मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:46 IST

छत्रपती संभाजीनगर में 742 स्कूलों की मंजूरी पर सवाल, शालार्थ आईडी जांच तेज

शालार्थ आईडी घोटाले की जांच में छत्रपती संभाजीनगर के 742 स्कूलों के कागज संदिग्ध पाए गए हैं और नोटिस जारी हुए हैं।

छत्रपती संभाजीनगर में 742 स्कूलों की मंजूरी पर सवाल, शालार्थ आईडी जांच तेज
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

छत्रपती संभाजीनगर में फर्जी शालार्थ आईडी घोटाले की जांच के दौरान 742 स्कूलों में गड़बड़ी सामने आई है। इन स्कूलों को अब नोटिस भी भेजे गए हैं। जांच में नेताओं और पूर्व शिक्षा अधिकारियों से जुड़ी संस्थाओं को दी गई मंजूरी के कागज देखे गए। इसमें साफ हुआ कि मंजूरी के पत्र बनावट के थे और उन पर आउटवर्ड नंबर भी फर्जी डाले गए थे।

जिला परिषद के प्राथमिक शिक्षणाधिकारी संघरत्न सरोदे ने सभी स्कूलों को पत्र जारी किया था। इसमें उन्होंने सारे कागजात जमा करने के आदेश दिए थे। मराठवाड़ा समेत राज्य भर के फर्जी शालार्थ आईडी घोटाले की जांच के लिए प्रधान सचिव की टीम बनी थी। एसआईटी की मदद के लिए सभी स्कूलों के रिकॉर्ड जांचे गए थे।

टीम ने जिला परिषद में संच मान्यता, फर्जी तुकड़ी मान्यता और स्कूलों की फर्जी मान्यता के सारे कागज खंगाले। प्रधान सचिव की टीम वहीं डेरा डालकर सारे दस्तावेज देखती रही। संच मान्यता, शिक्षक मंजूरी और फर्जी आउटवर्ड नंबर वाले कागज सामने रखे गए। टीम को शक हुआ तो पुराने रिकॉर्ड मांगे गए, लेकिन वे आपस में मेल नहीं खाए।

बताया जा रहा है कि कुछ स्कूलों में विद्यार्थी थे ही नहीं। फिर भी दूसरे स्कूलों के बच्चों को अपने स्कूल में दिखाकर मंजूरी ली गई थी। मंजूरी मिलने के बाद शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया पूरी की गई और सरकार से करोड़ों रुपये का फंड उठाया गया। चर्चा है कि इसमें पूर्व शिक्षणाधिकारियों के साथ कुछ बड़े नेताओं ने भी फायदा उठाया और सरकार को चूना लगाया।

सेवानिवृत्त शिक्षणाधिकारियों को आगे करके संस्थाओं को तय समय में रिकॉर्ड जमा करने की चेतावनी दी गई थी। कुछ संस्थाचालकों ने रिकॉर्ड जमा किए, पर जांच अधिकारियों ने पाया कि सब बनावटी हैं। इसके बाद असली भागदौड़ शुरू हुई, जिसका मकसद जांच की फाइल ही बंद कराना बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि कुछ संस्थाचालकों ने इसके लिए घर तक गिरवी रख दिए।

चर्चा यह भी है कि संस्थाचालक सेवानिवृत्त शिक्षणाधिकारियों की मदद से मंत्रालय के अधिकारियों से लेकर मंत्रियों तक संपर्क अभियान चला रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि स्नातक मतदार संघ के चुनाव घोषित हो चुके हैं, इसलिए सरकार ऐसे गंभीर मामलों पर फिलहाल चुप है।

742 स्कूलों के अध्यक्ष, सचिव और मुख्याध्यापकों को दिए गए पत्र में उनके दस्तखत के साथ सारा रिकॉर्ड जमा करने को कहा गया है। इसी वजह से घोटाले खुलने की संभावना जताई गई। बताया जा रहा है कि कई गड़बड़ियां सामने आ चुकी हैं और उस वक्त के शिक्षणाधिकारी पूरा मामला मैनेज करने में अपनी ताकत लगा रहे हैं।

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