खोडाळा की आदिवासी सेवा सोसायटी पर आरोप: कर्ज का वादा कर दस्तख़त लिए, पैसा नहीं दिया
खोडाळा के आदिवासी खातेदारों का आरोप है कि सोसायटी ने नया कर्ज देने का भरोसा देकर दस्तख़त लिए, पर कर्ज नहीं मिला। उन्होंने तहसीलदार, पुलिस और जिला प्रशासन से कार्रवाई मांगी है।
खोडाळा की आदिवासी सेवा सोसायटी के आदिवासी खातेदारों ने सोसायटी प्रशासन पर धोखाधड़ी का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि फसल कर्जमाफी के बाद नया कर्ज देने का भरोसा दिलाकर उनसे दस्तख़त करवाए गए, लेकिन असल में उन्हें कर्ज मिला ही नहीं।
इससे नाराज़ किसानों ने मोखाडा के तहसीलदार, पुलिस स्टेशन और पालघर जिला प्रशासन के पास जाकर निवेदन दिया है। उन्होंने मांग की है कि जिन पर आरोप है, उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए।
मामला कुछ यूं है कि इन आदिवासी खातेदारों का पुराना सोसायटी कर्ज सरकार की तरफ से माफ हो चुका था। उसके बाद 2024 में अगली खेती के काम के लिए उन्होंने नए कर्ज की मांग दर्ज करवाई। खातेदारों के मुताबिक उस वक्त सोसायटी के दफ्तर में ज़रूरी कागज़ात पर उनके दस्तख़त लिए गए और वादा किया गया कि 30 तारीख तक कर्ज बांट दिया जाएगा।
खातेदारों ने अपनी अर्जी में आरोप लगाया है कि आदिवासी सेवा सोसायटी के सचिव विष्णू जोशी की तरफ से अब तक कर्ज का वितरण नहीं हुआ है। किसान बार-बार दफ्तर के चक्कर काटते रहे, फिर भी कर्ज नहीं मिला, और अब वे परेशान हैं।
ठीक सीज़न के वक्त हक का कर्ज न मिलने से इन आदिवासी किसानों पर आर्थिक संकट आ गया है। खेती का खर्च निकालने के लिए कुछ खातेदारों को घर के गहने साहूकारों के पास गिरवी रखने पड़े हैं। किसानों ने मांग की है कि प्रशासन इस गंभीर मामले की गहराई से जांच करे, आदिवासी किसानों को फौरन इंसाफ दे और धोखाधड़ी करने वाले दोषियों पर कानूनी कार्रवाई करे।
आडोशी के किसान प्रकाशा गांगुर्डे ने साफ कहा, "किसानों ने भरोसे के साथ सोसायटी से मदद की उम्मीद की थी। बार-बार मांगने पर भी कर्ज नहीं बंटा, इसलिए किसान आर्थिक संकट में फंस गए हैं। खेती का सीज़न चल रहा हो और उन्हें साहूकारों के आगे हाथ फैलाना पड़े, यह बहुत गंभीर बात है। प्रशासन इस मामले की तुरंत जांच करके सच्चाई सामने लाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे।"
खोडाळा के उपसरपंच उमेश येलमामे ने कहा, "आदिवासी किसानों को अपने हक की सोसायटी से ही कर्ज न मिले, तो यह बहुत गंभीर बात है। ठीक सीज़न में आर्थिक मदद न मिलने से किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन इस मामले की गहराई से जांच करके खातेदारों को इंसाफ दिलाए। अगर किसानों के साथ फसाद यानी धोखाधड़ी साबित होती है, तो संबंधित लोगों पर कड़ी कार्रवाई होनी ही चाहिए।"