घर से बाहर निकलने तक नहीं दिया गया। ठगों ने सुप्रीम कोर्ट के नाम से बनाया गया फर्जी प्रॉपर्टी जब्ती आदेश और गिरफ्तारी वारंट भी दिखाया।
डर के मारे बुजुर्ग ने अलग-अलग बैंक खातों से RTGS के जरिए ठगों के बताए खातों में 87.50 लाख रुपये भेज दिए। आरोपियों ने उन्हें यह झांसा दिया था कि जांच पूरी होने तक यह रकम RBI के पास जमा रहेगी। बाद में शक होने पर बुजुर्ग दंपति ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।
दूसरा मामला भी नागपुर जिले का है, जिसमें नागपुर यूनिवर्सिटी के 70 साल के रिटायर्ड सहायक कुलसचिव ठगी का शिकार बने। 19 सितंबर को उनके पास एक अनजान नंबर से वाट्सएप मैसेज और वीडियो कॉल आया। ठगों ने उनसे कहा कि उनके खिलाफ मुंबई में गंभीर आपराधिक केस दर्ज है और उनका संबंध आतंकी गतिविधियों से है।
इसके बाद गिरफ्तारी वारंट जारी होने का डर दिखाकर उन्हें एक कमरे में रहने को कहा गया, और लगातार वीडियो कॉल के जरिए उन पर नजर रखी गई। ठगों ने NIA की जांच में सहयोग न करने पर सख्त सजा की धमकी देकर उन पर मानसिक दबाव बनाया। इसी दौरान आरोपियों ने उनकी बैंक खातों की जानकारी हासिल कर ली और 23 सितंबर को बैंक ऑफ महाराष्ट्र के खाते से 20.10 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। अचानक आरोपियों का संपर्क टूट जाने से उन्हें शक हुआ और उन्होंने पुलिस से शिकायत की।