गोरेगाव-मुलुंड लिंक रोडः संजय गांधी नेशनल पार्क के नीचे भूमिगत टनल का काम तेज
GMLR प्रोजेक्ट के तहत तुलसी और विहार टनल बोरिंग मशीनों से खुदाई तेजी से चल रही है
मुंबई में लोगों का सफर और आसान बनाने वाले गोरेगाव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR) प्रोजेक्ट के तहत भूमिगत टनल खोदने का काम अब तेज हो गया है। इस प्रोजेक्ट में संजय गांधी नेशनल पार्क के नीचे 'तुलसी' और 'विहार' नाम की दो बड़ी टनल बोरिंग मशीनों (TBM) की मदद से जुड़वां टनल बनाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है।
GMLR प्रोजेक्ट के फेज 3(बी) के तहत गोरेगांव (ईस्ट) में दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी से लेकर मुलुंड (वेस्ट) के अमर नगर तक, संजय गांधी नेशनल पार्क के नीचे से होते हुए टनल बोरिंग मशीन से 5.30 किलोमीटर लंबे दो टनल बनाए जा रहे हैं, हर टनल में तीन-तीन लेन होंगी। इनमें से पहली मशीन 'तुलसी' को 17 अगस्त 2026 को शुरू किया गया था, और अब तक इससे 64 मीटर टनल की खुदाई पूरी हो चुकी है। वहीं दूसरी मशीन 'विहार' के पार्ट्स जोड़ने का काम 92 फीसदी पूरा हो चुका है।
'तुलसी' मशीन से टनल की खुदाई लगातार जारी है और अब तक 64 मीटर काम हो चुका है। इसी के साथ टनल की दीवार बनाने के लिए लगने वाले गोलाकार रिंग भी तेजी से लगाए जा रहे हैं। इन 64 मीटर में तुलसी मशीन की मदद से कुल 27 गोलाकार रिंग लगाई जा चुकी हैं, और इसके अलावा 2 अस्थायी गोलाकार रिंग भी इसी मशीन से लगाई गई हैं।
दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी से मुलुंड के खिंडीपाड़ा तक जुड़वां और भूमिगत टनल बनाई जा रही है। एक-दूसरे के समानांतर ये दोनों टनल हर एक 4.70 किलोमीटर लंबी हैं। इन समानांतर टनल का व्यास 14.20 मीटर है, जबकि संजय गांधी नेशनल पार्क वाले हिस्से में यह 13 मीटर है।
'तुलसी' टनल बोरिंग मशीन सिंगल शील्ड अर्थ प्रेशर बैलेंस (EPB) हार्ड रॉक टाइप की है, जिसके कटर का व्यास 14.49 मीटर है और कुल लंबाई 83 मीटर है। इसमें 22 मीटर लंबा शील्ड हिस्सा और 61 मीटर लंबी तीन मंजिला बैक अप गैन्ट्री शामिल है। इस मशीन में मलबा हटाने का पूरा काम ऑटोमेटिक सिस्टम से होता है, जिसमें 340 मीटर लंबा कन्वेयर सिस्टम, क्रॉस कन्वेयर और स्टैकर कन्वेयर लगे हैं। इससे मुश्किल भूगर्भीय हालात में भी मलबा तेजी से हटाया जा सकता है, काम की रफ्तार बढ़ती है और सेफ्टी भी बनी रहती है।
एक तरफ 'तुलसी' से टनल की खुदाई तेजी से चल रही है, वहीं दूसरी टनल बोरिंग मशीन 'विहार' के पार्ट्स प्रोजेक्ट साइट पर जोड़ने का काम 92 फीसदी पूरा हो चुका है। पूरी मशीन साइट पर लग जाने के बाद यह देखने के लिए कि सारे सिस्टम ठीक से और सुरक्षित तरीके से साथ काम कर रहे हैं या नहीं, साइट एक्सेप्टेंस टेस्ट (SAT) 13 अक्टूबर 2026 से शुरू किया जाएगा। सभी तकनीकी टेस्ट तय मानकों के हिसाब से पूरे होने के बाद 22 अक्टूबर 2026 से दूसरी टनल की खुदाई का काम असल में शुरू किया जाएगा।