भिवंडी सामूहिक दुष्कर्म केस: नरेंद्र पवार की अग्रिम जमानत पर फैसला 28 सितंबर तक सुरक्षित
बापगांव फार्महाउस केस में पूर्व भाजपा विधायक नरेंद्र पवार की अग्रिम जमानत अर्जी पर भिवंडी अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
भिवंडी तालुका के बापगांव इलाके में एक फार्महाउस पर एक महिला के साथ कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किए जाने के मामले में पूर्व भाजपा विधायक नरेंद्र पवार की अग्रिम जमानत अर्जी पर गुरुवार को भिवंडी अतिरिक्त सत्र न्यायालय में सुनवाई हुई। सरकारी पक्ष और बचाव पक्ष दोनों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अर्जी पर फैसला 28 सितंबर तक सुरक्षित रख दिया।
पडघा पुलिस स्टेशन में नरेंद्र पवार और बर्खास्त पुलिसकर्मी शैलेश पाटील के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म के साथ-साथ शस्त्र कानून की धाराओं में भी केस दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता महिला के आरोपों के मुताबिक यह घटना बापगांव स्थित एक फार्महाउस पर हुई थी। पवार ने सारे आरोपों को झूठा बताते हुए खारिज किया है। अदालत में अभी तक ये आरोप साबित नहीं हुए हैं।
पडघा पुलिस ने अग्रिम जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कोर्ट को बताया कि मामले से जुड़े सबूत जुटाने और जब्त करने के लिए आरोपियों की गिरफ्तारी जरूरी है। पुलिस ने बताया कि फार्महाउस पर लगे सीसीटीवी कैमरों का डीवीआर गायब है, जिसे बरामद करना बाकी है। साथ ही घटना में कथित तौर पर इस्तेमाल हुई कार को भी जब्त करना जरूरी बताया गया।
पवार के वकील ने कोर्ट में चैट रिकॉर्ड पेश कर आरोपों का खंडन किया और दावा किया कि शिकायतकर्ता महिला के साथ उनके रिश्ते सहमति से बने थे। वकील के मुताबिक बाद में महिला ने कुछ मांगें रखीं जो पूरी नहीं हो सकीं। बचाव पक्ष का यह भी दावा है कि घटना के बाद वह महिला गणपति दर्शन के लिए पवार के घर आई थी, और जब उसकी मांगें पूरी नहीं हुईं तब केस दर्ज कराया गया।
बचाव पक्ष ने यह आरोप भी लगाया कि महिला ने पवार को बाद में फंसाने की नीयत से वीडियो बनाया था, और अगर उसे वीडियो बनाने का वक्त मिला तो उसी वक्त वह मदद के लिए पुलिस या किसी और को बुला सकती थी। जांच अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि फार्महाउस का गेट रिमोट से चलता था और महिला को पता था कि वह वहां से भाग नहीं सकती। जांच अधिकारी के मुताबिक महिला ने मदद के लिए फोन करने की कोशिश की थी, लेकिन फार्महाउस पर नेटवर्क न होने की वजह से मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं था।
सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों के अलावा पवार और पाटील पर शस्त्र कानून की धारा 3 और 25 के तहत भी केस दर्ज है। पवार ने गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा के साथ अग्रिम जमानत की मांग की थी। बुधवार को कोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था और जांच अधिकारी व शिकायतकर्ता को नोटिस भेजकर जवाब मांगा था।