मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:00 IST

कशेळी मेट्रो डेपो की भराई पर सवाल, स्थानीय लोगों ने MMRDA के ठेकेदार पर लगाए आरोप

मेट्रो मार्गिका-5 के कशेळी डेपो की भराई में ट्विन टनल का पत्थर और मलबा इस्तेमाल होने का आरोप है। स्थानीय लोग मंजूरी, खर्च और गुणवत्ता की जानकारी मांग रहे हैं।

कशेळी मेट्रो डेपो की भराई पर सवाल, स्थानीय लोगों ने MMRDA के ठेकेदार पर लगाए आरोप
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

मेट्रो मार्गिका-5 के तहत कशेळी में बन रहे मेट्रो कार डेपो की भराई के काम को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मानपाडा-बोरिवली ट्विन टनल की खुदाई से निकला मलबा और पत्थर कशेळी डेपो की भराई में डाला जा रहा है।

स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि जब सैकड़ों करोड़ रुपये का टेंडर निकाला गया है, तो फिर MMRDA ठेकेदार पर इतनी मेहरबानी क्यों दिखा रही है। उनका यह भी कहना है कि अगर इस मामले की गहराई से जांच हुई, तो बड़े लोग इसमें फंस सकते हैं।

लोग पूछ रहे हैं कि इस पत्थर को डेपो में इस्तेमाल करने की मंजूरी आखिर किसने दी। उसकी क्वालिटी और तकनीकी जांच हुई है या नहीं, यह सवाल भी उठाया जा रहा है।

MMRDA से मिली जानकारी के मुताबिक कशेळी मेट्रो डेपो के निर्माण का करीब 589 करोड़ 56 लाख रुपये का कंत्राट रित्विक प्रोजेक्टस प्रा. लि. कंपनी को दिया गया है। इस कंत्राट में सड़कों और ड्रेनेज का काम भी शामिल है।

उपलब्ध प्रोजेक्ट रिपोर्ट के हिसाब से मिट्टी का काम और खुदाई के लिए 12 करोड़ 31 लाख रुपये रखे गए हैं। मिट्टी की भराई के लिए 35 करोड़ 39 लाख रुपये का प्रावधान है। वहीं मिट्टी की मुख्य भराई के ऊपर पत्थर और रेत मिली सुरक्षा परत डालने के लिए 16 करोड़ 67 लाख रुपये रखे गए हैं।

स्थानीय लोगों ने MMRDA से कई सवाल किए हैं। टनल का पत्थर कशेळी डेपो में डालने की इजाजत किसने दी, अब तक कितना पत्थर डेपो में लाया गया, उसकी ढुलाई और इस्तेमाल पर कितना खर्च हुआ, और ठेकेदार को अब तक कितनी रकम दी गई। इन सवालों के जवाब में आधिकारिक कागजात और तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही साफ होगा कि टनल के पत्थर का इस्तेमाल मंजूर मानकों के मुताबिक हुआ है या नहीं।

MMRDA के मुताबिक कशेळी डेपो करीब 27 हेक्टेयर इलाके में तैयार हो रहा है। यहां खाड़ी की कीचड़ वाली मिट्टी को देखते हुए जमीन को धंसने से रोकने और उसकी मजबूती बढ़ाने के लिए नई तकनीक इस्तेमाल की जा रही है। इसके लिए IIT मुंबई की मदद भी ली जा रही है।

इसी वजह से स्थानीय लोगों की मांग है कि भराई में लगने वाले पत्थर की क्वालिटी, मिट्टी को घट्ट बैठाने और तकनीकी मंजूरी के बारे में साफ जानकारी दी जाए।

MMRDA ने यह भी बताया है कि सिर्फ पत्थर का इस्तेमाल होने से यह नतीजा नहीं निकाला जा सकता कि डेपो असुरक्षित है। इसके लिए मटेरियल टेस्टिंग, सॉइल इन्वेस्टिगेशन, कॉम्पैक्शन रिपोर्ट और जियोटेक्निकल सर्टिफिकेशन की जांच जरूरी है, ऐसा MMRDA ने कहा है।

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