अहिल्यानगर जिला बैंक चुनाव में 541 फॉर्म उठे, राम शिंदे बोले- सबको भरोसे में लिए बिना फैसला कैसे
अहिल्यानगर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव में सदस्यों ने 541 उम्मीदवारी फॉर्म उठाए हैं। विधान परिषद के सभापति राम शिंदे ने बिनविरोध चुनाव की कोशिशों पर सवाल उठाए।
अहिल्यानगर जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक का चुनाव बिनविरोध कराने की वरिष्ठ नेताओं की कोशिशों पर पानी फिरने के आसार बन गए हैं। एक तरफ ऊपर के स्तर पर बिनविरोध चुनाव के लिए राजनीतिक जोड़तोड़ चल रही है। दूसरी तरफ बैंक के सदस्यों ने पूरे 541 उम्मीदवारी फॉर्म उठा लिए हैं। इससे इन कोशिशों को बड़ा झटका लगा है।
इसी मामले में विधान परिषद के सभापति राम शिंदे ने सीधे नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल किया, "सबको भरोसे में लिए बिना ऐसा फैसला कैसे लिया जा सकता है?"
संगमनेर में हुई बैठक में बिनविरोध चुनाव पर चर्चा हुई थी। इस बारे में बोलते हुए शिंदे ने कहा कि उन्हें मनाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। उनके मुताबिक इस पर वरिष्ठ नेताओं को ही साफ बोलना चाहिए। शिंदे ने कहा कि संगमनेर में बैठक हुई और उसमें बिनविरोध का फैसला हुआ, ऐसा कहा जा रहा है, लेकिन सदस्यों का रुख अलग है। उन्होंने पूछा कि अगर बिनविरोध पर सहमति बन चुकी थी, तो 541 जितने बड़े पैमाने पर सदस्यों ने फॉर्म क्यों लिए।
शिंदे ने यह भी कहा कि महायुति के प्रमुख नेताओं के रुख को लेकर अभी तक तस्वीर साफ नहीं है। उनके मुताबिक पालकमंत्री का रुख भी अब तक साफ नहीं हुआ है। शिंदे ने बताया कि राधाकृष्ण विखे पाटील ने कहा है कि उन्हें इस बैठक की कोई जानकारी नहीं थी। शिंदे के शब्दों में, एक तरफ शिवसेना बैठकें कर रही है, तो दूसरी तरफ बाकी घटक दलों को उसकी खबर ही नहीं है। सबकी बातों में एकसूत्रता नहीं रही। ऐसे में सभापति के तौर पर वे क्या रुख लें, यह सवाल भी उन्होंने उठाया।
शिंदे ने आगे बताया कि संगमनेर की बैठक के बाद उन्हें राजस्व मंत्री बालासाहेब थोरात, पूर्व मंत्री शंकरराव गडाख और विवेक कोल्हे के फोन आए थे। लेकिन उसके बाद इस बारे में कोई विस्तृत चर्चा या फैसला नहीं हुआ है।
तीन अपत्यों के नियम के बारे में पूछे जाने पर शिंदे ने कहा, "सभी बातों पर अच्छी तरह सोच-विचार करके ही मैंने फॉर्म लिया है और वह जरूर भरा जाएगा।" इसके साथ उन्होंने सहकारी क्षेत्र में अपने पहले चुनाव के संकेत दिए। जिले के कई चीनी कारखानों पर करोड़ों रुपये के कर्ज और बकाया के मुद्दे पर शिंदे ने कहा कि वे सहकारी क्षेत्र में पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं और किसी भी संस्था के बकायादार नहीं हैं। उनका कहना था कि जिनके कारखाने पर कर्ज है, उन्हीं से इस बारे में पूछा जाए, और अंतिम फैसला चुनाव निर्णय अधिकारी ही लेंगे।
जिला बैंक की अहमियत बताते हुए शिंदे ने कहा कि बैंक का विस्तार बड़ा है और जमा की रकम बहुत बड़ी है। उनके मुताबिक बैंक का कामकाज अच्छा चल रहा है, और जमाकर्ताओं व किसानों के हित की रक्षा करना सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सूखे के हालात में सरकार ने मदद की तैयारी दिखाई है, जिसका बड़ा फायदा बैंक को और इस तरह सदस्यों को होगा।
एक तरफ स्थापित नेताओं की तरफ से बिनविरोध चुनाव के लिए बैठकें और हलचलें चल रही हैं। दूसरी तरफ सदस्यों में से फॉर्म उठाने का सिलसिला लगातार बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में वरिष्ठ नेता क्या रास्ता निकालते हैं और राम शिंदे का अगला कदम क्या रहता है, इस पर पूरे अहिल्यानगर जिले की नजर है।