एमडी पाउडर मामले में स्टेशनरी दुकान चलाने वाले शाहिद अंसारी को कोर्ट से जमानत
नागपुर की विशेष एनडीपीएस अदालत ने 14 ग्राम 15 मिलीग्राम एमडी पाउडर की कथित बरामदगी के मामले में गिरफ्तार स्टेशनरी दुकान संचालक को जमानत दे दी।
नागपुर की विशेष एनडीपीएस अदालत ने एमडी पाउडर की कथित खरीद-फरोख्त के एक मामले में गिरफ्तार स्टेशनरी दुकान संचालक मोहम्मद शाहिद मोहम्मद इस्लाम अंसारी को जमानत दे दी है। सुनवाई विशेष एनडीपीएस न्यायाधीश मनीष गनोरकर के सामने हुई। दोनों तरफ की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने शाहिद अंसारी को जमानत दी और निर्देश दिया कि वे जांच में सहयोग करें और अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित न करें।
यह मामला 14 ग्राम 15 मिलीग्राम एमडी पाउडर की कथित बरामदगी से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक क्राइम ब्रांच के हेड कॉन्स्टेबल शेख नजीर की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई की थी। बताया गया कि 18 अगस्त 2026 को कोराडी थाना क्षेत्र में आर्य नगर के जगदंबा रेजीडेंसी के पास पुलिस ने शक के आधार पर फरहान शेख नाम के व्यक्ति को रोका।
पुलिस ने उसकी तलाशी ली और उसकी दोपहिया गाड़ी की जांच की, तो कथित तौर पर 14 ग्राम 15 मिलीग्राम एमडी पाउडर मिला। इसके बाद फरहान शेख को गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले में क्राइम नंबर 365/2026 दर्ज हुआ और आरोपी पर एनडीपीएस एक्ट की धारा 8(सी), 22(बी) और 29 के तहत अपराध दर्ज किया गया।
अभियोजन के अनुसार फरहान शेख को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। इसी पूछताछ में उसने कथित तौर पर स्टेशनरी दुकान चलाने वाले मोहम्मद शाहिद मोहम्मद इस्लाम अंसारी का नाम लिया। पुलिस का आरोप था कि फरहान ने बताया कि उसने शाहिद से एमडी पाउडर खरीदा था। इसी आधार पर जांच आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने शाहिद अंसारी को भी गिरफ्तार किया।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने शाहिद को अदालत में पेश किया और आगे की जांच के लिए तीन दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड (पीसीआर) मांगी। बचाव पक्ष ने इस मांग का जोरदार विरोध किया। आरोपी की तरफ से एडवोकेट कमल सतुजा और एडवोकेट कैलाश डोडानी ने अदालत को बताया कि शाहिद को मुख्य रूप से सह-आरोपी फरहान शेख के कथित बयान के आधार पर इस मामले में जोड़ा गया है।
बचाव पक्ष की दलील थी कि शाहिद अंसारी कई साल से स्टेशनरी की दुकान चला रहे हैं और उनके कब्जे से कोई मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ। उनके पास से एमडी पाउडर या किसी और प्रतिबंधित पदार्थ की जब्ती का आरोप भी नहीं है। वकीलों ने यह भी कहा कि सिर्फ सह-आरोपी के कथित स्वीकारोक्ति बयान पर किसी को इस तरह हिरासत में रखना ठीक नहीं है, और ऐसा कोई सीधा ठोस भौतिक सबूत नहीं रखा गया जिससे गिरफ्तारी और पुलिस कस्टडी जरूरी साबित हो। इन दलीलों के बाद अदालत ने पुलिस की मांगी हुई पीसीआर मंजूर नहीं की।
इसके बाद शाहिद अंसारी की तरफ से जमानत अर्जी लगाई गई। इस पर एडवोकेट कमल सतुजा, कैलाश डोडानी और अनमोल गोस्वामी ने पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि शाहिद का इस अपराध से कोई सीधा संबंध नहीं है, वे सालों से स्टेशनरी का कारोबार कर रहे हैं और जांच एजेंसी को उनके पास से कोई प्रतिबंधित पदार्थ नहीं मिला। बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के Toofan Singh फैसले का हवाला भी दिया और कहा कि सह-आरोपी के कथित स्वीकारोक्ति बयान पर अकेले किसी को हिरासत में रखना कानून की कसौटी पर ठीक नहीं ठहरता, इसलिए शाहिद की आगे की हिरासत जरूरी नहीं है।
अभियोजन पक्ष की ओर से एपीपी विनोद हुकरे ने जमानत का विरोध किया। उन्होंने अदालत से कहा कि मामला मादक पदार्थ का है और गंभीर किस्म का है। जांच अभी शुरुआती दौर में है और आगे की जांच बाकी है। अभियोजन ने यह आशंका भी जताई कि जमानत पर छूटने के बाद आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकता है या जांच में रुकावट डाल सकता है, और इसी आधार पर अर्जी खारिज करने की मांग की।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश मनीष गनोरकर ने शाहिद अंसारी को जमानत दे दी। अदालत ने उन्हें जांच में सहयोग करने, अभियोजन के गवाहों को प्रभावित न करने और जांच में किसी तरह का दखल न देने के निर्देश दिए। इस तरह स्टेशनरी दुकान संचालक को अदालत से राहत मिली है। मामले की आगे की जांच पुलिस कर रही है। शाहिद अंसारी की तरफ से एडवोकेट कमल सतुजा, कैलाश डोडानी और अनमोल गोस्वामी ने पैरवी की।