मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:54 IST

धोम बांध इलाके में पत्थर का पुल और कंटेनर रूम, सिंचाई विभाग की चुप्पी पर सवाल

वाई तालुका में धोम बांध के जलाशय के पास कथित अवैध निर्माण को लेकर स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि परमिशन किसने दी और कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

धोम बांध इलाके में पत्थर का पुल और कंटेनर रूम, सिंचाई विभाग की चुप्पी पर सवाल
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

वाई तालुका के पश्चिमी हिस्से में धोम बांध के जलाशय से सटी हद में कथित तौर पर अवैध निर्माण करके पत्थर के पुल बना दिए गए हैं। यह भी बात सामने आ रही है कि बांध इलाके की जगह इस्तेमाल करके वहां कंटेनर रूम खड़ा कर दिया गया है।

बांध के संरक्षित क्षेत्र में इस तरह का काम आखिर कैसे हो गया, यह पहला सवाल है। अगर ऐसा हुआ है तो इसकी परमिशन ठीक-ठीक किसने दी? क्या यह काम संबंधित विभाग की नजर में नहीं आया? और अगर आया, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? ऐसे कई सवाल अब उठ रहे हैं।

स्थानीय लोग गुस्से में हैं। उनका कहना है कि किसान बांध इलाके में गालपेर की खेती कर लें तो सिंचाई विभाग के नियम, नोटिस और कार्रवाई का डंडा तुरंत चलता है। दूसरी तरफ बांध की हद में ही बड़े पैमाने पर निर्माण खड़ा हो रहा है, तो प्रशासन के हाथ क्यों बंध गए हैं?

बांध इलाके की जमीन के इस्तेमाल, जलाशय के पास के निर्माण और अतिक्रमण को लेकर नियम मौजूद हैं। इन नियमों की धज्जियां उड़ रही हों तो मामला बेहद गंभीर माना जाना चाहिए। आम किसान के लिए नियम सख्त और असरदार लोगों के लिए ढीले, ऐसी हालत बन रही हो तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है, यह भी पूछा जा रहा है। कंटेनर रूम खड़ा करने के लिए राजस्व विभाग या किसी और सरकारी महकमे की इजाजत ली गई थी या नहीं, इसकी गहरी जांच जरूरी बताई जा रही है।

मांग यह भी है कि अगर धोम बांध की हद में नियम के खिलाफ काम हुआ है और उस पर आंखें मूंदने वाले अफसर या कर्मचारी रहे हैं, तो उनकी भी जांच हो। सिर्फ निर्माण करने वाले पर कार्रवाई से बात नहीं बनेगी। यह भी पता चलना चाहिए कि काम किसकी इजाजत से, किसकी निगरानी में या किसकी अनदेखी से हुआ।

इसलिए धोम बांध इलाके के कथित अतिक्रमण की फौरन मौके पर जाकर जांच की जाए और पंचनामा बनाया जाए। निर्माण की परमिशन भी खंगाली जाए, और नियम के खिलाफ पाया जाए तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हो। यह मांग अब जोर पकड़ रही है।

धोम बांध के पानी और आसपास के इलाके पर आम लोगों का हक है। ऐसे में बांध क्षेत्र में अतिक्रमण को खुली छूट मिल रही हो, तो सिंचाई विभाग आखिर किसका इंतजार कर रहा है? यही सवाल अब जनता के सामने खड़ा है।

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