मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:25 IST

मध्य रेल्वे ने भंगार बेचकर कमाए 323.50 करोड़ रुपये, देश में पहले नंबर पर

मध्य रेल्वे ने 'ज़ीरो स्क्रैप मिशन' के तहत अप्रैल से सितंबर के बीच 323.50 करोड़ रुपये का भंगार बेचा। नागपुर डिवीजन का हिस्सा 46.08 करोड़ रुपये रहा।

मध्य रेल्वे ने भंगार बेचकर कमाए 323.50 करोड़ रुपये, देश में पहले नंबर पर
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

मध्य रेल्वे ने 'ज़ीरो स्क्रैप मिशन' के तहत भंगार निपटाने में बड़ा काम किया है और भारतीय रेल्वे के सभी विभागों में पहला स्थान हासिल किया है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर, इन छह महीनों में मध्य रेल्वे ने 323.50 करोड़ रुपये के भंगार की बिक्री दर्ज की।

इस कामयाबी में नागपुर डिवीजन ने भी 46.08 करोड़ रुपये का योगदान दिया। भंगार बेचने के साथ-साथ मध्य रेल्वे ने रेल्वे की जगह का अच्छा इस्तेमाल, साफ-सफाई और गैरज़रूरी सामान के निपटारे पर भी ज़ोर दिया है।

सितंबर 2026 मध्य रेल्वे के लिए खास रहा। इस एक महीने में 70.42 करोड़ रुपये का भंगार बेचा गया, जो मध्य रेल्वे का एक महीने में अब तक का सबसे ज़्यादा बिक्री का रिकॉर्ड है। 'स्वच्छता ही सेवा पखवाड़ा' के दौरान स्टोर्स विभाग ने खास मुहिम चलाई।

इस मुहिम में 4,884 मेट्रिक टन भंगार का निपटारा किया गया और उससे 44.24 करोड़ रुपये की आमदनी हुई। इससे रेल्वे में अलग-अलग जगह पड़े बेकार सामान की समस्या काफी हद तक सुलझ गई।

अब डिवीजनों के हिस्से देखें। मध्य रेल्वे की कुल 323.50 करोड़ रुपये की भंगार बिक्री में भुसावल डिवीजन ने 57.27 करोड़ रुपये के साथ सबसे ज़्यादा योगदान दिया। उसके बाद मुंबई डिवीजन ने 52.08 करोड़ रुपये, पुणे डिवीजन ने 47.55 करोड़ रुपये और नागपुर डिवीजन ने 46.08 करोड़ रुपये दिए। सोलापुर डिवीजन का हिस्सा 14.69 करोड़ रुपये रहा। इस तरह नागपुर डिवीजन ने भी इस रिकॉर्ड कामयाबी में अपनी मज़बूत भूमिका निभाई।

यह मुहिम सिर्फ भंगार की बिक्री तक सीमित नहीं रही। मध्य रेल्वे ने 1.11 करोड़ रुपये के 46.85 मेट्रिक टन बेकार ई-कचरे का भी कामयाबी से निपटारा किया। छह महीनों में 29,993 मेट्रिक टन रेल की पटरियां और उनसे जुड़ा सामान, 23 लोकोमोटिव, 62 डिब्बे और 70 वैगन भी निपटाए गए।

इस प्रक्रिया से यार्ड, वर्कशॉप और रेल लाइन के किनारे की कीमती ज़मीन खाली हुई। इसलिए 'ज़ीरो स्क्रैप मिशन' से रेल्वे को कमाई तो हुई ही, साथ में साफ-सफाई, जगह के सही इस्तेमाल और पर्यावरण के अनुकूल इंतज़ाम को भी बढ़ावा मिला है।

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