पुणे के 32 गांवों में नई इमारतों को पानी देने की जिम्मेदारी अब बिल्डरों की, PMC ने बदली शर्तें
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पुणे महानगरपालिका (PMC) में शामिल 32 गांवों में अब डेवलपर्स को नई इमारतों में कम से कम तीन साल तक पानी का इंतजाम करना होगा।
पुणे, 31 अक्टूबर 2026: पुणे महानगरपालिका (PMC) की हद में जोड़े गए 32 गांवों में बनने वाली नई इमारतों के लिए पानी का इंतजाम अब डेवलपर्स को करना होगा। यह जिम्मेदारी इमारत में लोगों के रहने लगने के बाद कम से कम तीन साल तक रहेगी। अगर PMC अपनी सप्लाई तीन साल के बाद शुरू करती है, तो तब तक डेवलपर को पानी देना होगा। यानी दोनों में से जो बाद में आए, वही मियाद मानी जाएगी।
PMC ने इसके लिए डेवलपर्स से लिया जाने वाला अंडरटेकिंग बदल दिया है। नई शर्तों का मकसद पानी का इंतजाम और उसका खर्च बिल्डरों के सिर पर डालना है। इससे उन हाउसिंग सोसाइटियों को राहत मिल सकती है, जो फिलहाल प्राइवेट टैंकरों पर लाखों रुपये खर्च कर रही हैं।
2026 में लाए गए पहले वाले अंडरटेकिंग में एक छूट थी। सोसाइटी बन जाने और कमर्शियल यूनिट चालू हो जाने के बाद डेवलपर यह जिम्मेदारी हाउसिंग सोसाइटियों पर डाल सकते थे। नतीजा यह हुआ कि इलाके PMC की हद में आ जाने के बावजूद वहां के निवासी टैंकरों के भरोसे रह गए।
अब बदली हुई शर्तों में बोरवेल, टैंकर और अस्थायी स्टोरेज टैंक के जरिए पानी का इंतजाम करना डेवलपर की जिम्मेदारी है। इसका पूरा खर्च भी उन्हें ही उठाना होगा। बिल्डिंग परमिशन, कंप्लीशन सर्टिफिकेट और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट, इन सभी चरणों में डेवलपर जवाबदेह रहेंगे।
डेवलपर्स को मौजूदा पानी के इंतजाम और अपनी जिम्मेदारियों की जानकारी खरीद के दस्तावेज यानी सेल डीड, अलॉटमेंट लेटर और सोसाइटी रजिस्ट्रेशन के कागजात में भी साफ लिखनी होगी। टैंकर और बोरवेल से दिए जाने वाले पानी की समय समय पर लैबोरेटरी में जांच करानी होगी।
शर्तें तोड़ने पर जुर्माना लग सकता है, परमिशन सस्पेंड की जा सकती है और नई मंजूरियों पर रोक लगाई जा सकती है। गंभीर मामलों में आगे और कार्रवाई भी हो सकती है। एक बात और, अगर कोई प्रोजेक्ट किसी नए मालिक को सौंप दिया जाता है, तब भी ये शर्तें उस पर उसी तरह लागू रहेंगी।
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