नागपुर: DRM दफ्तर का अधिकारी बताकर रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी से 32 लाख की ठगी
पेंशन में सुधार का झांसा देकर साइबर ठग ने बैंक डिटेल हासिल की और खाते से रकम उड़ा ली
नागपुर में एक रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी को पेंशन बढ़ाने के नाम पर साइबर ठग ने 31 लाख 97 हजार रुपये का चूना लगा दिया। ठग ने खुद को DRM दफ्तर का अधिकारी बताकर कर्मचारी का भरोसा जीता और फिर बैंक की गोपनीय जानकारी लेकर पूरी रकम खाते से पार कर दी।
मिली जानकारी के मुताबिक, पीड़ित का नाम विजय ढाबरे है, उम्र 61 साल। ढाबरे करीब साल भर पहले मध्य रेलवे से रिटायर हुए थे। 8 सितंबर को वे घर पर थे, तभी उनके मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को धर्मेंद्र यादव बताया और कहा कि वह DRM दफ्तर से बोल रहा है। उसने ढाबरे से कहा कि नियम के मुताबिक उनकी पेंशन में सुधार किया जाना है।
भरोसा दिलाने के लिए ठग ने ढाबरे के नाम से बनाए गए फर्जी पेंशन डॉक्यूमेंट व्हाट्सऐप पर भेज दिए। इससे ढाबरे को यकीन हो गया कि कॉल करने वाला सच में रेलवे का अधिकारी है। इसी भरोसे के चलते वे आगे की बातचीत में शामिल होते चले गए।
पेंशन सुधार का फॉर्म भरवाने के बहाने ठग ने ढाबरे से बैंक अकाउंट की डिटेल, एटीएम कार्ड नंबर और सीवीवी नंबर तक ले लिया। जैसे ही यह गोपनीय जानकारी ठग के हाथ लगी, उसने ढाबरे के खाते से 31 लाख 97 हजार रुपये अपने आप ट्रांसफर कर लिए। कुछ देर बाद जब मोबाइल पर पैसे कटने के मैसेज आने लगे, तब जाकर ढाबरे को अपने साथ हुई ठगी का पता चला।
ठगी का एहसास होते ही ढाबरे ने तुरंत साइबर पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ आर्थिक धोखाधड़ी का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के मुताबिक रिटायर्ड कर्मचारियों और बुजुर्गों को निशाना बनाने के लिए साइबर ठग पेंशन सुधार, बकाया पेंशन, महंगाई भत्ता या दूसरी सरकारी सुविधाओं के नाम पर फोन करते हैं। सरकारी अधिकारी होने का भरोसा दिलाने के लिए फर्जी पहचान बताने के साथ-साथ दफ्तरी कागजात जैसे दिखने वाले नकली दस्तावेज भी व्हाट्सऐप पर भेजे जाते हैं। ऐसी कॉल आने पर बैंक से जुड़ी कोई भी गोपनीय जानकारी किसी को न दें और संबंधित विभाग के आधिकारिक दफ्तर से सीधे संपर्क कर कॉल करने वाले की पहचान की तस्दीक जरूर करें।