नागपुर में डीआरएम अफसर बनकर ठग ने रिटायर्ड रेलकर्मी से ऐंठे 32 लाख रुपए
पेंशन सुधार का झांसा देकर व्हाट्सऐप पर फर्जी दस्तावेज भेजे, फिर बैंक डिटेल लेकर खाता खाली किया
नागपुर में एक साइबर ठग ने खुद को डीआरएम कार्यालय का अफसर बताकर मध्य रेलवे से रिटायर हुए एक कर्मचारी को 31.97 लाख रुपए का चूना लगा दिया। ठग ने पेंशन में सुधार करवाने का झांसा दिया और भरोसा जीतने के लिए व्हाट्सऐप पर फर्जी दस्तावेज तक भेज दिए।
पीड़ित का नाम विजय ढाबरे है, उम्र 61 साल। वे करीब एक साल पहले मध्य रेलवे से रिटायर हुए थे। घटना करीब 11 दिन पुरानी है। ढाबरे उस दिन घर पर ही थे कि उनके मोबाइल पर एक फोन आया। कॉल करने वाले शख्स ने अपना नाम धर्मेंद्र प्रधान बताया और कहा कि वह डीआरएम कार्यालय से बोल रहा है।
उसने ढाबरे को यकीन दिलाया कि नियम के मुताबिक उनकी पेंशन में सुधार किया जाएगा। इतना कहकर उसने ढाबरे के नाम से बनाए गए कुछ फर्जी पेंशन दस्तावेज व्हाट्सऐप पर भेज दिए। ये दस्तावेज देखकर ढाबरे को पूरा भरोसा हो गया कि सामने वाला सच में रेलवे का अफसर ही है।
इसी भरोसे का फायदा उठाकर ठग ने आगे का खेल खेला। पेंशन सुधार के लिए आवेदन भरने की बात कहकर उसने ढाबरे से बैंक खाते से जुड़ी जानकारी मांगी। आरोप है कि इसी बातचीत में उसने ढाबरे से एटीएम कार्ड नंबर और सीवीवी जैसी गोपनीय जानकारी भी उगलवा ली।
बैंकिंग की यह गोपनीय जानकारी हाथ लगते ही ठग ने देर नहीं की। कुछ ही देर में ढाबरे के खाते से रकम दूसरे खाते में ट्रांसफर हो गई। कुल मिलाकर उनके खाते से 31.97 लाख रुपए निकल गए।
पूरा मामला सामने आने के बाद ढाबरे ने इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज कराई है। साइबर ठगी की इस वारदात ने एक बार फिर दिखा दिया है कि किस तरह सरकारी दफ्तर के नाम पर फोन कॉल और फर्जी दस्तावेज भेजकर लोगों को झांसे में लिया जा रहा है। रेलवे और बैंक अधिकारियों की तरफ से बार-बार यह अपील की जाती रही है कि कोई भी अफसर फोन पर एटीएम कार्ड नंबर, सीवीवी या ओटीपी जैसी जानकारी नहीं मांगता, लेकिन इसके बावजूद लोग ऐसे झांसों में फंस जाते हैं।