महाराष्ट्र में अब हर दस्त रजिस्ट्रेशन के लिए आधार जरूरी, 1 अक्टूबर से लागू
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने दस्तावेज़ रजिस्ट्रेशन में आधार कार्ड अनिवार्य किया है। 63 तरह के रजिस्ट्रेशन पर यह नियम 1 अक्टूबर से लागू है।
महाराष्ट्र सरकार ने दस्तावेज़ रजिस्ट्रेशन को लेकर एक अहम फैसला लिया है। अब दस्तावेज़ रजिस्ट्रेशन के लिए आधार कार्ड जरूरी कर दिया गया है। आधार कार्ड नहीं होगा तो कोई भी दस्तावेज़ रजिस्टर नहीं किया जाएगा। यह फैसला राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे ने लिया है।
बावनकुळे ने साफ किया कि यह फैसला प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री में होने वाली धोखाधड़ी रोकने के लिए लिया गया है। सरकार का कहना है कि इससे झूठे गवाह और झूठे पक्षकार खड़े करके की जाने वाली धोखाधड़ी पर रोक लग सकेगी।
यह नियम सिर्फ खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है। खरीद, बिक्री, बक्षीस, गिरवी और बंटवारे समेत कुल 63 तरह के रजिस्ट्रेशन के लिए आधार पहचान पत्र की सख्ती की गई है। राजस्व विभाग के इस फैसले पर आज यानी 1 अक्टूबर से अमल शुरू हो रहा है। इसके लिए सरकार का राजपत्र भी जारी कर दिया गया है।
इसी बीच बावनकुळे ने पालघर में सूर्या प्रोजेक्ट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वहां घरों और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। इस प्रक्रिया में हनुमान नगर और कुछ दूसरे गांव शामिल हैं। उनके मुताबिक इन गांवों का पुनर्वास 1979 में हुआ था, लेकिन जमीन का रिकॉर्ड न होने से सवाल उठ रहा है कि पुनर्वास में पैसे किसे दिए जाएं।
बावनकुळे ने बताया कि 1970 के संशोधन के बाद प्रॉपर्टी कार्ड बनाकर दिया जाएगा। उसके आधार पर सातबारा बनेगा। सातबारा और प्रॉपर्टी कार्ड हो जाने के बाद भूमि अधिग्रहण का लाभ दिया जाएगा और फिर लोगों को उनके भूखंड मिलेंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट 1970 से अटका हुआ था, लेकिन कल की कैबिनेट बैठक में सूर्या प्रोजेक्ट पर फैसला हो गया।
नागपुर जिले को लेकर भी एक फैसला हुआ है। वहां जिन लोगों को घर चाहिए थे लेकिन जगह नहीं थी, उनके लिए एक प्रोजेक्ट के बगल में जमीन थी। उस जमीन के लिए केंद्रीय मंत्री गडकरी ने स्मार्ट विलेज की परिकल्पना रखी थी। इसके बाद कैबिनेट में फैसला हुआ कि वह जमीन मुफ्त दी जाएगी। बेघर लोगों, फासेपारधी समाज के लोगों और जिनके पास घर नहीं हैं, उनके लिए इस जमीन पर घर उपलब्ध कराए जाएंगे।