आत्मसमर्पित नक्षली कमांडर का कबूलनामा: मुंबई-नागपुर समेत राज्य के स्कूल-कॉलेजों में भर्ती का जाल
महाराष्ट्र पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने वाले नक्षली कमांडर विकास उर्फ अनिल रामास्वामी मेकला ने बताया कि कैसे उसने पढ़ाई के बहाने राज्य के अलग-अलग शहरों में रहकर युवाओं को संगठन से जोड़ा।
जंगल में नक्षलवाद भले ही कमजोर पड़ गया हो, लेकिन महाराष्ट्र के शहरी इलाकों में यह आंदोलन सालों से चुपचाप अपनी जड़ें जमाता रहा है। यह दावा किसी और का नहीं, बल्कि पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर चुके एक नक्षली कमांडर का अपना कबूलनामा है। नक्षलियों के "एमएमसी" यानी महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जोन के प्रमुख रहे विकास उर्फ अनिल रामास्वामी मेकला ने कुछ महीने पहले महाराष्ट्र पुलिस के सामने सरेंडर किया था। सरेंडर के बाद हुई पूछताछ में उसने कई चौंकाने वाली बातें बताईं। उसका कहना है कि स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई के नाम पर वह महाराष्ट्र के तमाम बड़े शहरों में रहा, और मुंबई में कॉलेज के दिनों में उसने कई युवाओं को नक्षली आंदोलन की तरफ मोड़ने का काम किया।
विकास का असली नाम विनोद रामास्वामी मेकला है और वह तेलंगाना के चिंताकुंटा गांव का रहने वाला है। उसके मां-बाप दोनों पहले से ही सशस्त्र नक्षली आंदोलन से जुड़े थे, इसलिए विकास सिर्फ चार साल की उम्र से ही जंगल में नक्षलियों के बीच रहने लगा था। बचपन में वह गणपति जैसे सबसे बड़े नक्षली नेता की गोद में खेलते हुए बड़ा हुआ और अपने मां-बाप के साथ दलम में रहा। जब स्कूल जाने की उम्र आई तो उस वक्त के नक्षली नेतृत्व ने तय किया कि विकास को महाराष्ट्र के शहरों में भेजकर पढ़ाया जाए। इसी योजना के तहत उसने राज्य के अलग-अलग शहरों में रहकर प्राइमरी, सेकंडरी और उच्च शिक्षा हासिल की।
विकास की प्राइमरी पढ़ाई छत्रपती संभाजीनगर में हुई। जिन नक्षलियों के छुपे ठिकानों में रहकर वह वहां पढ़ रहा था, उनमें से कुछ पकड़े गए, जिससे उसकी पढ़ाई भी बीच-बीच में रुकती रही। फिर भी कभी जिला परिषद के स्कूल में तो कभी प्राइवेट स्कूल में रहकर उसने चौथी तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद पांचवीं से दसवीं तक की पढ़ाई कोल्हापुर के राजारामपुरी इलाके के सरकारी स्कूल में हुई। उसी दौर में कोल्हापुर में नक्षलवाद के समर्थन में कुछ बैनर लगे, जिसकी वजह से जिनके साथ वह रह रहा था उनमें से कुछ लोग पुलिस जांच में फंस गए। इस वजह से उसे स्कूल बदलना पड़ा।
ग्यारहवीं से सेकंड ईयर तक की कॉलेज पढ़ाई मुंबई के रामनिरंजन झुनझुनवाला कॉलेज में हुई। इस दौरान विकास घाटकोपर पूर्व इलाके में अपने कुछ साथियों के साथ रहता था। उसका कहना है कि जवानी की उम्र में नक्षलियों ने उसे यह जिम्मेदारी दी कि वह हमखयाल युवाओं को इकट्ठा करे और उनकी मानसिकता भांपकर उन्हें धीरे-धीरे सशस्त्र नक्षलवाद की तरफ ले आए। जिन छात्रों में सरकार के खिलाफ गुस्सा दिखता था, उन्हें आराम से आंदोलन की तरफ लाने का काम वह करता था, ऐसा उसने कबूल किया। मुंबई में युवाओं को जोड़ने के इस काम में विकास कामयाब रहा, तो उसका दावा है कि नक्षलियों ने शायद पहली बार अपने संविधान में बदलाव करते हुए संगठन में कोई भी पद पाने की उम्र 18 साल से घटाकर 16 साल कर दी, और यह बदलाव सिर्फ उसके मुंबई वाले काम की वजह से किया गया। इसके बाद 16 साल की उम्र में उसे नक्षलियों की "मुंबई एरिया कमिटी" में जगह दी गई।
इसी बीच 2001 में जंगल में सक्रिय उसके पिता सायन्ना उर्फ भास्कर रामास्वामी और मां गंगालक्ष्मी रामास्वामी ने तेलंगाना में पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। मां-बाप की पूछताछ से कहीं यह राज न खुल जाए कि वह मुंबई में पढ़ाई कर रहा है और पुलिस उसे पकड़ न ले, इस डर से विकास ने 2002 में मुंबई छोड़ दी। उसकी अपनी जानकारी के मुताबिक, मुंबई के बाद कुछ समय के लिए वह नागपुर में भी सक्रिय रहा।