चांदवड के राहुड घाट पर थम नहीं रहे हादसे, टोल प्रबंधक और पुलिस ने किया मुआयना
मुंबई-आग्रा महामार्ग (NH-3) के राहुड घाट में लगातार हो रहे हादसों के बाद चांदवड टोल प्रबंधक और पुलिस निरीक्षक अभिजीत सोनवणे ने घाट का जायजा लिया।
मुंबई-आग्रा महामार्ग (NH-3) पर चांदवड तालुका के राहुड घाट में हादसों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा। घाट में तेज उतार और मोड़ हैं, इसलिए यहां बार-बार हादसे होते हैं। इसी वजह से इस घाट को अब "मौत का जाल" कहा जाने लगा है।
इन हादसों में कई लोगों की जान जा चुकी है। इसे लेकर लोगों में काफी गुस्सा है। उनका कहना है कि हादसों की यह कड़ी अब रुकनी चाहिए और इसके लिए स्थायी सुरक्षा इंतजाम किए जाएं।
उमराणे प्रेस क्लब और नागरिकों की तरफ से चांदवड टोल प्रशासन को इस बारे में निवेदन दिया गया था। साथ ही रास्ता रोको आंदोलन की चेतावनी भी दी गई थी।
मांगों में घाट में जगह-जगह स्पीड ब्रेकर, सीसीटीवी कैमरे, रिफ्लेक्टर, दिशा बताने वाले बोर्ड और सुरक्षा कठघरे लगाना शामिल है। लोगों ने यह भी कहा है कि घाट से मुश्किल हालात में गुजरने वाली गाड़ियों पर सख्त नियंत्रण रखा जाए। इसके अलावा सड़क की तकनीकी जांच करवाकर स्थायी सुरक्षा नक्शा बनाने की मांग भी की गई है।
अब चांदवड टोल प्रबंधक और पुलिस निरीक्षक अभिजीत सोनवणे ने राहुड घाट का मुआयना किया। इस दौरान देखा गया कि घाट में किन जगहों पर हादसे का खतरा ज्यादा है और किन हिस्सों में गाड़ियों की रफ्तार काबू में रखने की जरूरत है। यह भी देखा गया कि हादसा होने पर तुरंत मदद कैसे पहुंचाई जा सकती है।
चांदवड टोल प्रबंधकों ने कहा कि जो मेजर लेने थे, वे लिए जा चुके हैं। कुछ जगहों पर बोर्ड बढ़ाए जाएंगे। स्पीड ब्रेकर की ऊंचाई कुछ जगह कम हो गई है, उसे पूरा किया जाएगा। उनके मुताबिक राहुड घाट में हादसों का ज्यादा प्रमाण हैवी ट्रकों की वजह से है और इस पर कैंपेन चलाया जाएगा।
पुलिस निरीक्षक अभिजीत सोनवणे ने बताया कि तहसीलदार और अधिकारियों के साथ चर्चा हुई है। हादसे कैसे कम किए जा सकते हैं, इस पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि इसमें स्थानीय लोगों के दिए सुझावों पर भी विचार किया जाएगा।