डोंबिवली के गोग्रासवाडी में अवैध गोठे की दलदल में फिर फंसा एक आदमी
गोग्रासवाडी में अनधिकृत गोठे के शेण की दलदल में एक व्यक्ति के फंसने से महापालिका प्रशासन पर फिर सवाल उठे हैं।
डोंबिवली के गोग्रासवाडी इलाके में अनधिकृत गोठे की वजह से बनी दलदल और गंदगी का मामला फिर सामने आया है। इसी दलदल में एक व्यक्ति के फंसने की घटना हुई है। इलाके के लोग पूछ रहे हैं कि महापालिका प्रशासन और कितने बड़े हादसों का इंतजार करेगा।
यह पहली बार नहीं है। पिछले साल जून में इसी जगह एक स्कूली बच्ची पर बैल दौड़ पड़ा था। डरकर भागती हुई वह बच्ची बरसों से जमा शेण की दलदल में फंस गई थी। उस वक्त स्थानीय लोगों ने पूरी जान लगाकर उसे सही सलामत बाहर निकाला था।
गोग्रासवाडी में कई साल से एक अनधिकृत गोठा चल रहा है। आरोप है कि इस गोठे में सफाई के कोई नियम नहीं माने जाते, इसलिए आसपास भारी बदबू और गंदगी फैली रहती है। कई साल से जमा शेण की वजह से बड़े पैमाने पर दलदल बन गई है और इसका नुकसान आसपास रहने वालों को लगातार झेलना पड़ रहा है।
गौर करने की बात यह है कि इस गोठे के आसपास ही प्राचीन कृष्ण मंदिर, पंचमुखी और दक्षिणमुखी मारुति मंदिर, बड़ा जैन मंदिर और प्रकाश विद्यालय हैं। इसलिए यहां रोज सैकड़ों विद्यार्थी, महिलाएं और बुजुर्ग आते-जाते हैं। ऐसी भीड़भाड़ वाली जगह पर इतनी गंदगी और दलदल होना बेहद गंभीर बात है।
सेहत का सवाल भी उतना ही बड़ा है। गोठे की गंदगी से बदबू फैल रही है और मच्छर बढ़ रहे हैं, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बन गया है। लोगों का कहना है कि यह मुद्दा बार-बार उठाने के बावजूद महापालिका प्रशासन सिर्फ कुछ वक्त की कार्रवाई करता है। पिछले साल बच्ची के दलदल में फंसने के बाद भी ऐसी ही अस्थायी कार्रवाई हुई थी, मगर कुछ ही दिनों में हालात फिर 'जैसे थे' हो गए।
स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक इस गोठे की कई गायें सुबह अलग-अलग लोग मंदिर परिसर में ले आते हैं। गोमाता के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु उन्हें चारा खिलाते हैं और दोपहर बाद गायें वापस गोठे में ले जाई जाती हैं। बताया जा रहा है कि इस सिलसिले से पैसे कमाए जा रहे हैं। गायों की देखभाल और सफाई का कोई ठीक इंतजाम कहीं नजर नहीं आता।
गाय पालने, बछड़े रखने या गोशाला चलाने से किसी को एतराज नहीं है। लेकिन इसके लिए जरूरी सफाई, सेहत के नियम और लोगों की सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है। गोमाता की सेवा के नाम पर लोगों की सेहत और सुरक्षा से खिलवाड़ ठीक नहीं है।
अभी पितृपक्ष चल रहा है और हिंदू श्रद्धालु अपने पितरों की याद में गायों को चारा खिलाने बड़ी आस्था से इस इलाके में आ रहे हैं। दलदल का अंदाजा न होने से उन पर भी खतरा बना हुआ है। सवाल है कि फिर कोई गंभीर हादसा हुआ तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।
नागरिकों ने महापालिका प्रशासन से कई सीधे सवाल पूछे हैं। बार-बार शिकायत के बाद भी इस अनधिकृत गोठे पर पक्की कार्रवाई क्यों नहीं होती? पिछले साल एक स्कूली बच्ची की जान खतरे में पड़ी, फिर भी ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए? एक व्यक्ति के फिर दलदल में फंसने के बाद भी प्रशासन कब तक निष्क्रिय रहेगा? इलाके के लोगों की सेहत और सुरक्षा किसकी जिम्मेदारी है? और इस गोठे के जानवरों को सही जगह भेजकर इलाका साफ करने की कार्रवाई कब होगी?
एक बात और गौर करने लायक है। गोग्रासवाडी गोशाला का अपना अधिकृत गोठा है, जहां जानवरों की ठीक से देखभाल होती है और उससे आसपास के लोगों को कोई परेशानी नहीं होती। तो फिर इस अनधिकृत गोठे पर ही ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
गोग्रासवाडी के लोग कई साल से यह समस्या झेल रहे हैं। बार-बार शिकायत के बाद भी अगर सिर्फ मलहम-पट्टी होती रहे तो उसका कोई फायदा नहीं। अब इसका पक्का हल निकालने का वक्त आ गया है। मांग है कि इस गोठे के जानवरों को सही जगह भेजा जाए, इलाके की दलदल पूरी तरह साफ की जाए और ध्यान रखा जाए कि लोगों की सेहत को खतरा न रहे। आज गोग्रासवाडी का हर नागरिक यही पूछ रहा है कि क्या किसी की जान जाने के बाद ही महापालिका प्रशासन जागेगा।