EWS सर्टिफिकेट में गड़बड़ी: हाई कोर्ट ने सरकार से मांगी उम्मीदवार की पूरी फाइल
नागपुर बेंच ने कहा, सिर्फ आय प्रमाण पत्र से 8 लाख की सीमा की पुष्टि नहीं होती; अगली सुनवाई तक फाइल पेश करने का निर्देश
नागपुर में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस के सर्टिफिकेट बनाने के तरीके पर हाई कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों के परिवारों का पूरा रिकॉर्ड अगली सुनवाई तक पेश किया जाए।
यह मामला अधिवक्ता संदीप बदाना की एक जनहित याचिका से जुड़ा है। बदाना ने हाई कोर्ट में मांग रखी थी कि ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट को सिर्फ क्यूआर कोड, फोटो और एक जैसे फॉर्मेट तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उसे आयकर विभाग और महाभूलेख के रिकॉर्ड से ऑनलाइन जोड़ा जाए, ताकि आवेदक और उसके परिवार की आय और जमीन-मकान की जानकारी रियल टाइम में चेक हो सके।
याचिकाकर्ता का कहना है कि सर्टिफिकेट पर क्यूआर कोड लगाने से डॉक्यूमेंट की नकल रोकने में तो मदद मिलती है, लेकिन इससे उसमें दर्ज मूल जानकारी सही है या नहीं, यह अपने आप साबित नहीं होता। अगर परिवार की कुल आय या प्रॉपर्टी की डिटेल ही अधूरी या गलत भरी गई हो, तो क्यूआर कोड से उस सर्टिफिकेट को वेरिफाई करने का कोई मतलब नहीं रह जाता। इसलिए उनका कहना है कि सर्टिफिकेट जारी करने से पहले परिवार की आय और प्रॉपर्टी का मिलान डिजिटल रिकॉर्ड से होना जरूरी है।
महाराष्ट्र सरकार के राजस्व एवं वन विभाग ने 20 अप्रैल 2026 को एक परिपत्र जारी कर पूरे राज्य में ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट के लिए क्यूआर कोड और फोटो वाला एक समान फॉर्मेट लागू किया था। याचिकाकर्ता ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे सर्टिफिकेट की फिजिकल नकल और उसमें छेड़छाड़ रोकने में मदद मिल सकती है। लेकिन उनके मुताबिक असली सवाल यह है कि सर्टिफिकेट में दर्ज परिवार की आय और प्रॉपर्टी की डिटेल सच में सही है या नहीं। याचिका में कहा गया है कि मौजूदा प्रोसेस में आवेदक की दी गई जानकारी और उसके खुद के घोषणापत्र पर ही काफी हद तक भरोसा किया जाता है।
सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच के सामने राज्य सरकार की तरफ से 3 साल के आय प्रमाण पत्र का हवाला दिया गया। इस पर कोर्ट ने पूछा कि सिर्फ इस आय प्रमाण पत्र के आधार पर यह कैसे पता चलेगा कि परिवार की कुल आय तय सीमा 8 लाख रुपये से कम है। खासकर तब, जब पति-पत्नी या परिवार के दूसरे कमाने वाले सदस्यों की आय की अनिवार्य जानकारी और घोषणा मौजूद न हो, तो असली पारिवारिक आय का हिसाब कैसे लगाया जाएगा, यह सवाल कोर्ट ने उठाया। इसी को देखते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को संबंधित उम्मीदवार के आवेदन से जुड़ी पूरी फाइल अगली सुनवाई तक कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं, जिससे सर्टिफिकेट जारी करने में हुई जांच का पूरा रिकॉर्ड कोर्ट के सामने आ सके।