शिंदे बोले, धर्मसत्ता राजसत्ता से बड़ी; संतों के आशीर्वाद से कुंभ सफल होगा
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने त्र्यंबकेश्वर के संत सम्मेलन में कुंभ की तैयारियों, पुनर्वास और शिवसेना की ओर से भोजन व्यवस्था की घोषणा की।
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उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि राजसत्ता से धर्मसत्ता बड़ी है। उनके मुताबिक संतों के चरणों में नतमस्तक होकर राज्य चलाना ही उनका संस्कार है। वे त्र्यंबकेश्वर में आयोजित संत सम्मेलन में बोल रहे थे।
शिंदे ने भगवान त्र्यंबकेश्वर और गोदावरी माई को वंदन किया और देशभर से आए संत-महंतों का अभिवादन किया। उन्होंने कहा, "साधु-संत आते हैं घर, वही दिवाली दशहरा", यानी आज संतों की वजह से असली दिवाली मन रही है। उनका कहना था कि यह सिर्फ राजनीतिक या सामाजिक सम्मेलन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का उत्सव है।
शिंदे ने बताया कि बालासाहेब ठाकरे और धर्मवीर आनंद दिघे ने उन्हें सिखाया कि राजनीति समाजसेवा, राष्ट्रसेवा और राष्ट्ररक्षा के लिए की जाती है। उन्होंने साफ किया कि हाथ में राजसत्ता हो, तब भी अध्यात्म और धर्मसत्ता बड़ी होती है।
उन्होंने कहा कि संत ज्ञानेश्वर, नामदेव, एकनाथ, तुकाराम और समर्थ रामदास के संस्कारों से महाराष्ट्र बना है। संतों ने भक्ति के साथ इंसानियत, बराबरी और समाजसेवा भी सिखाई। संत तुकाराम के "जो दुखी और पीड़ित हैं" वाले विचार का हवाला देकर शिंदे ने कहा कि जरूरतमंदों की सेवा ही असली धर्म है।
सूखे से परेशान किसानों के सवाल पर शिंदे ने कहा कि सरकार पूरी ताकत से उनके साथ है। उन्होंने घोषणा की कि सूखे की वजह से मुश्किल में आए किसानों की बेटियों की शादी में शिवसेना मदद करेगी। कुंभ मेले के बारे में उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आस्था का आयोजन नहीं है। यह पर्यटन, व्यापार, रोजगार, बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने वाला महोत्सव भी है।
शिंदे ने यह भी ऐलान किया कि 13 अखाड़ों के संत-महंतों और साधुओं के भोजन का इंतजाम शिवसेना की ओर से किया जाएगा। उन्होंने कहा, "संतों की सेवा करना हमारा सौभाग्य है।"
कुंभ के कामों से प्रभावित होने वाले परिवारों को पक्के घर देकर बसाया जाएगा और किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। व्यापारियों, दुकानदारों और किसानों का नुकसान हुआ तो सरकार मुआवजा देगी। साधुग्राम की जमीन अधिग्रहण से जुड़ी शिकायतें भी सुलझाई जाएंगी। त्र्यंबकेश्वर स्टेडियम के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है और फंड की योजना बन चुकी है। नगर परिषद के प्रशासकीय भवन के लिए जरूरी निधि देने का भरोसा भी उन्होंने दिया।
शिंदे ने कहा कि उनके पूरे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में यह पहला और बेहद अहम कार्यक्रम है। संत-महंतों का सम्मान करना सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा, "सीएम यानी कॉमन मैन। मैंने कार्यकर्ता के तौर पर काम किया और आगे भी कार्यकर्ता बनकर ही काम करूंगा।"
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और पूरे मंत्रिमंडल के सहयोग से सरकार सिंहस्थ को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत से काम करेगी। अखाड़ों, साधु-महंतों, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को कोई तकलीफ न हो, इसका ध्यान रखा जाएगा। शिंदे ने भरोसा जताया, "संतों के आशीर्वाद से यह कुंभ सफल करेंगे, किसी पर अन्याय नहीं होने देंगे।"
संत सम्मेलन में जगद्गुरु स्वामी शांतिगिरी महाराज, महंत महामंडलेश्वर शिवगिरी महाराज, महंत सत्यगिरी महाराज, महंत धनंजयगिरी महाराज, महंत शंकरानंद सरस्वती महाराज, महंत रमेशगिरी महाराज, महंत दुर्गानंद महाराज, महंत रामकिशोरदास शास्त्री, महंत दुर्गादास महाराज, महंत रामनवमीदास महाराज, महंत गोपालदास महाराज, संत देवेंद्रसिंह शास्त्री और धर्मवीर आध्यात्मिक सेना के प्रदेशाध्यक्ष अक्षय महाराज भोसले मौजूद थे। कई अखाड़ों के महामंडलेश्वर, संत-महंत, धर्माचार्य और मान्यवर भी आए थे।
मंत्री दादा भुसे, विधायक सुहास कांदे, गोकुल गीते, जिला प्रमुख अजय बोरस्ते, विनय करंजे, विजय आमले, प्रवीण आमले समेत स्थानीय जनप्रतिनिधि और पार्टी पदाधिकारी बड़ी संख्या में हाजिर थे।
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