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पुणे के ऑर्बिस स्कूल में TEDx: 18 बच्चों ने मंच पर रखे अपने विचार

पुणे के ऑर्बिस स्कूल में TEDx: 18 बच्चों ने मंच पर रखे अपने विचार तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पढ़ाई PT24 टीम

पुणे के TEDxTheOrbisSchool में 108 बच्चों में से चुने गए 18 वक्ताओं ने "Extra in the Ordinary" थीम पर अपनी बात रखी।

पुणे, 24 अक्टूबर 2026: कल्पनाशीलता, आत्मविश्वास और नए विचारों की ताकत का जश्न मनाते हुए TEDxTheOrbisSchool में नौजवान वक्ता एक मंच पर जुटे। इस कार्यक्रम की थीम थी "Extra in the Ordinary"। बच्चों को यहां अपनी बात रखने, नए नजरिए खोजने और यह दिखाने का मौका मिला कि रोजमर्रा के अनुभवों से भी काम के विचार निकल सकते हैं।

सिलेक्शन प्रोसेस में 108 उत्साही वक्ताओं ने हिस्सा लिया। इनमें से 18 बच्चों को मंच पर अपनी टॉक देने के लिए चुना गया। अलग-अलग स्कूलों से आए 12 से 18 साल के इन बच्चों के जरिए कार्यक्रम ने यह बात सामने रखी कि नौजवानों को बोलने का मौका देना और उन्हें भरोसे के साथ अपने विचार रखने के लिए हौसला देना जरूरी है।

चुने गए वक्ताओं में दिव्यांश बोहरा, अरमान अली राज, अग्रजा शेलके, श्रद्धा पगिरे, ध्रुव भट, अनिका देसाई, अरहम संघवी, सारा धारीवाला, सारा सोनी, सहस्रा समयमंत्री, सावी बोगेवार, अथर्व नेमा, शैमा पठान, अथर्व अरोड़ा, शौर्य डागा, चैतन्य सैनी, साची thadhani और तन्मय भारद्वाज शामिल थे। सबने अपने आसपास की दुनिया को अपनी नजर से देखकर पेश किया। उनकी टॉक में खुलकर बोलने की हिम्मत थी, अलग-अलग नजरिए तलाशने की रचनात्मकता थी और अपने विचारों से दूसरों को प्रेरित करने की चाह भी दिखी।

टॉक के विषय काफी अलग-अलग थे। किसी ने शुक्रगुजार होने की अहमियत पर बात की, तो किसी ने नाकामी से सीखने पर। सस्टेनेबिलिटी, सीमाओं के बावजूद रचनात्मक बने रहना, छोटे-छोटे पलों का महत्व और औसत होने में भी कीमत ढूंढना जैसे मुद्दे भी उठे। हर टॉक ने सुनने वालों से कहा कि जाने-पहचाने अनुभवों को एक बार फिर नए सिरे से देखें और उन संभावनाओं को पहचानें जो रोज की जिंदगी में अक्सर नजर से छूट जाती हैं।

प्रेजेंटेशन से आगे बढ़कर यह कार्यक्रम उस आत्मविश्वास और लगन का भी जश्न था, जो दर्शकों के सामने खड़े होकर अपनी बात कहने के लिए चाहिए। TEDxTheOrbisSchool में खुद को जाहिर करने, तैयारी करने और अपने नजरिए को बांटने की कीमत पर जोर दिया गया। माहौल ऐसा रखा गया कि हिस्सा लेना और सीखना भी उतना ही जरूरी था जितनी खुद टॉक।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर धीरज गुगले मौजूद थे, जो IDAS हैं और NADFM, पुणे में जॉइंट डायरेक्टर हैं। उनके साथ दूसरे मान्यवर भी आए। इन सबकी मौजूदगी ने इस बात को रेखांकित किया कि नौजवान टैलेंट को निखारना और छात्रों को क्लासरूम से आगे की स्किल्स सीखने के मौके देना जरूरी है। कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को अलग-अलग नजरिए से जुड़ने, सोचने-परखने की अपनी क्षमता मजबूत करने और विचारों की विविधता को सराहने के लिए प्रेरित किया।

प्रोग्राम का कामयाब आयोजन ऑर्गनाइजिंग टीम, टीचरों, स्टूडेंट वॉलंटियरों और सपोर्ट स्टाफ की मिली-जुली मेहनत से मुमकिन हुआ। इनके तालमेल की वजह से वक्ताओं और दर्शकों, दोनों के लिए अनुभव अच्छा और दिलचस्प रहा।

TEDxTheOrbisSchool सिर्फ मंच पर बोलने का एक मौका नहीं था। यह जिज्ञासा, मौलिक सोच और विचार बांटने के असर का जश्न था। कार्यक्रम से यह यकीन और पक्का हुआ कि अर्थपूर्ण बदलाव किसी नए नजरिए, किसी सोचे-समझे सवाल या रोज के किसी अनुभव को जरा गौर से देखने जैसी साधारण चीज से भी शुरू हो सकता है।

अलग पहचान, रचनात्मकता और नौजवान आवाजों का जश्न मनाते हुए इस कार्यक्रम ने दिखाया कि जब बच्चों को अलग ढंग से सोचने, खुद को जाहिर करने और अपनी बात सुनाने का हौसला मिलता है, तो आम पल भी असाधारण विचारों को जन्म दे सकते हैं।

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