'होम मेकर' की ड्यूटी नहीं कर पा रही है महिला पुलिस कर्मी
8 नहीं 12 घंटे करना होगा काम, घर-परिवार के दायित्व पर असर
नागपुर.
पुलिस की ड्यूटी के साथ होम मेकर की भूमिका निभानेवाली महिला कर्मियों पर आफत आई हुई है. घरेलु दायित्व पूरा करने के लिए उन्हें ड्यूट से चार घंटे की छूट दी गई थी. इस छूट को रद्द किए जाने से महिला पुलिस कर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
शहर पुलिस में महिला कर्मियों की संख्या लगभग चार हजार है. महिला कर्मियों को पुलिस की ड्यूटी के साथ परिवार की जिम्मेदारी का भी वहन करना पड़ता है. 'होम मेकर' होने से पूरा परिवार उनके कांधे पर होता है. पुलिस कर्मी को 12 घंटे की ड्यूटी करना अनिवार्य होता है. 12 घंटे की ड्यूटी करने से महिला कर्मियों को 'होम मेकर' का दायित्व निभाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. जिसके चलते महिला कर्मी लंबे वक्त से 12 घंटे के ड्यूटी की अनिवार्यता को हटाने की मांग कर रही थी. इसे देखते हुए तत्कालीन डीजीपी संजय पांडे ने एक समिति गठित की थी. उस समिति की सिफारिश के अनुसार संजय पांडे ने 27 जनवरी 2022 को महिला कर्मियों से 8 घंटे की ड्यूटी कराने का आदेश जारी किया. इसके बाद से महिला कर्मियों से 8 घंटे की ड्यूटी ली जा रही थी. उन्हें आठ-आठ घंटों की तीन शिफ्ट में तैनाती दी जाती थी. जिससे महिला कर्मियों को होम मेडर का दायित्व निभाने का वक्त मिल जाता था.
28 सितंबर से शहर पुलिस ने इस आदेश पर अमल करना बंद कर दिया है. जिसके बाद से महिला कर्मियों से पुरुष कर्मियों की तर्ज पर 12 घंटे काम लिया जा रहा है. उन्हें भी दो शिफ्ट में तैनाती दी जा रही है. इसका असर महिला कर्मियों के पारिवारिक दायित्व पर हो रहा है. महिला कर्मियों का कहना है कि 12 घंटे की ड्यूटी किए जाने का सबसे अधिक असर उनके बच्चों पर हो रहा है. वह मां का दायित्व निभा नहीं पा रही है. थाने में तैनात महिला कर्मी सबसे अधिक हलाकान है. उनका कहना है कि थाने में 12 घंटों की ड्यूटी 13 से 14 घंटों की होती है. वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विभाग काम के अत्यधिक दबाव और मनुष्य बल की कमी से जुझ रहा है. इस वजह से महिला कर्मियों के कार्य के घंटों को बढ़ाया जाना मजबूरी है. महिलाओं के प्रकरण की जांच के लिए महिला कर्मचारी की जरूरत होती है.