जलगांव में विसर्जन जुलूस से पहले पुलिस सख्त, DJ बजाने वालों पर बाद में कार्रवाई की चेतावनी
जलगांव में गणेश विसर्जन जुलूस से पहले पुलिस और महापालिका ने मंडलों के साथ बैठक कर नियम साफ किए।
जलगांव में गणेश विसर्जन जुलूस से पहले पुलिस ने सार्वजनिक गणेश मंडलों को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि जुलूस में डीजे बजाने की इजाजत नहीं होगी। पुलिस ने कहा है कि जो मंडल डीजे बजाएंगे उन पर जुलूस के दौरान तुरंत कार्रवाई नहीं की जाएगी, लेकिन बाद में नियम के मुताबिक उनके खिलाफ कार्रवाई जरूर होगी। यह जानकारी सार्वजनिक गणेश मंडल की बैठक में दी गई।
यह बैठक जलगांव महापालिका की इमारत के दूसरे माले पर बने सभागार में हुई। बैठक में जिला पुलिस उप-अधीक्षक नितिन गणापुरे, अपर पुलिस अधीक्षक संदीप गावित, महापालिका आयुक्त आदित्य जीवने, पुलिस निरीक्षक विशाल जैस्वाल, सागर शिंपी, उप-आयुक्त निर्मला गायकवाड और महापालिका के स्वास्थ्य विभाग के सहायक उप-आयुक्त समीर बोरोले मौजूद रहे। इसके अलावा सार्वजनिक गणेश मंडल के अध्यक्ष मुकुंद मेटकर और पूर्व अध्यक्ष सचिन नारळे भी बैठक में शामिल हुए।
पुलिस और प्रशासन ने बताया कि विसर्जन जुलूस में सबसे पहले महापालिका का मान का गणपती निकलेगा। इसके बाद टॉप दस मंडलों को विसर्जन के लिए कोई नंबर नहीं दिया जाएगा, बल्कि उन्हें सीधे प्रवेश मिलेगा।
बैठक में यह भी साफ किया गया कि किसी भी मंडल को जुलूस में दो से ज्यादा गाड़ियां ले जाने की परमिशन नहीं होगी। हर मंडल सिर्फ दो वाहन ही रख सकेगा, इससे ज्यादा गाड़ियां रखने पर रोक रहेगी। बैठक के दौरान मंडलों के पदाधिकारियों ने भी अपने सुझाव रखे और बैठक शांति से पूरी हुई। हालांकि बैठक खत्म होने के बाद महापालिका के गेट के पास मंडल के कुछ पूर्व पदाधिकारियों और मौजूदा कार्यकर्ताओं के बीच जुबानी बहस हो गई, जो इतनी बढ़ गई कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर झपटने लगे। इससे वहां हड़कंप मच गया, आखिरकार पुलिस ने बीच-बचाव करके मामला शांत कराया।
पुलिस ने यह भी बताया कि जुलूस में शामिल होने वाले मंडलों को रात 12 बजे से अपना नंबर तय करना होगा। इसके लिए उन्हें रात में अपनी गाड़ी लाइन में लगानी होगी, उसी हिसाब से क्रमांक तय किया जाएगा। मंडलों को अपना जुलूस तय समय के अंदर ही निकालना होगा। अगर किसी मंडल ने देरी की तो उसे उसके नंबर से हटाकर लाइन में सबसे आखिर में लगा दिया जाएगा।
जुलूस के रास्ते में कई संस्थाओं की तरफ से मंडलों का स्वागत किया जाता है, लेकिन कुछ संस्थाएं अपना स्वागत मंच आगे की तरफ लगा देती हैं, जिससे जुलूस में रुकावट आती है। इसे देखते हुए प्रशासन ने निर्देश दिया है कि ऐसे सभी स्वागत मंच पीछे की तरफ लगाए जाएं ताकि जुलूस बिना रुकावट चल सके।