मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:52 IST

नागझिरा के पास ट्रेन की टक्कर से मादा भालू की मौत, रेलवे ट्रैक बना वन्यजीवों के लिए खतरा

गोंदिया-बल्लारशाह रेलमार्ग पर तळोधी वन परिक्षेत्र में हादसा, पोस्टमार्टम में पसलियां टूटी मिलीं

नागझिरा के पास ट्रेन की टक्कर से मादा भालू की मौत, रेलवे ट्रैक बना वन्यजीवों के लिए खतरा
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

गोंदिया-बल्लारशाह रेलमार्ग पर एक अज्ञात ट्रेन की चपेट में आने से छह से आठ साल की एक वयस्क मादा भालू की मौत हो गई। यह हादसा शनिवार सुबह तळोधी वन परिक्षेत्र के आलेवही बीट में, कक्ष क्रमांक 94 के इलाके में हुआ।

रेलवे लाइन के किनारे काम कर रहे मजदूरों की नजर सुबह-सुबह भालू के शव पर पड़ी। उन्होंने फौरन इसकी खबर वन विभाग को दी, और सूचना मिलते ही विभाग के अधिकारी और स्टाफ मौके पर पहुंच गए।

ब्रह्मपुरी वन विभाग की उपवनसंरक्षक डॉ. कुमारस्वामी के मार्गदर्शन में सहायक उपवनसंरक्षक डॉ. महेश गायकवाड़, तळोधी वन परिक्षेत्र अधिकारी तेजस बालासाहेब सूर्यवंशी और बायोलॉजिस्ट राकेश आहुजा की निगरानी में क्षेत्र सहायक अरविंद मने और वनरक्षक सौ. बांगर ने घटनास्थल का पंचनामा किया। इस दौरान वन्यजीव विशेषज्ञ और स्वाब संस्था के अध्यक्ष यश कायरकर तथा बचाव दल प्रमुख जीवेश सयाम भी वहां मौजूद थे।

पंचनामे के बाद भालू के शव को पोस्टमार्टम के लिए सावरगांव स्थित वन आगार ले जाया गया। नागभीड़ के सहायक आयुक्त पशुसंवर्धन डॉ. सतीश तांबे, तळोधी की पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. ईशा आकरे और टीटीसी चंद्रपुर के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. कुंदन पोचलवार ने मिलकर शव का पोस्टमार्टम किया।

पोस्टमार्टम में भालू की कई पसलियां टूटी हुई मिलीं और शरीर के अंदरूनी हिस्सों में भी गंभीर चोटें पाई गईं। इन चोटों को देखकर पुष्टि हुई कि भालू की मौत ट्रेन की जोरदार टक्कर से हुई। पोस्टमार्टम के बाद नियम के मुताबिक सावरगांव वन आगार परिसर में ही भालू का अंतिम निस्तारण कर दिया गया।

गोंदिया-बल्लारशाह रेलमार्ग नागझिरा, ताडोबा-अंधारी व्याघ्र परियोजना और ब्रह्मपुरी वन विभाग के जंगलों के बीच से गुजरता है, इसलिए इस ट्रैक पर वन्यजीवों की सुरक्षा का सवाल लगातार बना हुआ है। स्थानीय वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पहले भी इसी रेलमार्ग पर सांभर, चीतल, नीलगाय, गौर, भालू, बाघ और तेंदुए जैसे कई वन्यजीव ट्रेन की चपेट में आकर जान गंवा चुके हैं। वन्यजीव प्रेमी वक्त-वक्त पर मांग करते रहे हैं कि जानवरों को ट्रैक तक पहुंचने से रोकने और उनके आवागमन वाले इलाकों में हादसे टालने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, लेकिन अब तक इस समस्या का पक्का हल नहीं निकला है।

स्वाब संस्था के अध्यक्ष यश कायरकर ने कहा कि जंगल से गुजरने वाले रेलमार्ग पर वन्यजीवों की मौत रोकने के लिए तुरंत असरदार कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि ट्रैक के संवेदनशील हिस्सों में सुरक्षा बाड़ लगाई जाए और जहां जानवरों की आवाजाही ज्यादा है, वहां खास निगरानी और जरूरी तकनीकी इंतजाम किए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वन्यजीवों की मौतों का यह सिलसिला यूं ही चलता रहा और सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो स्वाब संस्था आंदोलन करेगी।

इस हादसे ने एक बार फिर जंगलों से गुजरने वाले रेलमार्गों पर वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए असरदार और टिकाऊ इंतजाम की जरूरत को सामने ला दिया है।

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