मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
18:23 IST

चंद्रपूर का राजा मंडल के पदाधिकारियों पर केस, मंडल बोला- झूठे हैं, निष्पक्ष जांच हो

चंद्रपूर का राजा गणेश मंडल के पदाधिकारियों पर दर्ज केस को मंडल ने झूठा बताया है, जबकि पुलिस अधीक्षक आयुष नोपानी के मुताबिक बिना परमिशन जुलूस निकालने पर कार्रवाई हुई।

चंद्रपूर का राजा मंडल के पदाधिकारियों पर केस, मंडल बोला- झूठे हैं, निष्पक्ष जांच हो
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

चंद्रपूर: 'चंद्रपूर का राजा' जटपुरा युवक गणेश मंडल के पदाधिकारियों पर पुलिस ने जो केस दर्ज किए हैं, उन्हें मंडल ने झूठा बताया है। अध्यक्ष दीपक बेले, सचिव महेश बेले और कोषाध्यक्ष बाळकृष्ण वैरागडे ने निवेदन देकर मांग की है कि ये केस फौरन रद्द किए जाएं। मंडल ने यह भी कहा है कि रामनगर के पुलिस निरीक्षक की भूमिका की वरिष्ठ स्तर पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। विवाद अनंत चतुर्दशी यानी 25 सितंबर को निकले विसर्जन जुलूस के बाद खड़ा हुआ।

मंडल का कहना है कि जुलूस लंबा खिंच गया था, इसलिए दोपहर में निकलने का फैसला पहले से सूचना देकर लिया गया। पुलिस का पक्ष अब तक साफ नहीं हुआ है। इस मामले में दीपक बेले, महेश बेले और बाळकृष्ण वैरागडे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और चंद्रपूर के जिलाधिकारी को पत्र भेजकर पूरे मामले की वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

मंडल की स्थापना 1974 में हुई थी और उसका इतिहास 52 साल का है। मंडल सामाजिक, धार्मिक और स्वास्थ्य से जुड़े कामों के लिए जाना जाता है। 'चंद्रपूर का राजा' की सबसे बड़ी खासियत 29 फुट की मिट्टी की भव्य मूर्ति है।

इस साल 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन सुबह 11 बजे धूमधाम से विसर्जन जुलूस शुरू हुआ। जटपुरा गेट इलाके में भव्य स्वागत और पारंपरिक आतिशबाजी के बाद जुलूस आगे बढ़ा। मंडल का सीधा आरोप है कि कस्तुरबा रोड पर पुलिस ने जुलूसों को वक्त पर आगे नहीं छोड़ा और ट्रैफिक व पुलिस बंदोबस्त की प्लानिंग में कमी रही, जिससे जुलूस बहुत लंबा खिंच गया।

मंडल के मुताबिक तड़के पदाधिकारी इरई नदी पर बने विसर्जन कुंड देखने गए तो वहां पहले से 30 से 35 बड़ी मूर्तियां विसर्जन के इंतजार में थीं। महानगरपालिका प्रशासन ने बताया कि कुंड की सफाई में करीब दो घंटे लगेंगे। विसर्जन के रास्ते में सेंट मायकेल, चांदा पब्लिक, महर्षी, पोदार और इंदिरा गांधी गार्डन स्कूल हैं और मुख्य बाजार भी है, इसलिए सुबह 7 से दोपहर 2 बजे तक बच्चों, पेरेंट्स और आम लोगों की भारी भीड़ रहती है। यह जाम टालने और प्रशासन का साथ देने के लिए, प्रशासन से बातचीत के बाद मंडल ने दोपहर में निकलने का फैसला किया।

मंडल का दावा है कि इस फैसले की पूर्व सूचना पुलिस विभाग को दोपहर 12:30 और 3:00 बजे दी गई थी। फिर दोपहर 3 बजे मूर्ति शांति से और बिना किसी गंभीर ट्रैफिक रुकावट के विसर्जन स्थल के लिए रवाना हुई। वहां पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना हुई। मूर्ति पर लगे चांदी के गहने और सामान सुरक्षित उतारने में एक घंटा लगा। इसके बाद रात में बड़े अनुशासन के साथ विधिवत विसर्जन पूरा हुआ।

पदाधिकारियों का आरोप है कि प्रशासन को पूरा सहयोग देने वाले और तड़के से संपर्क में रहे मंडल की बात सुने बिना और हकीकत जांचे बिना रामनगर के पुलिस निरीक्षक ने जानबूझकर झूठे केस दर्ज किए। निवेदन में कहा गया है कि पुलिस की इस कार्रवाई से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं और मंडल की बेवजह बदनामी हुई है।

मंडल ने मांग की है कि कस्तुरबा रोड के ट्रैफिक प्लानिंग की खामियों, विसर्जन कुंड पर भीड़ के हालात, पुलिस विभाग को दी गई पूर्व सूचना के फोन रिकॉर्ड और रामनगर के पुलिस निरीक्षक की भूमिका, इन सबकी गहरी और निष्पक्ष जांच हो। साथ ही आगे ऐसी अफरातफरी न हो, इसके लिए महानगरपालिका, पुलिस और गणेश मंडलों के बीच कारगर तालमेल की व्यवस्था बनाने की मांग भी की गई है।

मंडल के आरोपों पर पुलिस अधीक्षक आयुष नोपानी ने कहा कि नियम सबके लिए एक ही थे। 'चंद्रपूर का राजा' का जुलूस निकला, लेकिन उसकी वजह से बाकी गणेश मंडलों का रास्ता रुक गया था। उनके मुताबिक मंडल को 25 सितंबर की परमिशन दी गई थी, मगर उसने अगले दिन बिना परमिशन जुलूस निकाला। नोपानी ने कहा कि केस नियमों के उल्लंघन की वजह से दर्ज हुआ है।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे