खटाव में स्वाभिमानी संगठन ने रोकी गन्ना तोड़ाई और ढुलाई, गन्ना परिषद का दर मांगा
स्वाभिमानी शेतकरी संगठन ने कहा है कि गन्ना परिषद में घोषित दर मिले बिना खटाव तहसील के किसी भी चीनी कारखाने को गन्ना नहीं जाने दिया जाएगा।
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गन्ना परिषद में जो गन्ना दर घोषित हुआ था, वह मिले बिना खटाव तहसील के किसी भी चीनी कारखाने की गन्ना तोड़ाई और गन्ना ढुलाई शुरू नहीं होने दी जाएगी। स्वाभिमानी शेतकरी संगठन ने यह आक्रामक रुख अपनाया है।
संगठन के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष अनिल पवार और खटाव तहसील अध्यक्ष दत्तू काका घार्गे की अगुवाई में तहसील के अलग-अलग गांवों में पदाधिकारी सीधे किसानों के गन्ने के खेत में उतरे और ढुलाई रोकने की मुहिम शुरू की। इस वजह से कई जगह गन्ना ढुलाई और गन्ना तोड़ाई बंद पड़ गई है।
गोपुज, वाकळवाडी, नायकाची वाडी, निमसोड, आंबवडे, हिंगणे, डाळमोडी, चितळी और मायणी इलाकों में संगठन के पदाधिकारी किसानों के खेत की मेड़ तक पहुंचे। संगठन का कहना है कि गन्ना परिषद में घोषित दर मिलना किसानों का हक है, और दर का सवाल सुलझे बिना गन्ना कारखाने को नहीं भेजना चाहिए।
इस दौरान गन्ना ढुलाई करने वालों को सिर्फ समझाया गया और ढुलाई रोकने की अपील की गई। तहसील अध्यक्ष दत्तू काका घार्गे ने चेतावनी दी कि किसानों की मांग को अनदेखा करके ढुलाई चालू रखी गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
घार्गे ने कहा, "आज हम गन्ना ढुलाई करने वालों को समझा रहे हैं। लेकिन कल आंदोलन तेज हुआ तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित कारखाना प्रशासन की होगी। गन्ना दर का सवाल सुलझने तक गन्ना ढुलाई मत कीजिए। किसानों के सब्र की परीक्षा मत लीजिए।"
संगठन ने सोनहिरा, अजिंक्यतारा, शिवनेरी, वर्धन (पडळ), खटाव, जरंडेश्वर समेत संबंधित चीनी कारखानों के प्रशासन से मांग की है कि गन्ना परिषद में घोषित दर के सवाल पर वे तुरंत अपना रुख साफ करें।
संगठन के पदाधिकारियों ने यह भी चेताया कि गन्ना दर का सवाल सुलझने तक ढुलाई चालू रखने की कोशिश हुई तो आंदोलन कारखानों की पेराई बंद कराने तक ले जाया जाएगा। संगठन किसानों के गन्ने को सही दर मिलने की मांग पर अड़ा है और साफ किया गया है कि दर पर समाधान निकलने तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा।
एक तरफ संगठन किसानों के गन्ने को सही दर दिलाने के लिए सड़क पर उतरा है, तो दूसरी तरफ किसानों से भी आंदोलन का साथ देने की अपील की गई है। पदाधिकारियों ने कहा, "स्वाभिमानी शेतकरी संगठन आपके हक के लिए सड़क पर उतरा है। तो अपने हक के दर के लिए दो-चार दिन गन्ना तोड़ाई रुक गई, तो उसमें बिगड़ क्या जाएगा? अस्थायी परेशानियों से ज्यादा जरूरी है कि गन्ने को सही दर मिले। किसान आपसी मतभेद एक तरफ रखकर एकजुटता दिखाएं।"
गांव-गांव में पदाधिकारियों की मुहिम चल रही है। हिंगणे इलाके में संतोष निकम, चितळी इलाके में अनिल कचरे, जबकि बनपुरी और येरळवाडी इलाके में युवक तहसील अध्यक्ष विजय देवकर ने किसानों से बात की। उन्होंने गन्ना दर के सवाल पर संगठन का रुख समझाया और गन्ना तोड़ाई रोकने की अपील की।
खटाव तहसील में गन्ना दर का सवाल निपटने तक आंदोलन की आंच बनाए रखने का संकल्प स्वाभिमानी शेतकरी संगठन ने जताया है। खातगुण, येळीव, उंबर्डे, गोपूज और बनपुरी के गन्ना उत्पादक किसानों ने आंदोलन को एक स्वर में समर्थन दिया है।