महंगाई रोकने अमेरिकी फेड ने ब्याज दरों में फिर की बढ़ोतरी, भारत पर भी असर की आशंका
अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने ब्याज दर 0.25 फीसदी बढ़ाई, अब यह 3.75 से 4 फीसदी के बीच पहुंच गई है। महंगाई अभी भी काबू में नहीं आने से फेड ने सख्त रुख अपनाया है।
अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने एक बार फिर ब्याज दर बढ़ा दी है। इस बार 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की गई, जिसके बाद अमेरिका में ब्याज दर अब 3.75 से 4 फीसदी के दायरे में आ गई है। महंगाई अभी भी उतनी कम नहीं हुई जितनी उम्मीद थी, इसलिए फेड ने फिर से सख्त आर्थिक नीति का रास्ता चुना है।
अमेरिका में महंगाई को काबू में लाना फेड के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। महंगाई की दर अभी भी फेड के 2 फीसदी के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। इसी वजह से कर्ज महंगा करके बाजार में पैसे का फ्लो कुछ हद तक कम करने की कोशिश की जा रही है।
ब्याज दर बढ़ने का सीधा असर होम लोन, गाड़ी के लोन और बाकी कर्जों पर पड़ सकता है। यानी अब कर्ज लेना पहले से महंगा हो जाएगा। दूसरी तरफ, इसका असर बचत और डिपॉजिट पर मिलने वाले रिटर्न पर भी हो सकता है, यानी सेविंग करने वालों को इसका कुछ फायदा भी मिल सकता है।
फेड के अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, इसी साल एक और ब्याज दर बढ़ोतरी हो सकती है। यानी 2026 में अमेरिका में ब्याज दरें आने वाले समय तक अपेक्षाकृत ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।
महंगाई को काबू में लाने के लिए भले ही दरें बढ़ाई जा रही हों, लेकिन इसका असर आर्थिक ग्रोथ पर भी पड़ सकता है। ऐसे में फेड के सामने महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है।
अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने का असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहता। इसका असर ग्लोबल मार्केट में डॉलर की चाल, विदेशी निवेश, सोना और शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है।
अमेरिकी बॉन्ड्स पर रिटर्न आकर्षक होने से कुछ निवेशक अपना पैसा अमेरिकी बाजार की तरफ शिफ्ट कर सकते हैं। इसका असर उभरते हुए देशों के बाजारों पर पड़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से भारत में भी इस फैसले का रुपये, शेयर बाजार और सोने की कीमतों पर क्या असर पड़ता है, इस पर निवेशकों की नजर टिकी हुई है।