मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:27 IST

खालापुर में पातालगंगा किनारे तलावों में कथित गैरकानूनी मांगूर पालन, लोगों ने की शिकायत

रायगड के खालापुर तालुका में पातालगंगा किनारे के कुछ तलावों में कथित तौर पर मांगूर मछली पाली जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इससे पानी खराब हो रहा है और बदबू फैल रही है।

खालापुर में पातालगंगा किनारे तलावों में कथित गैरकानूनी मांगूर पालन, लोगों ने की शिकायत
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

रसायनी: रायगड जिले के खालापुर तालुका में पातालगंगा नदी इलाके में औद्योगिक प्रदूषण का मसला पहले ही गंभीर है। अब नदी किनारे के कुछ तलावों में कथित तौर पर गैरकानूनी मांगूर मछली पालन चलने की शिकायतों ने जल प्रदूषण का सवाल फिर सामने ला दिया है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि महड, धामणी, पौंध, कोपरी और चांभार्ली इलाके के कुछ तलावों में मांगूर पाली जा रही है। ये सब आरोप हैं और इन पर प्रशासन की जांच का इंतजार है।

लोगों का कहना है कि मछलियों को बड़ी मात्रा में चारा डाला जाता है। जो चारा बच जाता है, वह तलाव के पानी में सड़ता रहता है। इससे पानी की क्वालिटी गिर रही है और बदबू फैल रही है। कुछ जगहों पर बदबूदार पानी एक तय वक्त के बाद नदी में छोड़े जाने का आरोप भी लगाया जा रहा है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक मांगूर को चारे के तौर पर मुर्गियों का बचा हुआ कचरा दिया जाता है। यह चारा तलाव में सड़ने से बदबू और बढ़ रही है, ऐसी शिकायत है। लोग यह भी बताते हैं कि मरी हुई मछली को ठीक तरह से ठिकाने लगाने के बजाय कुछ जगहों पर जला दिया जाता है। इसी वजह से महड गांव, देवस्थान इलाके, खालापुर और सावरोली पुल के आसपास बदबू की तकलीफ महसूस हो रही है।

लोगों की मांग है कि तहसीलदार, मत्स्य विभाग और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल मिलकर इन तलावों का फौरन मुआयना करें और पानी के नमूने लें। साथ ही तलावों और आसपास की बदबू को रोकने और संभावित प्रदूषण को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। यह मांग इलाके में जोर पकड़ रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इन आरोपों की प्रशासन को मौके पर जाकर पड़ताल करनी चाहिए और सच्चाई सामने लानी चाहिए। फिलहाल लोगों की नजर इस पर है कि प्रशासन मौके पर देखने के बाद क्या कार्रवाई करता है।

पातालगंगा नदी के प्रदूषण के मसले पर पातालगंगा बचाओ मुहिम के तहत महाराष्ट्र राज्य पत्रकार संघ के कोकण विभागीय अध्यक्ष राकेश खराडे सरकार और संबंधित महकमों से लगातार बात कर रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में जरूरी है कि प्रशासन नदी किनारे के तलावों में कथित मांगूर पालन की गहराई से जांच करे और यह भी देखे कि तलाव का पानी नदी में छोड़ा जाता है या नहीं।

नदी का प्रदूषण रोकने के साथ ही किनारे के तलावों से होने वाले संभावित प्रदूषण पर भी फौरन ध्यान दिया जाए, यही इलाके के लोगों की मांग है।

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