मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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20:27 IST

23 सितंबर: सांकेतिक भाषा का अंतरराष्ट्रीय दिन, साथ ही इतिहास की बड़ी घटनाएं

हर साल 23 सितंबर को दुनियाभर में सांकेतिक भाषा दिवस मनाया जाता है, साथ ही इस तारीख से जुड़ी देश-दुनिया की कई घटनाएं भी दर्ज हैं।

23 सितंबर: सांकेतिक भाषा का अंतरराष्ट्रीय दिन, साथ ही इतिहास की बड़ी घटनाएं
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

हर साल 23 सितंबर को पूरी दुनिया में इंटरनेशनल डे ऑफ साइन लैंग्वेजेज यानी सांकेतिक भाषा का अंतरराष्ट्रीय दिन मनाया जाता है। इस दिन को मनाने के पीछे मकसद यह है कि सांकेतिक भाषा इस्तेमाल करने वाले लोगों को समाज बेहतर तरीके से समझे, उन्हें समाज में बराबरी का हक मिले और सांकेतिक भाषा की अहमियत को दुनिया भर में उजागर किया जाए। यह दिन संयुक्त राष्ट्र संघ ने घोषित किया था और 2018 से इसे दुनियाभर में मनाया जा रहा है।

सांकेतिक भाषा बहरे और कर्णबधिर लोगों के लिए बातचीत का एक अहम जरिया है। यह सिर्फ संवाद का माध्यम भर नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और अधिकारों का प्रतीक भी है। इस दिन को लेकर अलग-अलग कार्यक्रम और पहल आयोजित की जाती हैं, जिनका मकसद सांकेतिक भाषा का प्रचार करना और उसकी अहमियत को लेकर जागरूकता फैलाना होता है। इस दिन से समाज में सबको साथ लेकर चलने की भावना मजबूत होती है और हर किसी को अपने अधिकारों का एहसास होता है।

23 सितंबर की तारीख देश और दुनिया के इतिहास में भी कई घटनाओं के लिए जानी जाती है। 1803 में दूसरे एंग्लो-मराठा युद्ध के दौरान ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और मराठा साम्राज्य के बीच असाईची लड़ाई हुई थी। 1846 में अर्बेन ले वेरिए ने नेप्च्यून ग्रह की खोज की, जो गणितीय गणना से खोजा गया पहला ग्रह था। 1884 में महात्मा फुले के साथी राव बहादुर नारायण लोखंडे ने मिल मजदूरों के संगठन बॉम्बे मिल हैंड्स एसोसिएशन की स्थापना की। 1905 में पहले साथ रहे नॉर्वे और स्वीडन ने कार्लस्टाड संधि के जरिए अलग होने का फैसला किया। 1908 में कनाडा में अल्बर्टा विश्वविद्यालय की स्थापना हुई। 1932 में हेजाज और नेज्द के राज्य को सऊदी अरब का राज्य नाम दिया गया। 1983 में सेंट किट्स एंड नेविस संयुक्त राष्ट्र में शामिल हुआ। 2002 में मोजिला फायरफॉक्स ब्राउजर का पहला वर्जन रिलीज हुआ था।

इस तारीख को कई जानी-मानी हस्तियों का जन्म भी हुआ। 1215 में मंगोल सम्राट कुबलई खान, 1771 में जापानी सम्राट कोकाकु, 1861 में बॉश कंपनी के संस्थापक रॉबर्ट बॉश, 1903 में समाजवादी नेता और स्वतंत्रता सेनानी यूसुफ मेहर अली, 1908 में देशभक्त और हिंदी साहित्यकार रामधारी सिंह दिनकर, 1911 में भारतीय भौतिकशास्त्री रैप्पल संगमेश्वर कृष्णन, 1914 में ब्रुनेई के राजा उमर अली सैफुद्दीन तृतीय, 1915 में नोबेल पुरस्कार विजेता अमेरिकी भौतिकशास्त्री क्लिफर्ड शुल, 1917 में भारतीय रसायनशास्त्री असीमा चटर्जी, 1919 में पुणे विश्वविद्यालय के कुलगुरु और शिक्षाविद देवदत्त दाभोलकर, 1920 में नाट्य लेखक और अभिनेता भालबा केलकर, 1935 में अभिनेता प्रेम चोपड़ा, 1943 में अभिनेत्री तनुजा, 1950 में समाजशास्त्री डॉ. अभय बंग, 1952 में क्रिकेटर अंशुमान गायकवाड़ और 1965 में अभिनेत्री अलका कुबल का जन्म हुआ।

इसी तारीख पर कई हस्तियों का निधन भी दर्ज है। 1858 में मराठों का इतिहास लिखने वाले ब्रिटिश अधिकारी ग्रांट डफ, 1870 में फ्रेंच लेखक और इतिहासकार प्रॉस्पर मेरिमी, 1882 में जर्मन रसायनशास्त्री फ्रेडरिक वोहलर, 1939 में आधुनिक मनोविज्ञान के जनक सिग्मंड फ्रॉयड, 1964 में नाटककार भार्गवराम विठ्ठल वरेरकर, 1999 में मराठी फिल्म व विज्ञापन निर्माता गिरीश घाणेकर, 2004 में वैज्ञानिक और परमाणु ऊर्जा आयोग के चौथे अध्यक्ष डॉ. राजा रामन्ना, 2012 में जादूगर कांतिलाल गिरधारीलाल लाल और 2015 में भारतीय संन्यासी व दार्शनिक दयानंद सरस्वती का निधन हुआ था।

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