दिवाली की टिकट बुकिंग शुरू होते ही मिनटों में फुल, पुणे के यात्री परेशान
पुणे से विदर्भ, उत्तर भारत और मराठवाड़ा जाने वाली ट्रेनों में आरक्षण खुलते ही कन्फर्म टिकट खत्म, वेटिंग और रिग्रेट की नौबत।
दिवाली पर घर जाने की तैयारी में बैठे पुणे के यात्रियों को इस बार टिकट के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। रेलवे का आरक्षण खुलते ही चंद मिनटों के अंदर लंबी दूरी की कई गाड़ियों की टिकट खत्म हो गई। शुरुआत में कन्फर्म टिकट मिलना बंद हुआ, उसके बाद वेटिंग लिस्ट भी भरने लगी और कई गाड़ियों में तो सीधे रिग्रेट का ऑप्शन ही सामने आ रहा है। नतीजा यह कि दिवाली की छुट्टियों में गांव जाने वाले यात्रियों के सामने टिकट पाना ही सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
नवंबर में दिवाली पड़ रही है, इसलिए बहुत से यात्रियों ने दो महीने पहले से ही प्लानिंग कर ली थी। आरक्षण की तारीख आते ही सुबह आठ बजे वेबसाइट या ऐप पर टिकट बुक करने की कोशिश की गई। लेकिन गाड़ी और तारीख चुनकर पेमेंट तक पहुंचते-पहुंचते सीटें खत्म मिलीं। कई गाड़ियों में तो वेटिंग टिकट मिलने के चांस भी खत्म हो गए, जिससे यात्री मायूस हो गए। ऑनलाइन बुकिंग की दिक्कतों से बचने के लिए जो लोग सीधे टिकट खिड़की पर गए, उन्हें भी मनचाहा टिकट नहीं मिला।
पुणे से विदर्भ जाने वाली अजनी-पुणे एक्सप्रेस, महाराष्ट्र एक्सप्रेस, गरीब रथ, हमसफर एक्सप्रेस और नागपुर-पुणे एक्सप्रेस को त्योहारी सीजन में सबसे ज्यादा डिमांड रहती है। इसके अलावा कोंकण, मराठवाड़ा के साथ-साथ दिल्ली, लखनऊ, पटना, दानापुर और कोलकाता जाने वाले रूटों पर भी यात्रियों की भीड़ बढ़ जाती है। आजाद हिंद एक्सप्रेस, पुणे-काजीपेट एक्सप्रेस, झेलम एक्सप्रेस, लखनऊ एक्सप्रेस और दानापुर एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में भी टिकटों की भारी मांग रहती है।
रेलवे ने पहले 120 दिन पहले से आरक्षण की सुविधा दी थी, जिसे बाद में घटाकर 60 दिन कर दिया गया। लेकिन आरक्षण की अवधि कम होने के बावजूद त्योहारी सीजन की डिमांड पर कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। लंबी दूरी का सफर अपेक्षाकृत सुरक्षित, सुविधाजनक और किफायती होने की वजह से यात्रियों की पहली पसंद अब भी रेलवे ही है। यही वजह है कि दशहरा-दिवाली के दौरान अतिरिक्त और स्पेशल ट्रेनें चलाने की मांग यात्री लगातार कर रहे हैं।
त्योहारी सीजन में टिकटों की मांग एकदम से बढ़ जाने से दलालों के दखल की मार आम यात्रियों पर पड़ने की शिकायत भी सामने आई है। आरोप है कि आरक्षण केंद्रों और ऑनलाइन बुकिंग प्रोसेस में तेजी से टिकट बुक करने के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे यात्रियों की मांग है कि टिकट बुकिंग प्रोसेस पर ज्यादा असरदार नजर रखी जाए।
यात्री निकिता देशपांडे बताती हैं कि उन्होंने दिवाली पर गांव जाने के लिए करीब दो महीने पहले से ही रेलवे टिकट की प्लानिंग कर रखी थी। आरक्षण शुरू होते ही सुबह आठ बजे ऑनलाइन टिकट बुक करने की कोशिश की, लेकिन कुछ ही मिनटों में कन्फर्म टिकट खत्म हो गए। वेटिंग पर टिकट लेने की कोशिश की तो वह भी उपलब्ध नहीं था। उनका कहना है कि अब बस इसी उम्मीद पर हैं कि कोई स्पेशल गाड़ी शुरू हो जाए।
पुणे रेलवे स्टेशन पर कुल 6 प्लेटफॉर्म हैं, जहां से रोजाना करीब 170 पैसेंजर ट्रेनें चलती हैं। रोजाना करीब 1 लाख 70 हजार यात्री यहां से सफर करते हैं, जबकि त्योहारी सीजन में यह संख्या बढ़कर करीब 2 लाख तक पहुंच जाती है। यात्रियों की बढ़ती संख्या की वजह से आरक्षण की वेटिंग लिस्ट में भी बढ़ोतरी होती दिख रही है।