दापोली में आघारी-भिवबंदर परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट के खिलाफ ग्रामीणों का उग्र विरोध
रत्नागिरी के दापोली तालुका में आघारी और भिवबंदर में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट को लेकर वणौशी और दुमदेव गांव के लोगों ने मंदिर में सभा कर विरोध जताया
रत्नागिरी जिले के दापोली तालुका में आघारी और भिवबंदर इलाके में परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट लगाने की घोषणा के बाद से पूरे कोंकण में हलचल मच गई है। इस प्रस्तावित प्रोजेक्ट को लेकर दापोली तालुका में अब स्थानीय लोगों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है।
वणौशी और दुमदेव, इन दोनों गांवों के ग्रामीणों ने मिलकर एक मंदिर में जरूरी और अहम सभा बुलाई। सभा में मौजूद सभी ग्रामीणों ने एक सुर में मांग रखी कि यह विनाशकारी प्रोजेक्ट उनकी हरी-भरी और प्राकृतिक रूप से समृद्ध जमीन पर किसी भी हालत में नहीं आना चाहिए। ग्रामीणों ने भगवान से भी प्रार्थना की कि यह प्रोजेक्ट उनके इलाके में न आए।
गणेशोत्सव के मौके पर मुंबई से अपने गांव लौटे चाकरमानी लोगों की इस सभा में जबरदस्त भीड़ जुटी थी। इन चाकरमानियों के मजबूत समर्थन से स्थानीय आंदोलन को अब काफी ताकत मिल गई है।
इस सभा ने संगठित विरोध की शुरुआत कर दी है। बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में वणौशी और दुमदेव गांव की ग्रामपंचायत की एक बड़ी महासभा बुलाई जाएगी। इस आगामी महासभा में परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट के खिलाफ सभी जरूरी बातों को पूरा करते हुए आगे की रणनीति तय की जाएगी। अब पूरे दापोली तालुका की नजर इस लड़ाई पर टिकी हुई है। ग्रामपंचायत की महासभा में यह भी तय होगा कि इस विरोध को लेकर आसपास के दूसरे गांवों का क्या रुख रहेगा। दोनों गांवों ने साफ कहा है कि अपनी जमीन, अपना हक बचाने के लिए और कोंकण की प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ किसानों की रोजी-रोटी बचाने के लिए वे परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट का कड़ा विरोध करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित जगह और उससे सटे कई गांवों में स्थानीय किसान पीढ़ियों से आम, काजू, सुपारी, धान की खेती और पारंपरिक मछली पकड़ने का काम करके अपनी जिंदगी चला रहे हैं। ग्रामीणों ने पक्का इरादा जताया कि उनके पुरखों की मेहनत से बनी उपजाऊ खेती, उनका रोजगार और कोंकण की स्वर्ग जैसी खूबसूरती किसी भी हाल में बर्बाद नहीं होने देंगे। जमीन बेचने पर पूरी तरह रोक की बात करते हुए ग्रामीणों ने खुलकर चेतावनी दी कि प्रोजेक्ट के नाम पर जमीनें बेचकर हरे-भरे कोंकण को खत्म करने की साजिश को वे कभी कामयाब नहीं होने देंगे। आगे आंदोलन की दिशा तय करने के लिए जल्द ही एक बड़ी महासभा बुलाई जाएगी।