एशियन गेम्स: महिला निशानेबाजों की तिकड़ी ने 50 मीटर राइफल थ्री-पोजिशन में जिताया सिल्वर मेडल
जापान में चल रहे एशियन गेम्स 2026 में भारत की तिलोत्तमा सेन, विदर्सा विनोद कोचलुमकल और आशी चौकसे की तिकड़ी ने महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री-पोजिशन टीम स्पर्धा में रौप्य पदक जीता।
जापान में इस समय एशियन गेम्स 2026 चल रहे हैं, और भारत ने कई खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक अपने नाम किए हैं। इसी कड़ी में शूटिंग में भारतीय महिला निशानेबाजों ने अपना दबदबा बरकरार रखते हुए देश के लिए एक और मेडल पक्का किया है।
महिलाओं की 50 मीटर राइफल 3-पोजिशन टीम स्पर्धा में भारत की तिलोत्तमा सेन, विदर्सा विनोद कोचलुमकल और आशी चौकसे की तिकड़ी ने सिल्वर मेडल जीता है। इस चैलेंजिंग इवेंट में तीनों को नीलिंग यानी घुटनों के बल बैठकर, प्रोन यानी पेट के बल लेटकर और स्टैंडिंग यानी खड़े होकर, तीनों पोजिशन में निशाना साधना होता है। तीनों भारतीय खिलाड़ियों ने हर पोजिशन में जबरदस्त कंट्रोल और अपना हुनर दिखाया, जिसकी बदौलत भारत को यह पदक मिल पाया।
तिलोत्तमा, विदर्सा और आशी ने मिलकर कुल 1763 पॉइंट्स स्कोर किए और दूसरे नंबर पर रहे। इस स्पर्धा में गोल्ड मेडल चीन के खाते में गया, जबकि कजाकिस्तान की टीम ने 1754 पॉइंट्स के साथ तीसरा स्थान हासिल कर ब्रॉन्ज मेडल जीता।
क्वालिफिकेशन राउंड में तिलोत्तमा सेन ने 590 पॉइंट्स के साथ तीसरा स्थान पाया, वहीं विदर्सा विनोद ने 588 पॉइंट्स के साथ छठा स्थान हासिल कर व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में जगह बना ली। आशी चौकसे ने भी 585 पॉइंट्स के साथ बढ़िया मुकाबला किया, लेकिन उनकी व्यक्तिगत फाइनल की जगह मामूली अंतर से छूट गई।
टीम इवेंट में सिल्वर मेडल आने के बाद भारतीय निशानेबाजों का आत्मविश्वास और बढ़ गया है, और अब सबकी नजरें तिलोत्तमा सेन और विदर्सा विनोद के इंडिविजुअल फाइनल पर टिकी हैं। दोनों का मौजूदा फॉर्म देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि वे भारत के लिए एक और पदक जीत सकती हैं।
स्पर्धा की शुरुआत में नीलिंग यानी घुटनों के बल बैठकर निशाना लगाने वाली पोजिशन विदर्सा के लिए थोड़ी मुश्किल साबित हुई। शुरुआती कुछ शॉट्स चूकने से उनके पॉइंट्स पर असर पड़ा, लेकिन प्रोन और स्टैंडिंग राउंड में उन्होंने सटीक निशाना लगाकर जबरदस्त वापसी की। तिलोत्तमा और विदर्सा के साथ-साथ आशी चौकसे ने भी शुरुआती दौर में टॉप खिलाड़ियों में जगह बनाकर भारतीय टीम की बढ़त बरकरार रखी थी। इन तीनों खिलाड़ियों की सामूहिक मेहनत की वजह से ही भारत इस इवेंट में सिल्वर मेडल जीत पाया।