मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:46 IST

मालाड के डे केयर के फ्रीजर में चार साल से रखी थी लाश, पार्सल से खुला राज

मुंबई के मालाड में कोंकणीपाड़ा के एक डे केयर सेंटर से पुलिस को 67 साल के बुजुर्ग का शव मिला। बुधवार को परिवार की मौजूदगी में उसका अंतिम संस्कार हुआ।

मालाड के डे केयर के फ्रीजर में चार साल से रखी थी लाश, पार्सल से खुला राज
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

मुंबई के मालाड में पुलिस ने एक डे केयर सेंटर से ऐसी लाश बरामद की है, जो वहां पिछले चार साल से छिपाकर रखी हुई थी। बुधवार को परिवार के लोगों की मौजूदगी में इस शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। अब सवाल यह है कि मामला आखिर क्या था, शव वहां कैसे पहुंचा और चार साल तक उसे किसने रखा।

सारी बात एक पार्सल से शुरू हुई। सोमवार को कुरार पुलिस स्टेशन में एक पार्सल डिलिवर हुआ। स्टेशन में रोज ऐसे कई पार्सल आते हैं, इसलिए इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया और अनजान पार्सल को पहले तो लेने से ही मना कर दिया गया। इसके बाद जिस आदमी को रैपिडो से पार्सल का पता मिला था, वह उसे मालाड के कोंकणीपाड़ा में एक पालनाघर (डे केयर) ले गया। वहां उसने पार्सल उस शख्स को दिखाया, जिसके नाम से उस पर पता लिखा था। डे केयर कई महीनों से बंद पड़ा था, इसलिए उस शख्स ने कुरार पुलिस को खबर दी।

पुलिस मौके पर पहुंची और पार्सल खोलकर उसके अंदर की जानकारी पढ़ी, तो पुलिस वाले सन्न रह गए। वरिष्ठ अधिकारियों को बताया गया और शाम तक पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंच गई।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पार्सल में डे केयर में रखी एक डेड बॉडी की जानकारी दी गई थी। इसी वजह से पुलिस ने सबसे पहले सेंटर के मालिक को कॉल किया। मालिक की मौत हो चुकी है, इसलिए मौजूदा संचालक डॉ. अहमद सैयद आए। उनकी मदद से सेंटर का ताला खुलवाया गया और क्लिनिक के अंदर रखा डीप फ्रीजर खोला गया। अंदर बहुत दुर्गंध फैली हुई थी और एक फ्रीजर में 67 साल के एक बुजुर्ग की लाश मिली।

डॉ. सैयद से पूछताछ के बाद शव के परिवार वालों को बुलाकर उनसे भी पूछताछ की गई। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि वर्सोवा में रहने वाले ये बुजुर्ग कैंसर और किडनी फेल होने से पीड़ित थे। जून 2022 में उनका निधन हुआ। कुछ दिन शव घर पर ही रखा गया, लेकिन सोसायटी के लोगों ने ऐतराज किया। इसके बाद बच्चों ने शव को मालाड के कोंकणीपाड़ा के डे केयर सेंटर में रखने का फैसला किया और इसके लिए डॉ. सैयद से संपर्क किया गया।

बताया जा रहा है कि पिता का शव सुरक्षित रखने के लिए डॉ. सैयद को हर महीने 1,30,000 रुपये दिए जाते थे। इस हिसाब से बीते चार साल में बच्चों ने पिता के शव को संभालकर रखने पर अब तक 50 लाख रुपये से ज्यादा खर्च कर दिए।

शव क्यों रखा गया, इसकी वजह भी सामने आई है। बुजुर्ग की दो बेटियां और एक बेटा है। अमेरिका में रहने वाली बेटी को एक वैज्ञानिक ने बताया कि मरे हुए इंसान को दोबारा जिंदा किया जा सकता है, बस उसके शरीर को सुरक्षित रखना होगा। विज्ञान की भाषा में इसे क्रायोनिक्स कहते हैं। अमेरिका में दुनिया के 550 लोगों के शव क्रायोनिक्स तरीके से रखे गए हैं। बेटी का पिता से भावनात्मक रिश्ता था, इसलिए उसने भारत में रहने वाली अपनी बहन और भाई से बात की और शव को फ्रीजर में रखवा दिया।

जानकारी के मुताबिक मंगलवार रात करीब 3 बजे सुरक्षा इंतजाम के साथ शव को फ्रीजर से निकालकर भायखला के मॉर्चरी सेंटर भेजा गया। वहां बुधवार को परिवार की मौजूदगी में अंतिम संस्कार हुआ। अमेरिका में रहने वाली बेटी ने वीडियो कॉल पर अंतिम संस्कार देखा।

इस बीच चार साल तक शव रखे रहने से इलाके में अब बदबू फैल गई है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस जगह को शवागार घोषित किया जाए। उनका कहना है कि रात में यहां से गुजरते वक्त उनके मन में डर बैठ जाता है।

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