मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:20 IST

नागपुर मनपा में 6,643 पद खाली, कामकाज पर पड़ रहा असर

आरटीआई से खुलासा, प्रशासन से लेकर सफाई विभाग तक स्टाफ की भारी कमी

नागपुर मनपा में 6,643 पद खाली, कामकाज पर पड़ रहा असर
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

नागपुर मनपा में इस वक्त स्टाफ की जबरदस्त कमी है। हालत यह है कि मनपा के मंजूर नियमित पदों में से 71.26 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं, और इसका सीधा असर नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं और रोजमर्रा के कामकाज पर दिख रहा है।

सामाजिक कार्यकर्ता संजय थुल ने आरटीआई के तहत जो जानकारी निकाली है, उसके मुताबिक क्लास 1 से क्लास 4 तक कुल 9,321 पद मंजूर हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 2,678 कर्मचारी ही काम पर हैं। यानी 6,643 पद अब भी खाली हैं।

यह आंकड़े मनपा के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट के पब्लिक इंफॉर्मेशन ऑफिसर और अधिकारियों ने दिए हैं, और ये 1 सितंबर 2026 की स्थिति दिखाते हैं। यह तुलना 10 मई 2023 को मंजूर हुए मनपा के आकृतिबंध यानी स्टाफिंग पैटर्न से की गई है।

यह कमी सिर्फ एक लेवल पर नहीं, बल्कि लगभग पूरे प्रशासनिक ढांचे में दिखती है। सवाल यह उठ रहा है कि तेजी से बढ़ते शहर की जिम्मेदारी संभालने वाली मनपा इतने कम स्टाफ में सेवाएं कैसे दे पाएगी।

सबसे ज्यादा दिक्कत सीनियर और सुपरवाइजरी लेवल पर है। क्लास 1 के 309 मंजूर पदों में से 194 यानी 62.78 प्रतिशत पद खाली हैं। पॉलिसी बनाने, सुपरविजन और प्रशासन के लिए सिर्फ 115 अफसर बचे हैं।

क्लास 2 की हालत और भी खराब है। यहां 229 पदों में से 177 पद यानी 77.29 प्रतिशत खाली हैं। इस कैडर में सिर्फ 52 लोग काम कर रहे हैं, जिनमें 10 स्कूल टीचर भी शामिल हैं जिन्हें यहां भेजा गया है।

क्लास 3 कैडर, जो मनपा के प्रशासनिक, क्लेरिकल, फील्ड और टेक्निकल काम की रीढ़ माना जाता है, उसमें 6,534 मंजूर पदों में से 4,560 पद खाली हैं यानी 69.78 प्रतिशत। यहां सिर्फ 1,974 कर्मचारी काम कर रहे हैं, जिनमें 310 टीचर शामिल हैं।

क्लास 4 कैडर भी उतना ही खाली पड़ा है। 2,249 मंजूर पदों में से 1,712 पद खाली हैं, सिर्फ 537 कर्मचारी बचे हैं, यानी वेकेंसी रेट 76.12 प्रतिशत है।

सीनियर और मिड-लेवल अफसरों की कमी की वजह से अब एक-एक अफसर को कई जिम्मेदारियां एक साथ संभालनी पड़ रही हैं। एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और असिस्टेंट कमिश्नर स्तर के अफसरों को तीन-चार अलग-अलग विभागों का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है, जिससे किसी भी एक विभाग पर ठीक से ध्यान देना मुश्किल हो गया है।

इसका असर रोजमर्रा के कामकाज में साफ दिखता है। टाउन प्लानिंग की परमिशन, प्रॉपर्टी टैक्स में सुधार और डेवलपमेंट से जुड़ी फाइलें लटकी रहती हैं, और ज्यादा काम के बोझ से जांच-पड़ताल और जवाबदेही पर भी असर पड़ने की आशंका है।

आम लोगों के लिए भी मनपा हेडक्वार्टर और जोनल ऑफिस के चक्कर लगाना अब और परेशानी भरा हो गया है। अफसर अक्सर फील्ड मीटिंग में होते हैं या दूसरे विभाग का काम संभाल रहे होते हैं, जिससे लोगों को छोटे-छोटे काम के लिए भी बार-बार दफ्तर आना पड़ता है।

यह मामला सिर्फ कागज पर खाली पड़े पदों तक सीमित नहीं है। इतनी बड़ी संख्या में स्टाफ की कमी सीधे मनपा की उस क्षमता पर असर डालती है जिससे वह लोगों की अर्जियां निपटाती है, प्रोजेक्ट्स की निगरानी करती है, शिकायतों का जवाब देती है और सुविधाएं मुहैया कराती है।

दिक्कत सिर्फ प्रशासनिक स्टाफ तक ही नहीं है। सफाई का काम देखने वाले वर्कर, जो सड़कों की सफाई, कचरा उठाने और फील्ड लेवल के दूसरे काम संभालते हैं, उनमें भी कमी है। सफाई कर्मचारियों के 8,660 मंजूर पदों में से 2,162 पद खाली हैं, यानी 24.96 प्रतिशत की कमी।

नागपुर शहर लगातार आसपास के इलाकों में फैल रहा है, जिससे कचरा उठाने, सफाई करने, नाली साफ करने और गाद निकालने जैसे काम की जरूरत बढ़ती जा रही है, ऐसे में यह कमी और गंभीर हो जाती है।

प्रशासनिक स्टाफ और सफाई कर्मचारियों को मिलाकर देखें तो मनपा में कुल 8,805 पद खाली हैं, यानी कुल मिलाकर 49.02 प्रतिशत की कमी।

आरटीआई से मिले आंकड़े एक बड़ा विरोधाभास सामने लाते हैं, शहर बढ़ने के साथ मनपा की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन इन्हें निभाने के लिए जरूरी स्टाफ का बड़ा हिस्सा गायब है।

मनपा के सामने अब सिर्फ कागजों पर पद भरने की चुनौती नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि जरूरी विभागों में पर्याप्त और सक्षम स्टाफ हो, ताकि काम का बोझ कम हो, फाइलें न लटकें और लोगों को समय पर सुविधाएं मिल सकें।

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