देवगड में डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर शिक्षिका से 25 हजार रुपये की ऑनलाइन ठगी
देवगड तालुका के गिर्ये इलाके की एक शिक्षिका को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर ऑनलाइन ठग लिया गया। उनसे 25 हजार रुपये की ठगी की गई। इस मामले में विजयदुर्ग पुलिस स्टेशन में एक अज्ञात संदिग्ध के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
पुलिस के मुताबिक 24 सितंबर को सुबह 10.45 बजे संदिग्ध ने शिक्षिका को फोन किया। उसने खुद को पुलिस और सायबर क्राइम ब्रांच का बताया। उसने शिक्षिका पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपने मोबाइल पर केंद्र सरकार की बैन की हुई अश्लील वेबसाइट देखी हैं। साथ ही कहा कि मुंबई सायबर क्राइम ब्रांच की तरफ से उनके नाम अरेस्ट वारंट निकला है। एक लाख रुपये जुर्माने और एक साल की जेल का डर भी दिखाया गया।
इसके बाद व्हाट्सऐप पर अश्लील फोटो भेजकर बदनाम करने की धमकी दी गई। फिर पुलिस की वर्दी पहने एक शख्स ने वीडियो कॉल करके शिक्षिका को डराया। उसने कहा कि वह बड़े अफसरों से बात करके माफीनामा तैयार करवा देगा। साथ ही लालच दिया कि एक लाख रुपये के जुर्माने का 25 प्रतिशत भर दें तो वारंट रद्द हो जाएगा।
डरी हुई शिक्षिका ने संदिग्ध के बताए खाते में दो बार 12 हजार 500 रुपये भेजे, यानी कुल 25 हजार रुपये। इसके बाद माफीनामे के लिए 35-35 हजार रुपये के दो स्टाम्प जरूरी बताकर 70 हजार रुपये और मांगे गए।
तब शिक्षिका को समझ आ गया कि उनके साथ ठगी हो रही है और उन्होंने फोन काट दिया। उन्होंने फौरन सायबर हेल्पलाइन पर शिकायत की और अपना बैंक खाता फ्रीज करवाया। फिर विजयदुर्ग पुलिस स्टेशन में शिकायत दी।
पुलिस ने इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया है। आगे की जांच पुलिस निरीक्षक दत्ता भोसले और पुलिस हवालदार प्रशांत जाधव कर रहे हैं।
विजयदुर्ग पुलिस ने लोगों से अपील की है कि खुद को पुलिस अफसर, सीबीआई, सायबर क्राइम ब्रांच या बैंक अधिकारी बताने वालों के फोन पर भरोसा न करें। गिरफ्तारी या केस में फंसाने का डर दिखाकर कोई पैसे मांगे तो रकम न भेजें। ओटीपी, यूपीआई पिन, बैंक खाते या निजी जानकारी किसी को न दें। ठगी हो जाए तो तुरंत 1930 सायबर हेल्पलाइन पर संपर्क करें।