मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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17:46 IST

चंद्रपूर विसर्जन जुलूस में एक ही पार्टी के अलग-अलग स्वागत मंडप, गुटबाजी सामने आई

चंद्रपूर में गणेश विसर्जन के मौके पर भाजपा, कांग्रेस और शिवसेना गुटों के अलग-अलग मंडपों ने आंतरिक फूट को फिर उजागर किया।

चंद्रपूर विसर्जन जुलूस में एक ही पार्टी के अलग-अलग स्वागत मंडप, गुटबाजी सामने आई
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

चंद्रपूर शहर में 25 सितंबर को गणेश विसर्जन का जुलूस धूमधाम से निकला, लाखों लोगों ने भक्तिभाव से बप्पा को विदाई दी। मगर इस उत्साह के बीच राजनीतिक पार्टियों के भीतर की गुटबाजी भी साफ नजर आई। शहर में इस बार नागरिकों ने कुल छह अलग-अलग स्वागत मंडप देखे, जिनमें भाजपा के दो, कांग्रेस के दो और उद्धव बालासाहेब ठाकरे शिवसेना के दो मंडप शामिल थे।

लोकमान्य तिलक ने गणेशोत्सव की शुरुआत लोगों को एकजुट करने के मकसद से की थी, आज भी यह उत्सव कुछ आधुनिक अंदाज में मनाया जाता है। विसर्जन जुलूस के दौरान राजनीतिक पार्टियां आमतौर पर गणेश मंडलों और नागरिकों के स्वागत के लिए आगे आती हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों से देखा गया है कि एक ही पार्टी के नेता अपनी अलग राजनीतिक ताकत दिखाने के लिए अलग चूल्हा जलाते नजर आते हैं।

चंद्रपुर की राजनीति में विधायक मुनगंटीवार और विधायक जोरगेवार के बीच का विवाद कुछ पुराना है। दोनों नेता जिले के लोगों के सामने कई बार एक ही मंच पर दिख चुके हैं, लेकिन गणेश विसर्जन जुलूस में इनके स्वागत मंडप आसपास ही लगाए गए, और मंडप की परमिशन को लेकर हर साल की तरह इस बार भी विवाद देखने को मिला। दोनों नेताओं के मंडपों में उनके-उनके समर्थक मौजूद थे।

दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी में भी बरसों से गुटबाजी चली आ रही है। वडेट्टीवार और धानोरकर गुट के मंडप भी अलग-अलग लगाए गए। कांग्रेस के वडेट्टीवार गुट के मंडप में उनके समर्थक नेता और नगरसेवक मौजूद थे, जबकि दूसरे स्वागत मंडप में खुद सांसद प्रतिभा धानोरकर अपने समर्थकों और नगरसेवकों के साथ मौजूद थीं।

शिवसेना पार्टी अलग हो गई, सत्ता के लिए कुछ लोगों ने पार्टी का साथ छोड़ दिया, और एक ही पार्टी के दो टुकड़े हो गए। इसके बावजूद टूटी हुई इस पार्टी में भी एकता नजर नहीं आई। शिवसेना और युवासेना के अलग-अलग मंडप देखकर इस बार समर्थकों को भी हैरानी हुई। एक तरफ मनपा में सत्ता में बैठी शिवसेना और दूसरी तरफ युवासेना, दोनों ही स्वागत मंडप इस बार लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। हालांकि सबसे ज्यादा लोग और समर्थक युवासेना के जिला प्रमुख विक्रांत सहारे और महानगर प्रमुख सुरेश पचारे के मंडप की तरफ जाते दिखे।

इस विसर्जन जुलूस में हर धर्म के लोग शामिल हुए और सबने मिलकर गणपति बप्पा को विदाई दी। इस पूरे आयोजन में सबसे खुश गणेश मंडल के अध्यक्ष नजर आए, क्योंकि उन्हें एक ही पार्टी की ओर से दो-दो बार स्वागत-सत्कार स्वीकार करना पड़ा, बस दोनों बार गुट अलग-अलग थे। राजनीतिक गुटबाजी के इस नजारे को देखने के लिए आम लोगों के साथ-साथ पार्टी के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

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