मीरा-भाईंदर महापालिका ने दुष्काल पीड़ितों के लिए एक करोड़ रुपये की मदद घोषित की
विधायक नरेंद्र मेहता के जन्मदिन समारोह पर उठे सवालों के कुछ दिन बाद महापालिका ने मुख्यमंत्री सहायता निधि में एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की।
राज्य के कई हिस्सों में सूखे के हालात हैं और किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। इसी बीच मीरा-भाईंदर में भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता के जन्मदिन पर हुए भव्य समारोह को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर आलोचना हुई। अब मीरा-भाईंदर महापालिका ने सूखा पीड़ित किसानों के लिए मुख्यमंत्री सहायता निधि से एक करोड़ रुपये की मदद देने का ऐलान किया है। जन्मदिन के कार्यक्रम पर हुई आलोचना के चंद दिनों बाद ही महापालिका की तिजोरी से मदद की घोषणा होने से इस फैसले की टाइमिंग को लेकर लोगों में चर्चा शुरू हो गई है।
नरेंद्र मेहता का जन्मदिन शुक्रवार को मीरा रोड पर सेवन इलेवन स्कूल के परिसर में बड़े धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम के लिए बड़ा मंडप लगाया गया था। विधायक को बधाई देने आए कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और मेहमानों के खाने का इंतज़ाम भी किया गया था। शहर में चर्चा थी कि सजावट, आयोजन और बाकी इंतज़ाम पर बड़ा खर्च हुआ। इसी दौरान राज्य के सूखा पीड़ित किसानों की हालत का हवाला देते हुए अलग-अलग स्तरों से इस खर्च पर सवाल उठाए गए।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) पार्टी की नेता सुषमा अंधारे ने भी जन्मदिन समारोह को लेकर भाजपा की आलोचना की थी। सूखे के माहौल में इतना भव्य समारोह आयोजित करने पर उन्होंने सवाल उठाया। इसके बाद सोमवार को सत्तारूढ़ भाजपा की महापौर डिंपल मेहता ने सूखा पीड़ितों की मदद के लिए विशेष सर्वदलीय बैठक बुलाई। बैठक में मुख्यमंत्री सहायता निधि में एक करोड़ रुपये देने का फैसला घोषित किया गया। फिर पत्रकार परिषद में महापौर ने इस मदद की जानकारी दी।
सोमवार दोपहर रामभाऊ म्हालगी में भाजपा नगरसेवकों के लिए प्रशिक्षण शिविर रखा गया था। शिविर से पहले वक्त निकालकर सूखा पीड़ितों की मदद पर विशेष बैठक हुई। इसलिए राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहा है कि क्या यह फैसला जन्मदिन कार्यक्रम की आलोचना के बाद ही लिया गया।
जब मदद के फैसले को जन्मदिन कार्यक्रम से जोड़कर चर्चा होने लगी, तो महापौर डिंपल मेहता ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सूखा पीड़ितों की मदद की अपील की थी, उसके बाद महापालिका ने मदद करने का फैसला किया। सत्तारूढ़ भाजपा की ओर से बताया गया कि यह फैसला सिर्फ जन्मदिन पर हुई आलोचना के जवाब में नहीं लिया गया।
एक करोड़ रुपये की मदद घोषित हो गई है, लेकिन असली रकम तुरंत नहीं दी जाएगी। महापालिका की महासभा में आर्थिक और प्रशासकीय मंज़ूरी मिलने के बाद ही मदद की आखिरी प्रक्रिया पूरी होगी। यानी अभी यह सिर्फ घोषणा है और रकम ट्रांसफर करने के लिए ज़रूरी प्रशासकीय प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसलिए यह सवाल भी उठ रहा है कि घोषणा तो हो गई, असली पैसे कब जाएंगे। सूखा पीड़ित किसानों को फौरन मदद की ज़रूरत है, ऐसे में लोगों की नज़र इस पर है कि मंज़ूरी और रकम बांटने की प्रक्रिया कितनी तेज़ी से पूरी होती है।
लोग एक और सवाल भी पूछ रहे हैं। जब विधायक के जन्मदिन समारोह पर बड़े खर्च की चर्चा है, तो अगर सूखा पीड़ितों की मदद करनी ही थी, तो वह मदद जन्मदिन कार्यक्रम के खर्च से या संबंधित जनप्रतिनिधियों के निजी फंड से क्यों नहीं की गई। महापालिका का फंड नागरिकों के टैक्स से जमा होता है। इसलिए मदद के फैसले का स्वागत होने के बावजूद नागरिक मांग कर रहे हैं कि यह मदद किस फंड से और किस प्रक्रिया से दी जाएगी, और असली लाभार्थियों तक कब पहुंचेगी, इसमें पारदर्शिता रखी जाए।
जन्मदिन के भव्य आयोजन से शुरू हुए विवाद, उस पर हुई राजनीतिक आलोचना और फिर महापालिका की एक करोड़ की घोषणा से शहर का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। सत्तारूढ़ भाजपा का कहना है कि फैसला मुख्यमंत्री की अपील के बाद लिया गया, फिर भी फैसले की टाइमिंग और उसके पीछे की राजनीतिक पृष्ठभूमि पर चर्चा जारी है। अब देखना यह है कि महासभा की मंज़ूरी कब मिलती है, रकम असल में कब बंटती है और सूखा पीड़ित किसानों को इसका फायदा किस तरह दिया जाता है।