दापोली में वक्फ की 621 गुंठा जमीन बिकने का मामला, 44 लोगों को कारण बताओ नोटिस
दापोली नगर पंचायत चुनाव से पहले वक्फ बोर्ड की जमीन का मामला सामने आया है। महाराष्ट्र राज्य वक्फ मंडल ने संबंधित नेता समेत 44 लोगों को कारण बताओ नोटिस भेजे हैं।
दापोली नगर पंचायत चुनाव से पहले शहर इलाके में वक्फ बोर्ड की जमीन का एक बड़ा मामला सामने आया है। इससे कई लोगों की धड़कनें बढ़ गई हैं। दापोली शहर के बीच के हिस्से में काझी रहमान काझी इसा नाम की वक्फ संस्था की करीब 621 गुंठा कीमती जमीन है। आरोप है कि इस जमीन को गैरकानूनी तरीके से हड़पकर आपसी सौदे में करोड़ों रुपये में बेच दिया गया।
महाराष्ट्र राज्य वक्फ मंडल ने संबंधित नेता समेत कुल 44 लोगों को कारण बताओ नोटिस भेजे हैं। इस कार्रवाई से दापोली के राजनीतिक और सामाजिक दायरे में काफी हलचल मची है।
यह जगह दापोली अर्बन सायन्स कॉलेज के पास है। मूल मालिक काझी रहमान काझी इसा ने 14 सितंबर 1897 को वसीयत के जरिए इसे मुस्लिम समाज के धार्मिक, शैक्षणिक और वैद्यकीय इस्तेमाल के लिए वक्फ के तौर पर दान किया था। 1955-56 में इस संस्था का सार्वजनिक ट्रस्ट के रूप में रजिस्ट्रेशन हुआ। 1995 में वक्फ कानून लागू होने के बाद नियम के मुताबिक यह जगह वक्फ बोर्ड के अधिकार में आनी जरूरी थी।
इसके बावजूद आरोप है कि दापोली इलाके के एक वजनदार सत्ताधारी राजनीतिक नेता ने अपने रिश्तेदारों और करीबियों को साथ लेकर धर्मादाय आयुक्त के अधिकार का गलत इस्तेमाल किया। कागजी उलझन खड़ी करके यह जगह बहुत कम कीमत पर अपने कब्जे में ले ली गई, ऐसा आरोप है। पिछले कुछ सालों में नेता ने जमीन का ट्रांसफर अपने नाम करवा लिया। पहले से चले आ रहे 'उदयनगर' इलाके का नाम बदलकर उनके पार्टनर के नाम पर बिना मंजूरी के 'भाऊ मोहिते नगर' कर दिया गया। स्थानीय नगर पंचायत से मिलीभगत करके प्लॉटिंग की इजाजत ली गई और करोड़ों रुपये में प्लॉट बेचे गए, यह भी कहा गया है।
आरोप यह भी है कि राजनीतिक दबाव की वजह से संबंधित प्रशासनिक विभागों ने इस पूरे गैरकानूनी सौदे से आंखें मूंदे रखीं। स्थानीय जागरूक सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस गड़बड़ी के कागजात वक्फ बोर्ड के सामने रखे, जिसके बाद बोर्ड ने मामले को बहुत गंभीरता से लिया।
महाराष्ट्र राज्य वक्फ मंडल की रजिस्ट्रेशन (क्र. MSBW/RTG/२८४/२०२५) के मुताबिक वक्फ कानून की धारा 51 और 56 का उल्लंघन करके यह संपत्ति हड़पी गई है। बोर्ड की इजाजत के बिना किसी भी वक्फ संपत्ति को बेचना, गिरवी रखना या उस पर कब्जा लेना कानून के तहत पूरी तरह गैरकानूनी है। धारा 52-अ के तहत ऐसे काम के लिए दो साल तक की जेल का प्रावधान है। वक्फ बोर्ड ने 7 दिन के भीतर जवाब देने को कहा है कि यह जमीन वक्फ के कब्जे में क्यों न ली जाए और संबंधित लोगों पर आपराधिक मामले क्यों न दर्ज किए जाएं।
आगे नोटिस पाने वालों की संख्या और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि इस वक्त सत्ताधारी पार्टी के वजनदार लोगों की तरफ से मामले को दबाने की जोरदार कोशिश चल रही है। राजनीतिक आशीर्वाद से हथियाई गई सभी जमीनों की गहरी जांच हो, यह मांग दापोली के नागरिकों में जोर पकड़ रही है। राष्ट्रवादी (शरद पवार गट) के पदाधिकारी जाकीर शेकासन ने भी जिलाधिकारी को लिखित निवेदन दिया है। उन्होंने मामले की जांच करके संबंधित बिल्डर लॉबी पर मामले दर्ज करने की मांग की है।