नागपुर मनपा मुख्यालय से चल रहा था 'नौकरी रैकेट' !
कई युवक हुए शिकार, पीड़ित ने छोड़ी थी बैंक की नौकरी, 7 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज
नागपुर.
सिविल लाइंस स्थित मनपा कार्यालय में बैठकर नौकरी लगानेवाले रैकेट ने युवक को शिकार बनाया है. युवक की शिकायत पर शांतिनगर पुलिस ने 7 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है. आरोपियों में विशाल जाधव (35) अमरावती, स्वप्नील सहारे (30) रोशन वानखेड़े (30), दिगांबर शिंदे (25), सचिन राठौड़ (35), अरविंद चौधरी (40) शंकर नगर, धरमपेठ तथा प्रतीक युवराज उराडे (25) विनोबा भावे नगर शामिल है.
सूत्रों के अनुसार इस रैकेट का सूत्रधार विशाल जाधव है. पीड़ित निखिल एक निजी बैंक में कार्यरत था. एक साल पहले गणेश उत्सव के दौरान उसकी महल में अपने एक मित्र के माध्यम से विशाल जाधव से पहचान हुई. विशाल ने उसकी मनपा, मेट्रो और रेलवे में काफी पहुंच होने का बताया. जाधव ने निखिल को कहा कि वह संबंधित सरकारी विभागों में किसी की भी आसानी से नौकरी लगा सकता है. उसने निखिल को भी मनपा में नौकरी लगाकर देने का झांसा दिया. इसके बाद विशाल जाधव ने अन्य आरोपियों से निखिल की पहचान कराई. नौकरी लगाने के नाम पर उससे रुपए मांगे जाने लगी. निखिल नकदी और बैंक के माध्यम से आरोपियों को रुपए देने लगा. आरोपियों ने नवंबर 2025 में निखिल को फर्जी नियुक्ति पत्र दिया और बैंक की नौकरी छोड़ने को कहा. मनपा में नौकरी लगने की लालसा में निखिल ने निजी बैंक की नौकरी छोड़ दी. इसके बाद आरोपियों ने निखिल को सिविल लाइन स्थित मनपा मुख्यालय के पास की प्रशासकीय इमारत क्रमांक 2 में बुलाया. वहां करीब 15 दिनों तक विशाल के साथी निखिल से भेंट करते थे.
विशाल के साथी खुद को मनपा और दूसरे विभागों के अधिकारी बताते थे. वह निखिल से एक रजिस्टर पर हस्ताक्षर लेते थे. उसे अध्ययन करने के लिए जल संपदा विभाग की पुस्तिका दी जाती थी. उस वक्त तक निखिल ने आरोपियों को 12 लाख रुपये का भुगतान किया था. इसी दौरान स्वप्निल सहारे ने निखिल को बताया कि उसे दिया गया नियुक्ति पत्र फर्जी है. स्वप्नील ने निखिल को सरकारी नौकरी लगाकर देने का बताया. स्वप्नील ने नौकरी लगाने के बदले में Rs 7 लाख मांगे. स्वप्निल की बातों से निखिल को धोखाधड़ी का संदेह हुआ. उसने विशाल जाधव और अन्य आरोपियों से संपर्क कर रुपए लौटाने को कहा. विशाल ने फोन पर कोई प्रतिसाद नहीं दिया जबकि अन्य आरोपी भी टालमटोल करने लगे. त्रस्त होकर निखिल ने शांतिनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई. जांच के बाद पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है. आरोपी मनपा मुख्यालय परिसर की प्रशासकीय इमारत से यह रैकेट चला रहे थे. इससे आरोपियों को मनपा के लोगों का भी आश्रय होने का संदेह निर्माण होता है. आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही इसकी सच्चाई का पता चल सकता है. इस रैकेट द्वारा कई लोगों को शिकार बनाए जाने का पता चला है.