किसानों को तरजीह: APMC मार्केट सेस के खिलाफ 2 अक्टूबर का असहयोग आंदोलन फिलहाल टला
महाराष्ट्र राज्य व्यापारी कृति समिति ने सूखे और त्योहारों को देखते हुए आंदोलन स्थगित किया, सेस खत्म करने की मांग कायम।
महाराष्ट्र राज्य व्यापारी कृति समिति ने सर्वसम्मति से फैसला किया है कि APMC मार्केट सेस के खिलाफ राज्यभर में 2 अक्टूबर 2026 से होने वाला प्रस्तावित असहयोग आंदोलन फिलहाल रोका जाएगा। समिति ने किसानों के हित, पूरे महाराष्ट्र में सूखे के गंभीर हालात और आने वाले त्योहारों को इसकी वजह बताया है।
समिति में चैंबर ऑफ एसोसिएशंस ऑफ महाराष्ट्र इंडस्ट्री एंड ट्रेड (CAMIT), द महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MACCIA), फेडरेशन ऑफ एसोसिएशंस ऑफ महाराष्ट्र (FAM), ग्रेन राइस एंड ऑयल मर्चेंट्स एसोसिएशन (GROMA) और पुणे मर्चेंट्स चैंबर (PMC) जैसे बड़े व्यापारी संगठन शामिल हैं। इन्होंने 30 सितंबर 2026 को रात 9:30 बजे ऑनलाइन समीक्षा बैठक की। बैठक में महाराष्ट्र की 305 APMC मार्केट यार्ड से जुड़े संगठनों के व्यापारी नेता, पदाधिकारी और प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए।
राज्य के अलग-अलग इलाकों से आए प्रतिनिधियों ने अपनी बात और चिंताएं विस्तार से रखीं। मार्केट यार्ड में काम करने वाले व्यापारियों ने मार्केट सेस लगातार वसूले जाने पर कड़ी नाराजगी जताई। प्रतिनिधियों का कहना था कि बाजार समितियां सेस से काफी कमाई करती हैं, लेकिन व्यापारियों को उसके हिसाब से सड़क, पानी, ड्रेनेज, सफाई, बुनियादी ढांचा, सुविधाएं और जरूरी सेवाएं नहीं मिलतीं।
इससे पहले 4 अगस्त 2026 को कोल्हापुर में हुए राज्य स्तरीय व्यापारी सम्मेलन में सर्वसम्मति से तय हुआ था कि अगर 2 अक्टूबर 2026 तक मार्केट सेस खत्म नहीं हुआ, तो महात्मा गांधी जयंती से महाराष्ट्र के व्यापारी शांतिपूर्ण असहयोग आंदोलन शुरू करेंगे। वे न सेस वसूलेंगे और न उसे संबंधित बाजार समितियों में जमा करेंगे।
लेकिन 30 सितंबर की ऑनलाइन बैठक में पूरे महाराष्ट्र के व्यापारी प्रतिनिधियों की राय विस्तार से सुनने के बाद मौजूदा हालात पर सामाजिक, मानवीय और किसान के नजरिये से दोबारा विचार किया गया। राज्य के किसान सूखे की वजह से पहले ही भारी आर्थिक तंगी झेल रहे हैं। नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार नजदीक हैं। ऐसे में आंदोलन शुरू होता तो खेती की उपज की आवाजाही, आवक, खरीद और बिक्री पर असर पड़ सकता था। इस रुकावट का सबसे ज्यादा बोझ आखिर किसानों पर पड़ता और उनकी मुश्किलें और बढ़तीं।
इसलिए किसानों के हित को सबसे ऊपर रखते हुए, और यह पक्का करने के लिए कि इस कठिन दौर में उनकी परेशानी और न बढ़े, महाराष्ट्र राज्य व्यापारी कृति समिति ने 2 अक्टूबर से प्रस्तावित असहयोग आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने का फैसला किया।
कृति समिति ने साफ किया कि इस फैसले को व्यापारियों के रुख से पीछे हटना न समझा जाए। उसके मुताबिक यह मौजूदा हालात में किसानों को प्राथमिकता देने का जिम्मेदार, संवेदनशील और सामाजिक सोच वाला फैसला है।
"किसान और व्यापारी एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं हैं, वे अर्थव्यवस्था के आपस में पूरक स्तंभ हैं। जब किसान प्राकृतिक संकट से जूझ रहे हों, तब यह व्यापारी समुदाय की सामाजिक जिम्मेदारी है कि उनकी तकलीफ और न बढ़े। इसलिए 2 अक्टूबर से प्रस्तावित असहयोग आंदोलन फिलहाल स्थगित किया जा रहा है। फिर भी इसका यह मतलब कतई न निकाला जाए कि व्यापारी समुदाय मार्केट सेस खत्म करने की मांग से पीछे हट गया है।"
समिति ने दोहराया कि APMC मार्केट सेस को पूरी तरह खत्म करने की उसकी मांग पहले जितनी ही मजबूत है। राज्य सरकार, विपणन विभाग और संबंधित अधिकारियों से बातचीत और लगातार फॉलोअप नए जोश के साथ जारी रहेगा।
बैठक में यह भी कहा गया कि कर ढांचे, व्यापार के तरीकों और बाजार की चाल में बदलाव को देखते हुए APMC व्यवस्था की पूरी समीक्षा जरूरी है। ऐसा आधुनिक, पारदर्शी, कारगर और व्यावहारिक ढांचा बनना चाहिए जो किसानों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं, सबके साथ इंसाफ करे।
कृति समिति ने राज्य सरकार से अपील की कि वह व्यापारियों के संयम, सामाजिक जिम्मेदारी और किसान को आगे रखने वाले रवैये को सकारात्मक ढंग से ले और बिना देर किए व्यापारी प्रतिनिधियों से सार्थक बातचीत शुरू करे, ताकि मार्केट सेस के मसले का स्थायी, न्यायपूर्ण और सकारात्मक हल निकले।
सरकार से बातचीत और फॉलोअप जारी रहेगा और हालात की लगातार समीक्षा होती रहेगी। अगर मार्केट सेस पर उम्मीद के मुताबिक फैसला नहीं आया, तो महाराष्ट्र के व्यापारी संगठन फिर मिलकर विचार करेंगे और आंदोलन की आगे की दिशा और रणनीति तय करेंगे।
"आंदोलन फिलहाल स्थगित है, मार्केट सेस खत्म करने की मांग कायम है!"
महाराष्ट्र का व्यापारी समुदाय किसानों, उपभोक्ताओं और व्यापार के हितों में संतुलन रखते हुए एकजुटता और दृढ़ता से मार्केट सेस खत्म करने की मांग उठाता रहेगा।
"किसान बचेगा तो बाजार बचेगा, बाजार बचेगा तो व्यापार बचेगा, और व्यापार मजबूत रहेगा तो महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था मजबूत रहेगी।" - महाराष्ट्र राज्य व्यापारी कृति समिति