अनघा ठाकूर बोलीं: आज की औरत खुद के साथ पूरे परिवार को आगे ले जाती है
कलर्स मराठी की सीरियल 'मोहिनी' की अभिनेत्री अनघा ठाकूर ने नवरात्रि के मौके पर दुर्गा शक्ति, अपने सफर और इंडस्ट्री में बदलाव पर खुलकर बात की।
कलर्स मराठी की सीरियल 'मोहिनी' से दर्शकों के सामने आईं अभिनेत्री अनघा ठाकूर थोड़े ही वक्त में लोगों की पसंदीदा बन गई हैं। गालों पर पड़ने वाले डिंपल और अपनी प्यारी एक्टिंग की वजह से इन दिनों हर जगह उनकी चर्चा है। नवरात्रि के मौके पर उनसे खुलकर बातचीत हुई और जाना गया कि उनके लिए दुर्गा शक्ति का असल मतलब क्या है।
अनघा ने फाइनेंशियल एनालिस्ट के तौर पर काम शुरू किया था और बाद में ऐसे क्षेत्र में आईं जहां कोई गारंटी नहीं होती। इस सफर के बारे में उन्होंने हंसते हुए कहा कि नौकरी के दिनों में उन्हें FOMO नहीं था। रुपारेल कॉलेज में पढ़ते हुए थिएटर और डांस किया, इसलिए इस क्षेत्र में कुछ करने का मन था। लेकिन कोरोना आया और अचानक सब थम गया। उस वक्त सोशल मीडिया पर खूब रौनक थी, पर उन्हें लगता था कि वे कुछ नहीं कर रहीं। पोस्ट ग्रेजुएशन चल रहा था और ऑडिशन कैसे देना है, यही सब दिमाग में घूमता रहता था। उन्होंने 5 साल नौकरी की, पर कला के क्षेत्र में कुछ न कर पाने की तकलीफ होती रही।
अनघा के मुताबिक वे बहुत आशावादी हैं। नौकरी करते हुए भी वे कॉन्टैक्ट ढूंढती रहीं, ऑडिशन और प्रोफाइल की जानकारी लेती रहीं और सोशल मीडिया पर प्रोडक्शन हाउस को डीएम करके खूब कोशिश की। 2-3 साल की कोशिश के बाद ऑडिशन दिए, फिर उन्हें मोहिनी की भूमिका मिली और मेहनत रंग लाई।
टर्निंग पॉइंट के बारे में उन्होंने बताया कि श्रावणक्वीन प्रतियोगिता उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट थी। इसके लिए 15-20 दिन चाहिए थे, पर नौकरी के साथ प्रतियोगिता की जगह जाकर रहना मुमकिन नहीं था। 25 साल की उम्र में उन्होंने तय किया कि कुछ भी हो, हिस्सा लेना है, और ऑफिस में सिक लीव डालकर चली गईं। 400 लड़कियों के ऑडिशन में से 16 में उनका चयन हुआ। इसके बाद रैंप वॉक और 4 इंच की हील्स पहनकर चलना, सब कुछ नया था। सारी लड़कियां टैलेंटेड थीं और इनसिक्योरिटी भी थी, यह वे नकारती नहीं। प्रतियोगिता के दौरान 5-6 हिल्स पहनकर चलना शारीरिक तौर पर थका देने वाला था, पर एक ऊर्जा थी और जीतने की जिद थी, उन्होंने 100 प्रतिशत योगदान दिया। आखिरी सवाल था कि आज की आधुनिक स्त्री कैसी है, अपने शब्दों में बताइए। उन्होंने खुद से जोड़कर जवाब दिया, जजों को पसंद आया और वे विजेता बनीं।
मोहिनी में अनघा इन दिनों तलवारबाजी और दांडपट्टा जैसे रोमांचक सीन कर रही हैं। उनका कहना है कि फाइट सीक्वेंस, तलवारबाजी, दांडपट्टा और ढालें बिल्कुल अलग अनुभव हैं और इसकी तैयारी उन्हें बेसिक चीजों से करनी पड़ी। अक्टूबर की गर्मी से भी परेशानी हुई और प्रैक्टिस में हाथ में काफी चोट लगी। मेहनत की आदत नहीं होती, पर उन्हें मजा बहुत आया और उन्होंने जमकर मेहनत की। सुबह 9.30 बजे शुरू करके 3-4 बजे तक यही चलता रहता था। उन्हें बहुत गर्व हुआ, रोंगटे खड़े हो गए। जिजाऊ, ताराराणी और झांसी की रानी आंखों के सामने आ गईं। उनकी बड़ी इच्छा है कि असल जिंदगी में ऐसी भूमिका मिले और कोई ऐतिहासिक स्त्री किरदार निभाने का मौका मिले।
Gen Z होने के नाते आज की दुर्गा के बारे में उनकी राय पूछी गई तो उन्होंने बिना रुके कहा कि आज की लड़की स्वाभिमान जरूर संभालती है और अपने सपने पूरे करने को अहमियत देती है। उनके मुताबिक पहले की महिलाएं खुद को पीछे रखकर कहती थीं कि पति और बेटा आगे बढ़ें। लेकिन आज की स्त्री खुद के साथ परिवार को भी संभालने वाली है और इसमें कुछ गलत नहीं। हर लड़की को आगे बढ़ने और खुद को साबित करने का मौका मिलना ही चाहिए।
संतुलन के सवाल पर अनघा ने बताया कि शुरुआत में शारीरिक और मानसिक तौर पर बहुत थकान हुई, क्योंकि आदत नहीं थी। 8-9 महीनों से वे 12 घंटे की शिफ्ट कर रही हैं। 1-2 हफ्ते खड़े रहने से पैरों में छाले आते थे, अब शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से आदत हो गई है। काम से ही उन्होंने सीखा कि खुद को कैसे संभालना है और संतुलन कैसे रखना है। शुरू में खुद का ख्याल रखने का वक्त नहीं मिला और 6 महीने कोई छुट्टी नहीं ली। अब सब आसान लगता है। मोहिनी कैसी है, यह समझ आ गया है, इसलिए अब वे अपने अंदर की अनघा का भी ख्याल रखने लगी हैं और मम्मी-पापा को भी वक्त दे पा रही हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वे सारा प्लानिंग करती हैं और साल में एक बार हेल्थ चेकअप होना ही चाहिए। प्लानिंग और मैनेजमेंट जरूरी है। मोहिनी में भी यही बताया गया है कि हम ही सारी दुनिया का बोझ उठाए घूम रहे हैं, इसलिए सबको साथ आकर काम करना चाहिए, और यह वे मोहिनी के किरदार से ही सीख रही हैं।
इंडस्ट्री में एक स्त्री और दुर्गा के तौर पर क्या बदलना चाहिए, इस पर उन्होंने सादगी से कहा कि वे बिल्कुल नई हैं। इस क्षेत्र में पीएफ, मेडिक्लेम जैसा कुछ नहीं है। रोज सीरियल कर रहे हैं तो यह एक तरह से नौकरी ही हुई। ऑफिस में सिक्योरिटी होती है, पर इंडस्ट्री में ऐसा कुछ नहीं। बाकी सब सोचना खुद को ही पड़ता है। कॉर्पोरेट और इंडस्ट्री के बीच यह फर्क है और उन्हें दिल से लगता है कि यह बदलना चाहिए।
अन्याय सहन न करना दुर्गा का शक्ति रूप है। अपनी जिंदगी का ऐसा अनुभव बताते हुए अनघा ने कहा कि वे 15 साल की उम्र से मुंबई में अकेली रह रही हैं। एक बार माटुंगा में रहने आई थीं, बिल्डिंग यशवंत नाट्यगृह के बगल में थी। टीशर्ट और ट्रैकपैंट पहनकर ही नीचे बिस्किट लाने गईं। एक आदमी देख रहा था, तब उन्होंने ध्यान नहीं दिया। लेकिन अचानक वह पीछा करते हुए आया और वे घबरा गईं। नशे में उस आदमी को उन्होंने जोर से धक्का दिया और चिल्लाईं। वहीं उसे पकड़कर मार सकती थीं, पर तब सूझा नहीं। इसलिए हर लड़की को शारीरिक और मानसिक तौर पर बेहद मजबूत होना चाहिए। किसी भी पल दुर्गा का रूप लेना पड़ सकता है।
उनकी जिंदगी की दुर्गा कौन है, इस पर उन्होंने झट से कहा कि दुर्गा तो बहुत हैं, पर वे मां का नाम लेंगी, क्योंकि मां बहुत आशावादी और सकारात्मक हैं और वही उनमें भी आया है। काम में कोताही नहीं करनी है। मां का काम के प्रति प्यार देखकर उन्हें भी ऐसे ही काम करना है। उनके लिए मां दुर्गा हैं। दुर्गा बनने के लिए कुछ अलग करने की जरूरत नहीं है, मस्त रहो और हमेशा स्ट्रॉन्ग रहो, यह संदेश फैंस को देकर अनघा ने बातचीत खत्म की।