मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:01 IST

नागपुर में अब ट्रेनिंग के बिना नहीं मिलेगा ई-रिक्शा लाइसेंस, RTO का नया नियम लागू

बढ़ते हादसों के बाद महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने ई-रिक्शा चालकों के लिए 10 दिन की ट्रेनिंग अनिवार्य कर दी है, फर्जी सर्टिफिकेट बांटने वाले ड्राइविंग स्कूलों पर भी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

नागपुर में अब ट्रेनिंग के बिना नहीं मिलेगा ई-रिक्शा लाइसेंस, RTO का नया नियम लागू
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नागपुर की सड़कों पर पिछले कई साल से हजारों ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं, यह कहकर कि ये पर्यावरण और जेब दोनों के लिए ठीक हैं। लेकिन इन्हें चलाने वालों के पास ट्रेनिंग है या नहीं, यह सवाल कभी गंभीरता से नहीं पूछा गया। नतीजा यह हुआ कि अनुभवहीन ड्राइवरों की वजह से हादसे बढ़ते चले गए, और अब जाकर महाराष्ट्र परिवहन विभाग हरकत में आया है।

प्रादेशिक परिवहन कार्यालय यानी RTO ने साफ कर दिया है कि अब बिना ट्रेनिंग पूरी किए किसी को ई-रिक्शा की चाबी हाथ में नहीं दी जाएगी। जो नियम शुरुआत से ही होना चाहिए था, वह अब सैकड़ों हादसों के बाद लागू किया जा रहा है।

सह परिवहन आयुक्त संदेश चव्हाण ने जो नई गाइडलाइंस जारी की हैं, उनके मुताबिक ई-रिक्शा चालकों को कमर्शियल लाइसेंस पाने के लिए मान्यता प्राप्त मोटर ड्राइविंग स्कूल से 10 दिन की ट्रेनिंग लेनी होगी। इस ट्रेनिंग में 5 घंटे की प्रैक्टिकल क्लास भी शामिल है। सवाल यह उठता है कि जो सिस्टम सालों तक बिना लाइसेंस और बिना बैज के भागते ई-रिक्शा से आंखें चुराता रहा, क्या वह अब सिर्फ 5 घंटे की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग से सड़कों को सुरक्षित बना पाएगा। फिर भी नियम है तो बैज न होने पर कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है, बशर्ते चेकिंग करने वाला स्टाफ इसके लिए वक्त निकाल पाए।

शहर के ज्यादातर ड्राइविंग स्कूलों के बारे में यह बात जगजाहिर है कि वे बिना गाड़ी के ही सर्टिफिकेट बांटने का धंधा चलाते हैं। इसी को देखते हुए RTO ने चेतावनी दी है कि अगर किसी स्कूल ने 'वाहन' पोर्टल पर गलत जानकारी भरी या फर्जी सर्टिफिकेट बांटा, तो उसके खिलाफ कानूनी तौर पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह होगा कि कागज पर सख्त दिखने वाला यह नियम असल में सड़कों पर कितना असर दिखाता है, या यह भी बाकी सर्कुलरों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।

इसमें कोई शक नहीं कि परिवहन विभाग ने देर से सही, लेकिन ई-रिक्शा चालकों को एक तरह की छूट वाली श्रेणी से निकालकर कमर्शियल ड्राइवर की श्रेणी में शामिल कर दिया है। हालांकि इस गाइडलाइन में अभी भी कई खामियां हैं, फिर भी अगर इस पर गंभीरता से अमल हुआ तो नागपुर के साथ-साथ राज्य के दूसरे शहरों और गांवों की सड़कों पर भी बिना अनुभव के बेधड़क दौड़ाए जा रहे ई-रिक्शा से होने वाले हादसों पर कुछ हद तक लगाम कसी जा सकेगी।

नई गाइडलाइन में ड्राइविंग स्कूलों के लिए भी शर्तें तय की गई हैं। हर ट्रेनिंग सेंटर के पास अपनी खुद की गाड़ी होनी चाहिए, और कम से कम एक ई-रिक्शा भी सेंटर के पास मौजूद होना जरूरी है। इसके अलावा फिटनेस और इंश्योरेंस से जुड़े कागजात पूरे और दुरुस्त रखने होंगे। जांच पूरी होने के बाद ही 10 दिन का 'फॉर्म 5' या '5-बी' दिया जाएगा, जिसकी RTO गहन जांच करेगा।

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