जंतर-मंतर पर महिला पत्रकार से कथित बदसलूकी, पत्रकार संगठनों ने जताई कड़ी नाराजगी
दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स और केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स की दिल्ली यूनिट ने दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच मांगी है।
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर 2 अक्टूबर को हुए आंदोलन की कवरेज के दौरान एक महिला पत्रकार के साथ दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कथित तौर पर यौन दुर्व्यवहार किया, ऐसा आरोप लगाया गया है। इस घटना पर दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (DUJ) और केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स की दिल्ली यूनिट ने कड़ी नाराजगी जताई है।
पत्रकार संगठनों के बयान के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत पर आरोप है कि उन्होंने आंदोलन की कवरेज कर रही एक युवा महिला पत्रकार को कथित तौर पर गलत तरीके से पकड़ा। संगठनों का कहना है कि पत्रकार ने जब इसका विरोध किया तो अधिकारी वहां से चले गए।
संगठनों ने यह दावा भी किया है कि इस कथित घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। हालांकि इन आरोपों की कोई स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
संगठनों के दावे के अनुसार, महिला पत्रकार कथित घटना के बाद से दो दिन से FIR दर्ज कराने के लिए पुलिस के पास जा रही हैं। संगठनों का आरोप है कि अभी तक मामला दर्ज नहीं किया गया है। उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और शिकायत पर कानूनी कार्रवाई फौरन शुरू की जाए।
पत्रकार संगठनों ने जंतर-मंतर के आंदोलन के दौरान पुलिस के कथित बर्ताव पर भी सवाल उठाए हैं। दावा किया गया है कि आंदोलन की जगह पर पुलिस ने पत्रकारों और आंदोलनकारियों के साथ सख्ती से पेश आई। संगठनों का यह भी कहना है कि कुछ पत्रकारों को आंदोलन की शूटिंग और रिपोर्टिंग रोकने के लिए कथित तौर पर धमकाया गया।
बयान में कहा गया है कि कई महिला और पुरुष पत्रकारों ने पुलिस की ओर से कथित बदसलूकी और रुकावट की शिकायत की है। यह आरोप भी लगाया गया है कि जंतर-मंतर तय आंदोलन स्थल होने के बावजूद वहां सभा करने की इजाजत नहीं दी जा रही।
पत्रकार संगठनों के मुताबिक, कवरेज के लिए पहुंचे कई पत्रकारों से प्रेस कार्ड मांगा गया। कुछ पत्रकारों ने जब पुलिसकर्मियों के पहचान पत्र पर लगे नाम के बैज के बारे में पूछा, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला, ऐसा दावा भी किया गया है।
DUJ और दूसरे पत्रकार संगठनों ने यह भी कहा है कि पत्रकारों से प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो यानी PIB कार्ड मांगना ठीक नहीं है। उनके मुताबिक PIB कार्ड ज्यादातर संसद और मंत्रालयों की रिपोर्टिंग करने वाले वरिष्ठ पत्रकारों को दिया जाता है। शहरों में काम करने वाले कई रिपोर्टर और फ्रीलांस पत्रकारों के पास यह कार्ड नहीं होता। इसलिए संगठनों का दावा है कि ऐसे पत्रकारों को सार्वजनिक कार्यक्रम या आंदोलन की कवरेज के हक से वंचित नहीं किया जा सकता।
DUJ ने राजधानी में पत्रकारों पर कथित हमलों और बदसलूकी की घटनाओं पर चिंता जताई है। संगठन ने सितंबर में साकेत पुलिस थाने में दो महिला पत्रकारों को कथित तौर पर हिरासत में लेकर उनके साथ मारपीट किए जाने की घटना का भी जिक्र किया है। DUJ का कहना है कि पत्रकार जब अपनी ड्यूटी निभा रहे हों, तब उनके साथ ऐसा कथित बर्ताव प्रेस की आजादी से जुड़ा गंभीर सवाल है।
DUJ ने पत्रकारों पर कथित हमलों और बदसलूकी की निष्पक्ष न्यायिक जांच की मांग की है। पत्रकार संगठनों ने दिल्ली पुलिस की जवाबदेही तय करने की मांग भी रखी है। महिला पत्रकार के आरोपों, वीडियो और शिकायत के बारे में असल तस्वीर आधिकारिक जांच से ही साफ होने की उम्मीद है। संगठनों ने पारदर्शी जांच की मांग करते हुए पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा फिर उठाया है।