पिंपले निलख और थेरगांव में 23 मोटर पंप जब्त, पानी चोरी रोकने को पांच दस्ते उतरेंगे
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पिंपरी चिंचवड महानगरपालिका ने गैरकानूनी तरीके से पानी खींचने वालों पर कार्रवाई तेज की है।
पिंपरी चिंचवड महानगरपालिका (PCMC) ने पिंपले निलख और थेरगांव में उन लोगों के खिलाफ मुहिम चलाई, जो अपने नल कनेक्शन में सीधे मोटर पंप लगाकर ज्यादा पानी खींच रहे थे। जलापूर्ति विभाग ने इस दौरान कुल 23 मोटर पंप जब्त किए। यह जानकारी 29 अक्टूबर 2026 की है।
लेकिन कार्रवाई के बाद भी मामला थमा नहीं है। इलाके के लोगों का आरोप है कि कुछ लोगों ने जब्त पंप दोबारा जोड़ लिए हैं, तो कुछ ने नए पंप लगाकर फिर से पानी खींचना शुरू कर दिया है। यानी पंप उठा लेने भर से चोरी रुकती नहीं दिख रही, और सवाल उठ रहा है कि इन इलाकों की जांच दोबारा कैसे होगी।
इसी वजह से महानगरपालिका अब पांच खास दस्ते खड़े करने जा रही है। ये दस्ते दो शिफ्ट में, यानी सुबह और शाम जब सप्लाई चालू रहती है, शहर के अलग-अलग हिस्सों में गश्त करके जांच करेंगे। प्रशासन के मुताबिक हर दस्ते में छह लोग रहेंगे। टीम की अगुवाई जलापूर्ति विभाग का जूनियर इंजीनियर करेगा। उसके साथ एक सिविक असिस्टेंट, एक हेल्थ इंस्पेक्टर और महाराष्ट्र सिक्योरिटी फोर्स का एक जवान रहेगा। बाकी दो सदस्यों में एक प्लंबर या मीटर इंस्पेक्टर होगा और एक मजदूर।
PCMC के कार्यकारी अभियंता महेश बारिदे ने कहा, "पानी की बर्बादी रोकने के लिए पांच दस्ते दो अलग-अलग शिफ्ट में तैनात किए जाएंगे। अगर लोगों को कहीं पानी बर्बाद होता दिखे या कोई ऐसा करता मिले, तो वे महानगरपालिका में शिकायत करें। संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।"
अब सवाल है कि पंप से दिक्कत क्या है। जब नल कनेक्शन से सीधे मोटर पंप जुड़ता है, तो सप्लाई पाइपलाइन में पानी का प्रेशर गिर जाता है। इसका सीधा असर आसपास के बाकी घरों पर पड़ता है, जिन्हें अपने हिस्से का पूरा पानी नहीं मिल पाता। ऐसी शिकायतें बढ़ रही थीं और उसके बाद ही महानगरपालिका ने दस्तों की योजना बनाई।
एक बात अभी साफ नहीं है। दस्ते कब से मैदान में उतरेंगे, इसका कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है। प्रशासन ने यह भी नहीं बताया कि सबसे पहले किन संवेदनशील इलाकों में जांच होगी। शिकायत आने पर जलापूर्ति विभाग कितनी जल्दी हरकत में आएगा, इस पर भी कुछ नहीं कहा गया है। कोई तय समय-सारणी या जवाब देने की समय-सीमा न होने से लोगों को शक है कि ये इंतजाम ठीक से लागू होंगे या कागजों में ही रह जाएंगे।
महानगरपालिका ने कई बार लोगों से कहा है कि पानी बर्बाद करने वालों और गैरकानूनी तरीके से मोटर पंप चलाने वालों की खबर दें। कई निवासी कहते हैं कि पड़ोसी से रिश्ते एक तरफ रखकर वे जनहित में शिकायत करने को तैयार हैं। पर उन्हें डर है कि अगर प्रशासन फौरन कदम नहीं उठाता, तो शिकायत करने वालों की पहचान खुल सकती है। इससे लोगों का महानगरपालिका पर भरोसा भी कमजोर पड़ेगा। इसलिए निवासी चाहते हैं कि शिकायत मिलने के 24 से 48 घंटे के भीतर कार्रवाई की एक तय समय-सीमा हो।
निवासियों का कहना है कि सिर्फ पंप जब्त करने से हल नहीं निकलेगा। जिनके पंप पकड़े जाते हैं, वे जुर्माना भरकर उन्हें वापस ले सकते हैं या नया उपकरण खरीदकर वही काम फिर शुरू कर सकते हैं। इसलिए वे ज्यादा सख्ती चाहते हैं: अचानक जांच, जुर्माना, नियम तोड़ने वालों का पानी कनेक्शन काट देना और बार-बार पकड़े जाने वालों पर केस दर्ज करना। उन्हें उम्मीद है कि जलापूर्ति विभाग बातों पर नहीं रुकेगा, पांचों दस्ते बिना देर किए उतारेगा और पिंपले निलख व थेरगांव समेत पूरे शहर में असरदार कार्रवाई करेगा।
पानी की किल्लत का मसला अकेले घरों तक सीमित नहीं है। वाकड, पिंपले सौदागर, ताथवडे, थेरगांव और पुनावले की हाउसिंग सोसाइटियों से भी पानी कम मिलने की शिकायतें आ रही हैं। हाउसिंग सोसाइटियों के एक फेडरेशन ने ऐसी 36 सोसाइटियों की सूची महानगरपालिका को सौंपी है। फेडरेशन ने मांग की है कि सप्लाई का स्तर और बंटवारे की दिक्कतें परखने के लिए जांच कराई जाए। लोगों से पानी बचाने की अपील करने के साथ महानगरपालिका को यह भी देखना होगा कि इन सोसाइटियों को असल में कितना पानी चाहिए, उन्हें कितना मिल रहा है और बंटवारे में अड़चन कहां है।
प्रेशर की तुलना के आंकड़े भी अभी नहीं हैं। एक ही गली के पहले और आखिरी घरों में दबाव कितना अलग है, इसकी रीडिंग उपलब्ध नहीं है। निवासियों का मानना है कि सप्लाई के वक्त अचानक जांच से गैरकानूनी पंपिंग का असर समझ आएगा। उनका सुझाव है कि मोटर पंप चालू और बंद रखकर प्रेशर नापा जाए। साथ ही वे चाहते हैं कि वितरण नेटवर्क में लीकेज, वाल्व के इंतजाम और रुकावटों की भी जांच हो।
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