आठवले बोले: 14 साल से साथ हैं, फिर भी महाराष्ट्र की सत्ता में RPI को हिस्सा नहीं मिला
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने अहिल्यानगर में कहा कि महायुति में RPI को गृहीत माना जा रहा है, और मुख्यमंत्री से विधान परिषद, महामंडल और समितियों में हिस्सा मांगा।
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) गुट के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने महाराष्ट्र की महायुति सरकार में अपनी पार्टी को नजरअंदाज किए जाने पर सख्त रुख अपनाया है। अहिल्यानगर में उन्होंने खुलकर नाराजगी जताई। आठवले का कहना है कि RPI पिछले 14 साल से भाजपा और शिवसेना के साथ है, फिर भी महाराष्ट्र की सत्ता में पार्टी को जितना हिस्सा मिलना चाहिए, उतना नहीं मिल रहा।
पत्रकारों से बात करते हुए आठवले ने कहा, "मुझे केंद्र में मंत्री पद मिला, यह अलग बात है। लेकिन जिन कार्यकर्ताओं ने मुझे मंत्री बनाया, उन रिपब्लिकन कार्यकर्ताओं को भी महाराष्ट्र में सत्ता का हिस्सा मिलना चाहिए।" उनके मुताबिक कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के दौर में RPI को साथ जरूर मिला था, पर अब सहयोगी पार्टी के तौर पर उसे गृहीत माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा और शिवसेना के साथ होने के बावजूद पार्टी को महाराष्ट्र में एक भी मंत्री पद नहीं मिला है।
आठवले ने मुख्यमंत्री के सामने कुछ मांगें रखी हैं। पहली मांग यह है कि राज्यपाल द्वारा नियुक्त होने वाली विधान परिषद की 5 खाली सीटों में से 1 सीट RPI को दी जाए। दूसरी मांग के तहत RPI को कम से कम दो राज्यस्तरीय महामंडलों के अध्यक्ष पद और कार्यकर्ताओं के लिए 40 से 50 सदस्य पद चाहिए। तीसरी मांग स्थानीय समितियों को लेकर है। उनका कहना है कि हर जिले की DPDC समितियों, तालुका समितियों और 'एसओ' में कार्यकर्ताओं को मौका मिले, और इसके लिए पालक मंत्रियों को साफ आदेश दिए जाएं।
शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस के रुख पर बोलते हुए आठवले ने कहा कि यह समझना गलत है कि RPI सिर्फ भाजपा के कोटे में है। उनके शब्दों में रिपब्लिकन पार्टी महायुति का एक स्वतंत्र और अहम घटक दल है। उन्होंने 2012 की बालासाहेब ठाकरे की बात भी याद की। आठवले के मुताबिक बालासाहेब ने भरोसा जताया था कि शिवशक्ति और भीमशक्ति साथ आईं तो महाराष्ट्र में बड़ा सामाजिक बदलाव होगा। इसलिए, आठवले बोले, उनका सम्मान होना ही चाहिए।
स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव पर आठवले ने कहा कि चार-चार वार्डों वाली प्रभाग पद्धति से छोटी पार्टियों का बड़ा नुकसान हो रहा है और कार्यकर्ताओं के लिए अपने दम पर जीतना मुश्किल हो गया है। उनका कहना था, "बड़ी पार्टियों के लिए यह पद्धति ठीक होगी, पर छोटी पार्टियों का ख्याल करके पहले जैसी 'एकल वार्ड पद्धति' फिर से लागू की जाए।" यह मांग उन्होंने मुख्यमंत्री और भाजपा नेता रवींद्र चव्हाण के सामने रखी है।
राष्ट्रीय पार्टी के दर्जे पर आठवले ने बताया कि पार्टी की शाखाएं देश के 28 राज्यों और 8 केंद्रशासित प्रदेशों में फैली हैं, और नागालैंड व मणिपुर में RPI मान्यता प्राप्त पार्टी है। उन्हें भरोसा है कि दो और राज्यों में मान्यता मिल गई तो चुनाव आयोग RPI को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दे देगा। फिलहाल महायुति में सीटों और सत्ता के बंटवारे पर चर्चा चल रही है, और आठवले के इस रुख से प्रमुख दलों पर RPI को सत्ता में हिस्सा देने का राजनीतिक दबाव बना है।