दादर के शिवाजी पार्क में अभिजीत दिपके की अगुवाई में 'जेल भरो' आंदोलन, भारी पुलिस तैनाती
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने गांधी जयंती पर मुंबई के शिवाजी पार्क में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन किया।
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके की अगुवाई में 2 अक्टूबर 2026 को, यानी महात्मा गांधी जयंती के दिन, मुंबई के दादर में छत्रपति शिवाजी पार्क पर आंदोलन हुआ। यह आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के लिए बुलाया गया था और इसे 'जेल भरो आंदोलन' का नाम दिया गया था।
आंदोलनस्थल पर 15 से 20 लोगों का एक गट पहुंचा और 'जय श्रीराम' के नारे लगाने लगा। पुलिस ने कोई अनहोनी न हो, इसलिए वक्त रहते बीच में आकर नारेबाजी करने वाले इस गट को वहां से दूर ले गई।
अपने भाषण में अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "आज आप सब इतनी बड़ी तादाद में यहां आए हैं। महात्मा गांधी को इससे बड़ी श्रद्धांजलि नहीं हो सकती। यहां मौजूद हर शख्स गांधी है। आरएसएस के लोगों ने महात्मा गांधी को जितना परेशान नहीं किया, उससे ज्यादा हमें परेशान किया है। लेकिन गांधी मरते नहीं। गांधी इस देश की आत्मा हैं। गोडसे जैसे हजारों आएंगे और हजारों जाएंगे। पर इस देश में महात्मा गांधी के विचारों पर, उनके रास्ते पर चलने वाले लोग हैं। उनके विचारों से ही यह देश टिका हुआ है।"
दिपके ने आगे कहा, "गोडसे के विचारों वालों से हम कहना चाहते हैं कि आप महात्मा गांधी को कभी खत्म नहीं कर सकते। एक महामानव आता है और कहता है कि मैं नॉन बायोलॉजिकल हूं। हमें भी समझ आता है कि आप इंसान हो ही नहीं सकते। वे खुद को गांधी और नेहरू से बड़ा दिखाना चाहते हैं, लेकिन यह इस जन्म में तो क्या, अगले सात जन्मों में भी मुमकिन नहीं।" उन्होंने यह भी कहा, "गांधी, नेहरू और आंबेडकर की बराबरी करने की आपकी हैसियत नहीं है। गांधीजी इस देश की आत्मा हैं, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर इस देश की रीढ़ हैं और जवाहरलाल नेहरू इस देश का मन हैं।" इन शब्दों में दिपके ने सरकार की आलोचना की।
दिपके ने यह भी कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सिर्फ जनता को लूटना आता है, उनके पास देश को देने के लिए कुछ नहीं है। नोटबंदी करके उन्होंने जनता को कतारों में खड़ा किया, कोरोना में टीका लेने के लिए कतारों में खड़ा किया, और अब वोटर लिस्ट में नाम आने के लिए भी कतार में लगने को कह रहे हैं।"
आंदोलन की वजह से शिवाजी पार्क इलाके में ट्रैफिक पर असर पड़ा। भीड़ जुटने की आशंका थी, इसलिए इलाके में जाम की हालत बन गई थी। पुलिस ने बैरिकेड लगाए और लोगों की आवाजाही पर पाबंदियां लगाईं। शिवाजी पार्क को संवेदनशील इलाका और 'शांतता क्षेत्र' माना जाता है। स्थानीय लोगों की शिकायत है कि यहां बार-बार होने वाले राजनीतिक आंदोलनों से शांति भंग होती है। उनका कहना है कि तनाव के माहौल से आसपास के दुकानदारों की रोजी पर असर पड़ रहा है, भीड़ और शोर से बुजुर्गों और छोटे बच्चों को बेवजह तकलीफ झेलनी पड़ रही है, और खासकर एम्बुलेंस जैसी इमरजेंसी गाड़ियों को आने-जाने में दिक्कत हो रही है।
मुंबई पुलिस ने 2013 के हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देकर इस आंदोलन की आधिकारिक इजाजत नहीं दी थी। इसके बावजूद कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता वहां जमा हुए, इसलिए इलाके में बड़ी तादाद में पुलिस तैनात की गई थी।